गौरमांगी सिंह: मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता भारतीय फुटबॉल के लिए बड़ा कदम

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर बोलते हुए भारत के पूर्व कप्तान ने खुलासा किया कि कैसे मानसिक मुद्दों को स्वीकार करने से भारतीय फुटबॉलरों को आगे बढ़ने में मदद मिली है।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों की व्यापक सामाजिक स्वीकृति और इसके बारे में खुली चर्चा के बिना न्याय किए जाने का डर आधुनिक भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए एक वरदान रहा है, ऐसा भारत के पूर्व कप्तान गौरमांगी सिंह (Gouramangi Singh) का मानना है।

15 साल से अधिक समय तक भारतीय फुटबॉल टीम का हिस्सा रहने वाले गौरमांगी सिंह ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के बारे में धारणा के बदलाव ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) के साथ बातचीत के दौरान भारतीय फुटबॉल को कैसे प्रभावित किया है।

गौरमांगी ने कहा, "ये बहुत अच्छा है कि खिलाड़ी और कोच उन मानसिक चुनौतियों के बारे में खुल कर बात कर रहे हैं, जिनका सामना वे आजकल करते हैं।"

उन्होंने कहा, "अब हमारे पास ऐसे प्रोफेशनल लोग हैं जो इन चीजों में मदद करने के लिए हैं, और वे खिलाड़ियों को अपने फुटबॉल कैरियर में आगे बढ़ने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।"

आई-लीग एस्पिरेंट्स बेंगलुरु यूनाइटेड के सहायक कोच, 34 वर्षीय गौरमांगी ने ये भी गौर किया है कि जब वो कुछ साल पहले पेशेवर खिलाड़ी के रूप में खेल रहे थे, तब उस समय स्थिति बहुत अलग थी।

गौरामांगी सिंह वर्तमान में बेंगलुरु यूनाइटेड एफसी के सहायक कोच हैं। फोटो: AIFF

उन्होंने कहा, “पहले लोग ऐसी चीजों के बारे में इतने जागरूक नहीं थे। अगर आप इस तरह के मुद्दों का सामना कर रहे होते थे, या आप कुछ परिस्थितियों से असहज होते थे, तो आपको मुख्य रूप से इसे खुद से लड़ना होता था।”

“लेकिन अब लोगों ने महसूस किया है कि ये स्वीकार करने में कोई शर्म नहीं है कि आपको कुछ स्थितियों से निपटने में मुश्किलें हो रही हैं। यह एक बड़ा कदम है।”

पूर्व खिलाड़ी ने ये भी कहा कि मानसिक रूप से मजबूत होने के लिए किसी खिलाड़ी को तैयार करना उस समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है जब वो सीनियर लेवल पर हो।

“जब मैंने टाटा फुटबॉल अकादमी से स्नातक किया और सीनियर स्तर पर फुटबॉल खेलना शुरू किया, तब ये बहुत मुश्किल था। हर कोई आपसे अच्छे परिणाम की उम्मीद कर रहा होता है। गौरमांगी ने अपने स्वयं के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी टीम में आप एक निश्चित कारण के लिए चुने जाते हैं, और अगर आप उस कारण को पूरा नहीं करते हैं, तो आपके लिए और मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

उन्होंने कहा, “ये वो जगह है जहाँ एक खिलाड़ी की मानसिक शक्ति खेल में देखी जाती है। अगर वो जल्दी ही महसूस कर लेता है कि उसकी ताकत और कमजोरियाँ क्या हैं, तो वो बच सकता है और आगे बढ़ सकता है। इस स्तर पर मानसिक मजबूती, खिलाड़ी को बना या बिगाड़ सकती है।”

COVID महामारी के कारण खेल में अनिश्चितताओं और आशंकाओं के बाद मानसिक स्वास्थ्य का महत्व और भी बढ़ गया है।

ISL में ATK के लिए खेलने वाले पूर्व लिवरपूल के दिग्गज खिलाड़ी लुइस गार्सिया (Luis Garcia) ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि खेल मनोविज्ञान, फुटबॉल को आगे बढ़ाने में एक अभिन्न भूमिका होगी।