टेबल टेनिस

भारतीय टेबल टेनिस टीम को आईटीटीएफ़ ओलंपिक क्वालिफ़ायर्स में मिली स्लोवानिया से हार

भारतीय टीम को ओलंपिक में पदार्पण करने के लिए राउंड ऑफ़ 16 में जीत दर्ज करनी थी, लेकिन अब उन्हें प्ले-ऑफ़्स में जीत के साथ टोक्यो 2020 का टिकेट करना होगा पक्का

लेखक सैयद हुसैन ·

भारतीय पुरुष टेबल टेनिस टीम ने पहली बार ओलंपिक में क्वालिफ़ाई करने का एक सुनहरा मौक़ा शुक्रवार को गंवा दिया। उन्हें पुर्तगाल के गोंदोमर में चल रहे आईटीटीएफ़ वर्ल्ड टीम क्वालिफ़िकेशन टूर्नामेंट में स्लोवानिया के हाथों 1-3 से हार का सामना करना पड़ा।

अचंता शरथ कमल और हरमीत देसाई ने भारत के पहले मुक़ाबले में आग़ाज़ तो शानदार किया था, जब स्लोवेनियाई जोड़ी डेनी कोज़ुल और बोजान टॉकिक को 11-9, 11-7, 11-5 से सीधे गेम में मात दे दी थी।

अगले मुक़ाबले में उम्मीद थी कि ये बढ़त दोगुनी हो जाएगी, जब भारत के सर्वोच्च रैंकिंग के खिलाड़ी साथियान गनासेकरन की भिड़ंत डार्को जॉर्गिक के ख़िलाफ़ थी। लेकिन डार्को ने अप्रत्याशित रूप से साथियान को सीधे गेम्स में 11-9, 12-10, 11-3 से शिकस्त दे दी।

बोजान टॉकिक ने स्लोवानिया को दिलाई बढ़त

दूसरे एकल मुक़ाबले में भी स्लोवानिया को जीत मिली जब भारतीय पैडलर हरमीत देसाई को बोजान टॉकिक ने 5-11, 12-10, 6-11, 11-5, 11-6 से रोमांचक मुक़ाबले में हराया।

पहले गेम में तो भारतीय खिलाड़ी ने बेहतरीन खेल दिखाया था, और स्लोवानिया के पैडलर को वापसी करने का मौक़ा तक नहीं दिया था। नतीजा ये हुआ कि पहला गेम बेहद आसानी से देसाई ने अपने नाम कर लिया था।

साल 2013 के क़तर ओपन फाइनल में पहुंचे थे हरमीत देसाई 

हालांकि दूसरे गेम में बोजान ने शानदार वापसी की और हर एक अंक के लिए वह भारतीय पैडलर से सवाल पूछ रहे थे। दूसरा गेम बोजान ने जीता और फिर तीसरा गेम भारतीय पैडलर के ही पक्ष में गया था। हालांकि चौथा गेम भारत के देसाई ने गंवा दिया और अब पांचवां और आख़िरी गेम निर्णायक हो गया था।

निर्णायक गेम में स्लोवेनियाई पैडलर ने देखते ही देखते 4-1 की बढ़त ले ली थी, लेकिन देसाई ने वापसी करते हुए इस अंतर को कम करते हुए 6-4 तक ला दिया था। स्लोवेनियाई पैडलर को भले ही दावेदार नहीं माना जा रहा था लेकिन इसके बाद उन्होंने भारतीय खिलाड़ी को यहां से केवल दो अंक लेने दिए और पांचवें गेम के साथ मैच भी अपने नाम कर लिया।

डार्को ने जीत के साथ की वापसी

जैसे जैसे दिन आगे बढ़ रहा था ये स्लोवानिया और डार्को जॉर्गिक के लिए अच्छा होता जा रहा था। क्योंकि अब डार्को की बारी थी और उन्होंने भारत के स्टार पैडलर अचंता शरथ कमल को 10-12, 11-7, 12-10, 11-8 से हराकर भारतीय उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचा दिया था।

पहले गेम में भारत के दिग्गज खिलाड़ी अचंता आसानी के साथ 10-4 की बढ़त लिए हुए थे लेकिन डार्को जॉर्गिक ने कमाल की वापसी करते हुए लगातार 6 प्वाइंट्स हासिल किए और स्कोर 10-10 से बराबर कर दिया। हालांकि अचंता ने संयम रखा और अगले दो अंक हासिल करते हुए पहला गेम जीत लिया था।

अचंता शरथ कमल के ऊपर डार्को जॉर्गिक की अप्रत्याशित जीत

लेकिन स्लोवेनियाई पैडलर ने यहां से अपने खेल को और बेहतर करते हुए दूसरा गेम बेहद आसानी के साथ अपने नाम कर लिया। और तीसरा गेम भी जीतते हुए भारतीय पैडलर पर दबाव बना दिया था। नतीजा ये हुआ कि चौथा गेम भी डार्को ने धमाकेदार अंदाज़ में फ़तह करते हुए एक स्लोवानिया को भारत पर शानदार जीत दिला दी थी।

क्या है क्वालिफ़िकेशन का रास्ता ?

महिला टीम की ही तरह अब भारतीय पुरुष टीम के पास भी टोक्यो 2020 का टिकेट हासिल करने का एक ही रास्ता बचा है, और वह है राउंड ऑफ़ 16 में हारने वाली दूसरी टीम के साथ होने वाली चुनौती में जीत हासिल करना।