हर बाधा को पार कर भारतीय पहलवान सुमित मलिक ने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में जीता स्वर्ण पदक, जानिए कैसे?

मलिक ने खुलासा किया कि सर्जरी के बाद वह कुश्ती जारी नहीं रख सकता था, लेकिन उसने गोल्ड कोस्ट में पोडियम फिनिश के साथ वापसी की  

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारतीय पहलवान सुमित मलिक ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए सुशील कुमार के यूट्यूब चैनल पर बताया कि कैसे उसने बाधाओं पर काबू पाते हुए 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।

मलिक की निगाहें कॉमनवेल्थ गेम्स में ख्याति पर टिकी हुई थी, लेकिन एक चोट ने उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। बाद में उन्होंने चोट के उपचार के लिए एक ऑपरेशन कराया, जिसके बाद डॉक्टर ने उन्हें खेल से दूरी बनाये रखने की सलाह दी थी।

इसके बाद भी 28 वर्षीय मलिक ने मुश्किल से जूझते हुए वापसी के लिए दृढ़ संकल्प दिखाया और ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में देश को गौरवान्वित किया। उन्होंने पुरुषों की फ्रीस्टाइल 125 किग्रा की पोडियम में शीर्ष स्थान हासिल किया। फाइनल में नाइजीरिया का प्रतिद्वंद्वीसिनीवी बोल्टिक चोट के कारण मुकाबले में नहीं उतरा।

सुमित मलिक ने सुशील कुमार के यूट्यूब चैनल पर बताया, "मेरी कमर के पास का हिस्सा चोटिल होने के कारण मुझे ऑपरेशन करवाना पड़ा। उस समय डॉक्टर ने कहा कि मैं कुश्ती नहीं लड़ सकता। तब मुझसे गुरुजी ने कहा कि अभ्यास से सब कुछ संभव है। मैंने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए शेड्यूल का अनुसरण किया। जांच के लिए नियमित डॉक्टर के पास गया और फिजियोथेरेपी भी ली।"

मलिक को कुश्ती से परिचय कराने वाले और नई दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में लाने वाले उनके चाचा थे। इस स्टेडियम में योगेश्वर दत्त, सुशील कुमार और अमित कुमार दहिया जैसे स्टार पहलवान तैयार हुए हैं।

14 साल की उम्र में कुश्ती की शुरूआत करने के दौरान मलिक के लिए कठिन प्रशिक्षण करना बहुत मश्किल था, लेकिन कुछ सालों बाद उन्हें यह पसंद आने लगा।

मलिक ने कहा, "जब मैं 14 साल की उम्र में छत्रसाल स्टेडियम में आया था, तब मेरे चाचा भी यहां कुश्ती करते थे। मैं उनके साथ ही यहां आया था। उन्होंने कहा कि मुझे गुरुजी के पास जाकर कुश्ती सीखनी है। तब से मैं यह करता आ रहा हूं।"

उन्होंने कहा, "जब मैं यहां आया था तो एक-दो साल में ही मुझे ऐसा लगने लगा कि मुझे क्या करना चाहिए। शुरुआत में मुझे इतना ज्यादा अभ्यास करना मुश्किल लगता था।"

लंदन 2012 के रजत पदक विजेता सुशील कुमार, मलिक के रस्सी प्रशिक्षण से काफी प्रभावित थे, क्योंकि उनका मानना ​​है कि यह एक हैवीवेट पहलवान को और मजबूत बनाने के साथ प्रतिद्वंद्वी पर पकड़ को और बेहतर बनाएगा।

सुशील कुमार ने कहा, "सुमित 125 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने के बावजूद रस्सियों का प्रशिक्षण करता है। जब उसके भार वर्ग वाला कोई पहलवान रस्सियों के साथ अभ्यास करता है तो उसे मजबूत बनने से कोई नहीं रोक सकता। रस्सी से प्रशिक्षण पकड़ को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। जिससे प्रतिद्वंदी आपकी पकड़ से छूटकर दूर नहीं जा सकता।"