गगन नारंग ने लंदन ओलंपिक 2012 में कांस्य पदक जीतकर आलोचकों का मुंह किया था बंद

गगन नारंग ने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक अपने नाम कर आलोचकों को तगड़ा जवाब दिया था। दरअसल, आलोचक हमेशा गगन नारंग की तुलना एक बड़े बच्चे के रूप में करते थे।

लेखक सतीश त्रिपाठी ·

भारतीय निशानेबाज़ गगन नारंग (Gagan Narang) अपनी पीढ़ी के प्रभावशाली भारतीय एथलीटों में एक माने जाते हैं, उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत का परचम लहराया था। बताते चलें कि उनकी पीढ़ी के ऐसे बहुत कम निशानेबाज़ हैं, जिन्होंने ओलंपिक में पदक हासिल किया हो।

निशानेबाज़ चैंपियन गगन नारंग ने भारतीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) के साथ FIT India Webinar में कई खुलासे किए और कहा, "बहुत से लोगों ने मुझे कहा कि आप एक बच्चे जैसे हो, आप ओलंपिक में पदक हासिल नहीं कर सकते हैं।"

हालांकि गगन नारंग इस बात से निराश नहीं हुए बल्कि उन्होंने इस बात को सकारात्मक तरीके से लिया और अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लगातार मेहनत की

नारंग ने आगे कहा, "आखिरकार एक दिन मैंने उन्हें गलत साबित कर ही दिया। अगर आप सोचते हैं कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या कहते हैं तो आपको अपना जीवन जीना छोड़ देना चाहिए।"

जब टीवी पर ओलंपिक मशाल जलते हुए देखा

बताते चलें कि गगन नारंग ने चार बार ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, वह जब 9 वर्ष की उम्र के थे तो उन्होंने यह सपना देखा था और जो बड़े होने पर पूरा हुआ।

गगन नारंग अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहते हैं, "1992 में जब बार्सिलोना गेम्स हो रहा था तब हमारे पास एक ब्लैक एंड व्हाइट टीवी था। वहां, मैंने पहली बार एक तीरंदाज को एक तीर से ओलंपिक लौ जलाते हुए देखा था और बाद में मुझे पता चला कि ओलंपिक खेल क्या है। ये देखने के बाद मैंने अपने माता-पिता से कहा कि मैं ओलंपिक में जाना चाहता हूं।"

शूटिंग को एक चैलेंज की तरह स्वीकार किया

गगन नारंग ने अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की, उन्होंने बचपन से ही शूटिंग पर ध्यान देने से पहले क्रिकेट, टेनिस और फुटबॉल जैसे कई खेलों में अपनी दिलचस्पी दिखाई।

नारंग ने शूटिंग पर बात करते हुए कहा, "मैंने शूटिंग के लिए अभ्यास शुरू कर दिया था, क्योंकि यह एक ऐसा खेल था जिसने मेरी मानसिक क्षमता को लगातार चुनौती दी। शूटिंग एक ऐसा खेल है, जो मुझे लगता है कि इसमें 98 प्रतिशत मानसिक और सिर्फ 2 प्रतिशत शारीरिक शक्ति का इस्तेमाल होता है।"

फिलहाल गगन नारंग का मानना ​​है कि शूटिंग के लिए शारीरिक और मानसिक फिटनेस दोनों चीजें अपनी जगह बहुत महत्वपूर्ण हैं।

गगन नारंग ने शूटिंग पर चर्चा करते हुए कहा, "बहुत से लोगों ने कहा कि इस खेल में शारीरिक शक्ति का ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता है, लेकिन जब आप शूटिंग कर रहे होते हैं तो आपको मालूम होता है कि आपके नाखून भी पसीने से भरे हुए हैं। वास्तव में यह एक मुश्किल भरा खेल है।"

यही नहीं जब गगन नारंग ने 1997 में खेल पर अपना फोकस करना शुरु किया तो उन्हें प्रैक्टिस के लिए अपनी शूटिंग रेंज में जाने के लिए प्रतिदिन 5 किमी पैदल चलना पड़ता था। नारंग ने उन दिनों को याद करते हुए कहा, "उन दिनों में लोग मुझसे पूछते थे, 'कौन से पिक्चर की शूटिंग करते हो?'। यह मेरे लिए लोगों को समझाना बहुत मुश्किल था कि बंदूक से गोली चलाना भी एक खेल है। "वहीं जब धीरे-धीरे हमने जीतना शुरू किया तो यह मिथक बदल गया।"