गुरुग्राम से दरभंगा तक 1200 किलोमीटर की दूरी को साइकिल से पार करने वाली ज्योति कुमारी को CFI ने बुलाया

कोरोना वायरस की मार से बचने के लिए गुरुग्राम से बिहार तक अपने पिता को बैठाकर साइकिल चलाती एक युवा लड़की को CFI की तरफ से आया बड़ा ऑफ़र।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

अपने पिता को साइकिल पर बैठा कर कोरोना वायरस (COVID-19) से जंग लड़ती एक बेटी को आखिरकार मिल गई मंज़िल। गुरुग्राम से बिहार के दरंभगा के बीच 1200 किलो मीटर का सफ़र तय करने वाली इस युवा लड़की ने सभी का दिल जीत लिया है। माना जा रहा है कि 15 साल की ज्योति कुमारी के पिता मोहन पासवान एक मज़दूर हैं और कोरोना वायरस की मार से बचने के लिए इन दोनों ने अपने घर जाने का फैसला किया और निकल पड़े उस राह पर जो चलते चलते कठिन होने वाली थी।

बीबीसी से बात करने पर इस लाचार पिता ने ज़ाहिर किया कि कैसे पैसों की किल्लत ने यह कदम उठाने पर मजबूर किया। पैसे न होने की वजह से मकान मालिक के ताने तो मिल ही रहे थे और भविष्य भी अंधकार में जाता दिख रहा था। छत छिन जाने के डर से पिता और उनकी बेटी ने साइकिल पर ही अपने घर यानी दरभंगा, बिहार जाने का फैसला किया।
बातचीत के दौरान ज्योति कुमारी ने बताया “अगर हम रुकते तो हम खाना खाने तक के पैसे नहीं जोड़ पाते। मैंने अपने पिता को एक साइकिल का बंदोबस्त करने को कहा ताकि हम सुरक्षित घर जा सकें। पहले तो वे इनकार कर रहे थे लेकिन आखिरकार वो मान गए।”

इस बेटी ने सब कुछ अपने हाथों में लेते हुए 8 दिनों में इस सफ़र को तय किया लेकिन हर घंटे के बाद यह सफ़र मुश्किल होता जा रहा था। उन्होंने आगे बताया “हमें दो दिन हो गए थे खाना खाए हुए लेकिन हम भाग्यशाली रहे कि सफ़र के बीच में कुछ लोगो ने हमे खाना दिया और हमारी मदद की।”

कहते हैं न कि उम्मीद पर दुनिया कायम है, तो इस युवा ज्योति के लिए उम्मीद बनकर आया CFI का बड़ा बयान। ऐसे मौके पर इस संगठन ने उन्हें ट्रायल्स के लिए आमंत्रित किया और कहा कि अगर वे इन ट्रायल्स को पार कर लेती हैं तो उन्हें नेशनल साइकिलिंग अकादमी में ट्रेनी के रूप में रखा जाएगा।इस विषय पर बात करते हुए CFI चेयरमैन ओंकार सिंह ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया (PTI) को बताया “हमने आज सुबह ही उस लड़की से बात की है और उन्हें लॉकडाउन हटने के बाद अगले महीने दिल्ली आने का निमंत्रण दिया है। उनके ट्रैवल के और रहने का खर्च हम उठाएंगे।''

उन्होंने आगे कहा “अगर वह अपने साथ किसी को लाना चाहती हैं तो ला भी सकती हैं। हम बिहार में अपने कंसलटेंट को पूछ कर उनके दिल्ली आने के इन्ताज़ामात के बारे में पता लगाएंगे।

निमंत्रण का कारण

चेयरमैन ने समझाया कि युवा कौशल को ढूंढने का यह एक सच्चा प्रयास है। उन्होंने बातचीत के दौरान आगे कहा “उनके अंदर कुछ ख़ास है। 1200 किलोमीटर साइकिल चलाना आसान कार्य नहीं है। उनमे शक्ति और शारीरिक धीरज की कोई कमी नहीं है। हम उन्हें अकादमी में लगी कंप्यूट्रीकृत साइकिल पर बैठाएंगे और देखेंगे कि वह शुरूआती 6 से 7 मापदंडों को पार कर पाती हैं या नहीं। उसके बाद वे एक ट्रेनी बन सकती हैं और उन्हें कुछ भी खर्चा करने की ज़रूरत नहीं है।”