2020 ओलंपिक में भारत की ओर से ज़्यादा शटलरों का जाना मुश्किल: पुलेला गोपीचंद

भारत के राष्ट्रीय कोच को लगता है कि ओलंपिक साइकिल के दौरान बेहतर रणनीति की जरुरत होती है।

हाल ही में कोरोना वायरस के कारण रद्द हुए टूर्नामेंट के कारण कई भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों के ओलंपिक में खेलने के सपने पर संकट आ गया है। भारत के राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand) को लगता है कि अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो शायद भारत की तरफ से ज्यादा खिलाड़ी ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

पुलेला गोपीचंद ने दिल्ली में हुए एक इवेंट के दौरान कहा कि “अभी भी कुछ क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट बचे हुए है और मैं उम्मीद कर रहा हूं कि हमारे ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी क्वालीफाई कर पाएंगे”। इसके आगे उन्होंने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी ओलंपिक जाए लेकिन मुझे लगता है कि शायद ऐसा ना हो पाएगा”। 

अगर पूर्व ऑल इंग्लैंड ओपन चैंपियन की मानें तो भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी अपने कैलेंडर को बेहतर तरीके से नियोजित कर ऐसी स्थिति में आने से बच सकते थे।

 गोपीचंद ने बेहतर रणनीति की वकालत की

साल 2019 का सीजन भारतीय खिलाड़ियों के लिए काफी निराशाजनक रहा है। इस सीजन में खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस सीजन में पीवी सिंधु (PV Sindhu) और बी साई प्रणीत (B Sai Praneeth) ही वर्ल्ड चैंपियनशिप (World Championships) मेडल जीतने में सफल हो पाए हैं।

पुलेला गोपीचंद ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि यह चोटों की वजह से था बल्कि मुझे लगता है कि सभी को अपनी बेसिक ट्रेनिंग पर ध्यान देकर अपना फाउंडेशन मजबूत करना चाहिए। इससे वह और अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे” इसके अलावा उन्होंने कहा कि “हमने एक मौका खो दिया है, हम और बेहतर रणनीति बना सकते थे। साल दर साल खराब सिस्टम के कारण हम खिलाड़ियों के टूर्नामेंट के निर्धारण को नियंत्रित नहीं करते हैं।” भारतीय कोच ने कहा कि हमे इस पर नियंत्रण करने की जरुरत है और उम्मीद है कि पेरिस में होने वाले 2024 ओलंपिक में हम ऐसी गलती नहीं करेंगे।

जीवन खेल से बढ़कर है

गोपीचंद ने स्वीकार किया कि इवेंट को अप्रत्याशित रूप से रद्द करना भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए मुश्किल था, क्योंकि वे इन इवेंट में रैंकिंग अंक लेना चाहते थे, उन्होंने कहा कि ऐसी स्थितियों में खेल से परे देखना होगा।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि “हमारे लिए ओलंपिक चार साल में एक बार आते हैं और ज्यादातर एथलिटों के लिए ये मौका जिदंगी में केवल एक बार आता है। लेकिन ये भी समझना होगा कि खेल जीवन का केवल हिस्सा है। हम कभी कभी अपने फोकस के कारण ऐसी परिस्थिति को दरकिनार कर देते हैं।”

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