टोक्यो 2020 के लिए भारतीय आर्चर हैं आत्मविश्वास से लैस

आर्चरी में भारत अभी तक 4 कोटा जीत चुका है और आकाश मलिक को इस बार ओलंपिक गेम्स में मेडल जीतने पर पूरा भरोसा है।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

भारत को 2020 ओलंपिक गेम्स में शानदार प्रदर्शन देने के लिए खेल प्रेमियों से प्रोत्साहन मिल रहा है। आर्चरी के हवाले से देखा जाए तो भारत के पास टोक्यो 2020 के लिए अभी भी कुछ कोटा स्थान बचे हुए हैं।

यूथ ओलंपिक 2018 में सिल्वर मेडल जीतने वाले आकाश मलिक को खुद पर विश्वास है कि वह टोक्यो 2020 में कम से कम एक मेडल तो लाएंगे। पीटीआई से बात करते हुए मलिक ने कहा “मुझे पूरा भरोसा है कि टोक्यो 2020 के आर्चरी खेल में भारत एक न एक मेडल तो जीतेगा ही।”

यह कहना गलत नहीं होगा कि खेल की मात्रा अब बढ़ चुकी है और हर खिलाड़ी को प्रयास करने के लिए पर्याप्त मौके मिलते है। मलिक फिलहाल 2020 खेलो इंडिया यूथ गेम्स में शिरकत करते नज़र आएंगे। हम आपको बता दें कि यह प्रतियोगिता गुवाहाटी में 10 जनवरी से खेली जाएगी और मलिक इसे ट्रायल्स से पहले एक अभ्यास के तौर पर देख रहे हैं। 17 वर्षीय आर्चर ने आगे कहा, “जापान में होने वाले ओलंपिक गेम्स के ट्रायल्स साल 2020 के शुरूआती दौर में होंगे और 2020 खेलो इंडिया यूथ गेम्स सभी खिलाड़ियों को ट्रायल्स के लिए अभ्यास करने का एक सुनेहरा मौका प्रदान करता है।”

भारतीय आर्चरी में कई रोचक कहानियां हैं, जहां बहुत से खिलाड़ियों को छोटी जगह से आकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ते देखा गया है। फिलहाल भारतीय आर्चरी की फेहरिस्त में दीपिका कुमारी और लक्ष्मीरानी माझी का नाम शामिल है। इसी फेहरिस्त को और मज़बूत करते हुए आकाश मलिक ने अपने खेल को बढ़ाकर अपना नाम इसमें शुमार किया है।

हिसार, हरियाणा के गाँव में जन्मे मलिक को आर्चरी का शौक अपने दोस्तों को देख कर गया। इस बाबत उन्होंने बताया, “मेरे दोस्त आर्चरी का अभ्यास करते थे और उनकी देखा देखी मेरा भी रुझान इस खेल में बढ़ता गया।” 

शुरूआती दौर में आर्थिक तंगी के कारण मलिक ने खेल को छोड़ने तक का मन बना लिया था, लेकिन कहते है न कि जज़्बे में जान हो तो हुनर की पहचान हो ही जाती है। मलिक के खेल को देखते हुओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट नामक एनजीओ ने इस खिलाड़ी की तरफ मदद के हाथ आगे बढाए और इस तरह भारत को भविष्य का एक सुनेहरा खिलाड़ी मिला। 

उन्होंने बताया कि “आर्चरी एक महंगा खेल है और आर्थिक तंगी के कारण शुरुआत में मुझे उपकरणों को खरीदने में भी दिक्कत होती थी। जैसे-जैसे मेरा करियर बढ़ता गया वैसे-वैसे मुझे स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया, खेलो इंडिया गेम्स औओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट से मदद मिलती चली गई। साल 2017 के दौरान मैं एशियन चैंपियनशिप ट्रायल्स के लिए गया था और वहीं मुझे ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट ने देखा और तभी से चीज़ें बदलने लगी।”

जहां एक तरफ आकाश मलिक की नज़रें टोक्यो 2020 पर टिकीं हैं वहीं खेलो इंडिया स्कूल गेम्स के रूप में उनके पास अभ्यास करने का और आत्मविश्वास हासिल करने का एक सुनेहरा मौका है।