हॉकी दिग्गज और ओलंपिक पदक विजेता बलबीर सिंह सीनियर अस्पताल में भर्ती

96 वर्षीय इस महान हॉकी खिलाड़ी को निमोनिया की शिकायत की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता और भारतीय हॉकी दिग्गज खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर (Balbir Singh Sr) को कुछ दिनों पहले तेज बुखार होने की वजह से शनिवार को चंडीगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

एक हॉकी टीम के पूर्व और सिंह के फैमिली डॉक्टर ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) को बताया, “बलबीर को गुरुवार रात को 104 डिग्री बुखार था। शुरुआत में हमने उन्हें घर पर ही स्पंज बाथ देकर मैनेज करने की कोशिश की, लेकिन जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो हमने उन्हें चंडीगढ़ के पीजीआई में शिफ्ट करने की कोशिश की।”

उन्होंने आगे कहा, “क्योंकि पीजीआई चंडीगढ़ एक कोरोना वायरस (COVID-19) अस्पताल है, इसलिए उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना मुश्किल था। इसलिए हमने उन्हें मोहाली के फोर्टिस में भर्ती कराया। वह इस समय आईसीयू में हैं, लेकिन कल से बेहतर हैं।”

डॉ. कालरा ने कहा कि बलबीर सिंह सीनियर का COVID-19 टेस्ट भी किया गया था, जिसके परिणाम रविवार को आने की उम्मीद है।

अपनी बेटी सुशबीर और पोते कबीर के साथ चंडीगढ़ में रहने वाले बलबीर सिंह सीनियर को पिछले साल की शुरुआत में ब्रोन्कियल निमोनिया (Bronchial Pneumonia) के कारण पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) में भर्ती कराया गया था।

जहां 96 वर्षीय का तीन महीने से भी अधिक समय तक इलाज किया और भर्ती होने के दौरान उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा, जिससे वह पूरी तरह से ठीक हो गए।

भारतीय हॉकी के दिग्गज हैं बलबीर सिंह सीनियर

बलबीर सिंह सीनियर भारतीय हॉकी टीम के सबसे बेहतरीन फॉरवर्ड खिलाड़ियों में से एक थे और यकीनन वह अपने समय के दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी थे। हॉकी के जादूगर ध्यानचंद (Dhyan Chand) के बाद बलबीर सिंह सीनियर ने उनकी जगह सम्भाली और वह तीन बार ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे।

उन्होंने 1948 और 1952 में दो ओलंपिक फाइनल में सात गोल दागे और 1956 के ओलंपिक के दौरान टीम के कप्तान के तौर पर चुने गए, जहां उन्होंने एक बेहतरीन लीडर की भूमिका निभाई।

जर्मनी के खिलाफ सेमीफाइनल में उनका दाहिना हाथ फ्रैक्चर हो गया था, उन्हें फाइनल से बाहर होने की उम्मीद थी।

हालांकि, यह मुकाबला सबसे बड़ी विरोधी टीम पाकिस्तान के खिलाफ था। इसलिए दर्द के बावजूद बलबीर सिंह सीनियर ने टीम का नेतृत्व किया और भारतीय हॉकी टीम को ऐतिहासिक छठा ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाया।

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