अंकिता भकत और प्रोमिला दायमरी: भारतीय तीरंदाज़ी का भविष्य

भारत की यह दोनों तीरंदाज़ अंतरराष्ट्रीय मंच पर राष्ट्र के लिए पदक जीत चुकी हैं।

लेखक रितेश जायसवाल ·

बैंकाक के थाईलैंड में एशियाई तीरंदाज़ी चैंपियनशिप चल रही है, जहां भारत की दीपिका कुमारी और बोम्बायला देवी पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। उनसे उम्मीद है कि वह इस इवेंट में देश के लिए ग्रीष्मकालीन ओलंपिक कोटा हासिल कर सकें। हालांकि, युगल जोड़ी के अलावा भारतीय दल के ही अन्य तीरंदाज़ों की बात करें तो उनमें दो युवा सितारे अंकिता भकत और प्रोमिला दायमरी भी शामिल हैं। जो भविष्य में होने वाले टूर्नामेंट में भारत की शान बन सकती हैं।

बंगाल की बाएं हाथ की अंकिता भकत

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मी भकत वर्तमान में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र बाएं हाथ की तीरंदाज़ हैं। इस दूधवाले की बेटी भकत की तीरंदाज़ी में दिलचस्पी तब जागी, जब 10 साल की उम्र में वह कोलकाता के एक सर्कस मैदान में स्थानीय टूर्नामेंट देखने पहुंची। इस खेल ने उन्हें इस कदर अपनी ओर आकर्षित किया कि उन्होंने कुछ ही दिनों बाद शहर के एक स्थानीय तीरंदाज़ी क्लब को ज्वाइन कर लिया।

भकत का जुनून जहां उन्हें अपने सपने में जान डालने को प्रेरित कर रहा था, वहीं उनके खेल में इस्तेमाल होने वाले तीरंदाज़ी उपकरण की महंगी कीमत उन्हें परेशान कर रही थी। अपने परिवार की आय से इतने महंगे उपकरण को खरीदना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गई। हालांकि युवा तीरंदाज़ ने इस संघर्ष के सामने अपनी आशा नहीं छोड़ी और तीरंदाज़ी क्लब में दूसरों के उपकरण उधार लेकर अभ्यास करने लगीं। उन्होंने अपने जूनियर करियर के अधिकांश तौर पर दूसरों से लिए हुए उपकरण लेकर ही प्रशिक्षण व प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।

साल 2014 में भकत के करियर ने एक नया मोड़ लिया। उन्हें जमशेदपुर में टाटा तीरंदाज़ी अकादमी का हिस्सा बनने का मौका मिला। जहां उन्होंने धर्मेंद्र तिवारी, पूर्णिमा महतो और राम अवधेश जैसे कुछ सर्वश्रेष्ठ भारतीय तीरंदाज़ी कोचों के साथ प्रशिक्षण शुरू कर दिया। शीर्ष स्तर के कोच का सानिध्य प्राप्त होने से और अन्य जरूरी सुविधाओं की मदद से भकत का करियर काफी बेहतर राह पर चल पड़ा।

आखिरकार उन्हें 2015 के सियोल इंटरनेशनल यूथ तीरंदाज़ी फेस्ट में भाग लेने का मौका मिला। जहां उन्होंने दो पदक जीते - लड़कियों के व्यक्तिगत रिकर्व इवेंट में ब्रॉन्ज़ और टीम स्पर्धा में सिल्वर। भकत ने 2016 में बैंकाक में इंडोर तीरंदाज़ी विश्व कप में भी हिस्सा लिया, जहां वह बोम्बायला देवी और दीपिका कुमारी से आगे शीर्ष स्थान पर रहीं।

साल 2017 में भकत ने कमाल कर दिया। यह उनकी सबसे शानदार उपलब्धि रही, जब उन्होंने जैमसन सिंह निंगथौजम के साथ मिलकर अर्जेंटीना के रोसारियो में हुई विश्व तीरंदाज़ी युवा चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। इस प्रतियोगिता में दोनों ने फाइनल में रूस को 6-2 से हराकर उस टूर्नामेंट में भारत का एकमात्र गोल्ड मेडल हासिल किया। उन्होंने शंघाई में 2018 के तीरंदाज़ी विश्व कप में भी भाग लिया, जहां उन्होंने हमवतन बोम्बायला देवी को हराया। हालांकि वह चीन की एन किक्सुआन के खिलाफ चौथे दौर में लड़खड़ा गईं।

महज 21 साल की उम्र में यह मुकाम हासिल करने के बाद, भकत का भविष्य उज्ज्वल नज़र आ रहा है और वह निश्चित रूप से भारत के प्रमुख दावेदारों में से एक हैं।

असम का गौरव - प्रोमिला दायमरी

भारत की एक और निशानेबाज़ प्रोमिला दायमरी भी भविष्य में देश की प्रमुख दावेदार बनकर उभर सकती हैं। 22 वर्षीय दायमरी ने बैंकॉक में 2018 तीरंदाज़ी एशिया कप में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा भी जगजाहिर कर दी। असम के उदलगुरी गांव में जन्मी इस युवा निशानेबाज़ ने एक गरीब परिवार में जन्म लिया। सीमित साधनों के बीच अपना गुजारा करने हुए परिवार में उन्होंने तीरंदाज़ी को गरीबी से मुक्त कराने के साधन के रूप में देखा।

दायमरी ने अपना प्रशिक्षण जल्द ही शुरू कर दिया। कुछ ही समय में वह भारतीय खेल मंत्रालय द्वारा प्रदान किए गए प्रायोजन के सात राष्ट्रीय खेल विकास निधि कार्यक्रम के तहत चयनित हो गईं। सरकार का साथ मिलने से दायमरी जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभर कर सामने आ गईं। जिसके बाद उन्होंने भारत को कई बड़े स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में गौरवांवित करने का काम किया।

हालांकि उनके अभी तक के करियर का मुख्य आकर्षण तीरंदाज़ी एशिया कप का गोल्ड मेडल रहा है। लेकिन दायमरी ने अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन किया है। इस साल बर्लिन और अंताल्या विश्व कप में शीर्ष 10 में जगह बनाते हुए उन्होंने भविष्य में भारत के लिए एक आशाजनक एथलीट के रूप में खुद को स्थापित करने का काम किया है।