सुमा शिरुर का मक़सद ऐसा माहौल बनाना जिसमें खिलाड़ी खेल के साथ आनंद ले सकें

इस ओलंपियन की अकादमी में न सिर्फ़ खिलाड़ियों को तराशा और निखारा जाता है, बल्कि उन्हें मानसिक तौर पर शांति भी दी जाती है।

पूर्व भारतीय शूटर सुमा शिरुर (Suma Shirur) ने खेल में भारत का नाम ऊंचा किया है, जिसमें उनके नाम कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में पदक शामिल हैं।

इन अनुभवों के साथ सुमा पिछले कई सालों से भारतीय शूटर्स को कोचिंग दे रही हैं और इसके लिए उन्होंने नवी मुंबई में लक्ष्य शूटिंग अकादमी भी खोली है, जिसकी शुरुआत साल 2006 में हुई थी।

शुरुआत में सुमा का लक्ष्य था कि एथलीटों को तराशा और निखारा जाए, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें ये लगा कि इन निशानेबाज़ों को एक बेहतरीन और अच्छा माहौल देना भी ज़रूरी है।

विंटर ओलंपियन शिवा केशवन (Shiva Keshavan) के साथ अपने इंस्टाग्राम शो ‘इंस्पायर’ के ज़रिए उन्होंने कहा, “इस क्लब का उद्देश्य एक ऐसा माहौल तैयार करना है जो मुझे अपने करियर के दौरान नहीं मिल पाया था।’’

“मेरे लिए खेल सिर्फ़ एक प्रतिस्पर्धा नहीं है, खेल ऐसी चीज़ है जो आपकी आत्मा के लिए भी बहुत ज़रूरी है। ये आपके शरीर के लिए भी उत्तम है और इसी माहौल को हमें बेहतर बनाने की ज़रूरत है। लिहाज़ा मैं चाहती हूं कि खेल में बेहतर माहौल लाया जाए, जिससे एक एथलीट का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकाला जा सके।“

कोच बनना एक हसीन इत्तेफ़ाक

सुमा शिरुर की ज़िंदगी का सबसे बेहतरीन लम्हा 2004 एथेंस ओलंपिक में आया था जब उन्होंने 10 मीटर एयर राइफ़ल फ़ाइनल में जगह बना ली थी।

उस समय इस खेल का हाल बहुत बेहतर नहीं था, लेकिन उसके बावजूद उनके इस प्रदर्शन ने दूसरे निशानेबाज़ों को न सिर्फ़ प्रेरित किया बल्कि आगे के लिए कई रास्ते भी खोले।

“जब मैंने फ़ाइनल में जगह बनाई थी, तो इससे प्रेरित होकर स्थानीय प्रशासन ने एक अकादमी का निर्माण किया था और मुझे इसमें मदद करने के लिए आगे बुलाया था। इस तरह ही मेरी कोचिंग की नई पारी शुरू हुई थी।”

हालांकि ये सबकुछ अचानक हुआ था, लेकिन फिर भी सुमा ने एक बेहतरीन योगदान दिया।

उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है उस समय मैं बिल्कुल तैयार थी, क्योंकि तब मैंने देश के लिए अपने 10 साल इस खेल को दे दिए थे।”

46 वर्षीय सुमा फ़िलहाल जूनियर राइफ़ल टीम की हाई परफॉर्मेंस कोच हैं, और ऐसे में जब अगले साल होने वाले टोक्यो 2020 में भारत की ओर से 15 शूटर्स अपना स्थान पक्का कर चुके हैं, उनमें से उनकी एक शागिर्द सुमा का सपना भी सच कर सकती हैं।

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