ओलंपिक गेम्स: शूटिंग से जुड़ी इन बातों को आप जानना ज़रूर चाहेंगे   

ओलंपिक गेम्स के पहले संस्करण से लेकर टोक्यो 2020 तक का सफ़र

एक ऐसा खेल जिसमे सतर्कता और एकाग्रता की बेहद ज़रूरत होती है। हम कर रहे हैं शूटिंग की जिसमें हर निशानेबाज़ को मानसिक तौर पर एक दम तंदरुस्त और चौकन्ना रहना पड़ता है। मॉडर्न टाइम ओलंपिक खेल जो कि 1896 एथेंस में आयोजित हुए थे उसमे कुल मिलाकर 9 खेल रखे गए थे जिनमें से एक खेल शूटिंग भी था। यह कहना बिलकुल सही होगा कि ओलंपिक गेम्स के इतिहास में शूटिंग का महत्व देखते ही बनता है।

भारत और शूटिंग का नाता बेहद ही ख़ास रहा है और ओलंपिक गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन निखर कर आया है। 2004 ओलंपिक खेलों से लेकर 2012 ओलंपिक तक भारत ने हर संस्करण में कम से कम एक मेडल शूटिंग में ज़रूर जीता है। इतना ही नहीं 2008 बीजिंग ओलंपिक गेम्स में शूटिंग ने ही अभिनव बिंद्रा को व्यक्तिगत ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतने वाला पहला भारतीय एथलीट बनाया था।

आइए एक नज़र डालते हैं शूटिंग के इतिहास, नियम और उन भारतीय उम्मीदों पर जो 2020 ओलंपिक गेम्स में सफल हो सकते हैं।

शूटिंग के दौरान प्रयोग होने वाली गन

शूटिंग के खेल में तीन तरह की गन का इस्तमाल किया जाता है: राइफल, पिस्टल और शॉटगन।

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राइफल एक सिंगल-लोडेड गन है जिसका कैलिबर 5.6 मिलीमीटर (गन की बैरल का अंदरूनी व्यास) होता है और यह गन राइफल से जुड़े हर इवेंट में प्रयोग होती है। वहीं पिस्टल गन 4.5 मिलीमीटर कैलिबर का प्रयोग 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में होता है और 5.6 मिलीमीटर कैलिबर का इस्तमाल 25 मीटर इवेंट में किया जाता है जिसमें 5 शॉट मैगज़ीन का जुड़ाव होता है।

शॉटगन की बात करें तो वह 12 गेज (गेज - फायर आर्म को मापने की इकाई। शॉटगन की गेज में सामान्य वज़न की गोल गेंदें होती हैं जो कि लैड नामक सामग्री से बनाई जाती है ताकि वह गन के अंदरूनी बैरल में फिट हो सके) की होती है। इसका कैलिबर 18.5 मिलीमीटर का होता है।

खेल के दौरान शूटर एक स्पेशल जैकेट का प्रयोग करता है।इस जैकेट की ख़ास बात यह है कि यह शूटर के शरीर को बेहतर ग्रिप (पकड़) प्रदान करता है और रीकॉइल (शॉट के दौरान लगने वाला झटका) के प्रभाव को कम करता है। यह सबसे ज़यादा फायदा राइफल शूटर को पहुंचता है। कोहनी पर लगी पैडिंग खिलाड़ी को एक सटीक बेस प्रदान करता है जिससे खिलाड़ी का संतुलन बना रहता है। यह सबसे ज़्यादा कारगर राइफल निशानेबाज़ों के लिए होता है जब वह प्रोन पोज़िशन में खेलते हैं। इसके साथ-साथ निशानेबाज़ ब्लाइंडर (जो कि फोकस बढ़ाता है) और ब्लॉक ऑब्जेक्ट (जो कि नज़र को टिकाता है) का भी इस्तेमाल करता है।

जीत की झड़ी

1986 एथेंस गेम्स के दौरान शूटिंग में महज़ 5 इवेंट का आयोजन किया गया था लेकिन वक़्त के साथ लोगों की इस कहल में रूचि बढ़ी जिसके मद्देनज़र इस खेल से जुड़े इवेंट को बढ़ा दिए गए। आपको बता दें टोक्यो 2020 में कुल मिलाकर शूटिंग में 15 इवेंट का आयोजन किया जायेगा।

राइफल:

राइफल शूटिंग खेल में निशाना तय दूरी से लगाया जाता है। खिलाड़ी निशाना 10 कंसेंट्रिक सिर्क्लेम पर लगाता है। यह इवेंट दो भागों में विभाजित है – 50 मीटर राइफल थ्री पोज़ीशन और 10 मीटर एयर राइफल।

50 मीटर एयर राइफल में खिलाड़ी नीलिंग (घुटने के बल बैठ कर), प्रोन (लेट कर) और स्टैंडिंग (सीधा खड़ा होकर) पोज़िशन निशाना साधता है। हर खिलाड़ी 2 घंटे 45 मिनट में 40 शॉट खेलता है। 40 खिलाड़ियों में से केवल टॉप 8 खिलाड़ी आगे जाते हैं जहां वह मेडल के लिए दोबारा खेलते हैं।

10 मीटर एयर राइफल में हर खिलाड़ी 60 शॉट खेलता है और इसका समय होता है 1 घंटा 15 मिनट। इसमें भी टॉप 8 खिलाड़ी मेडल जीतने के लिए आगे बढ़ते हैं। मेंस और वूमेंस के बाद मिक्स्ड टीम का भी मुकाबला होता है जिसमें एक पुरुष और महिला खिलाड़ी होती है। क्वालिफिकेशन राउंड में हर टीम का प्रत्येक खिलाड़ी 50 मिनट में 40 शॉट खेलता ह और टॉप 5 टीमें फाइनल राउंड का हिस्सा बनती हैं।

टोक्यो 2020 में भारत के लिए मनु भाकर मेडल जीतने की रेस में सबसे आगे
टोक्यो 2020 में भारत के लिए मनु भाकर मेडल जीतने की रेस में सबसे आगेटोक्यो 2020 में भारत के लिए मनु भाकर मेडल जीतने की रेस में सबसे आगे

पिस्टल:

पिस्टल शूटिंग खेल तीन भागों में विभाजित है – 25 मीटर रेपिड फायर पिस्टल, 25 मीटर पिस्टल और 10 मीटर एयर पिस्टल।

25 मीटर रेपिड फायर पिस्टल केवल पुरुष खिलाड़ियों के बीच खेला जाता है जिसमें हर खिलाड़ी को 30-30 शॉट खेलने होते हैं और टॉप 8 खिलाड़ी ही क्वालिफाई कर सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ 25 मीटर पिस्टल नामक खेल में केवल महिलाएं ही हिस्सा लेतीं हैं। 25 मीटर रेपिड फायर पिस्टल इवेंट में दोनों महिलाएं और पुरुष अलग-अलग हिस्सा लेते हैं और इसमें 30-30 शॉट के 2 राउंड खेले जाते हैं।

10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट के नियम लगभग 10 मीटर एयर राइफल इवेंट जैसे ही होते हैं। इस खेल में मेंस, वूमेंस और मिक्स्ड वर्ग शामिल हैं। मेंस और वूमेंस राउंड में हर खिलाड़ी 1 घंटा 15 मिनट के समय में 60 शॉट खेलता है और टॉप 8 खिलाड़ी क्वालिफाई राउंड को पार कर आगे जाते हैं। मिक्स्ड टीम में हर साथी खिलाड़ी को 40-40 शॉट खेलने की अनुमति होती है जिसमें टॉप 5 टीमें आगे चलकर मेडल जीतने के लिए अपना माद्दा दिखाती हैशॉटगशॉटगन इवेंट स्कीट और ट्रैप नामक इवेंट दो भागो में विभाजित हैं जिनमें खिलाड़ी उड़ती वस्तु (क्ले) पर निशाना साधता है। दोनों ही इवेंट में पुरुष और महिला खिलाड़ी भाग लेते हैं और “ट्रैप” में मिक्स्ड टीमें भी भाग लेती हैं।

शॉटगन:

शॉटगन इवेंट स्कीट और ट्रैप नामक इवेंट दो भागो में विभाजित हैं जिनमें खिलाड़ी उड़ती वस्तु (क्ले) पर निशाना साधता है। दोनों ही इवेंट में पुरुष और महिला खिलाड़ी भाग लेते हैं और “ट्रैप” में मिक्स्ड टीमें भी भाग लेती हैं।

स्कीट इवेंट में दोनों पुरुष और महिला खिलाड़ी 8 अलग-अलग स्थानों से फायर करते हैं जिन्हें शूटिंग की भाषा में “स्टेशन” कहा जाता है। वहीं दूसरी तरफ क्ले दो जगहों से उड़ाई जाती है- शूटिंग रेंज की बाएं और दाएं हिस्से से। इन दोनों जगहों को “हाउस” कहा जाता है। रेंज के बाएं तरफ से उड़ाने वाली जगह को “हाई हाउस” और उड़ने वाली क्ले को “मार्क” कहा जाता है। इसी तरह रेंज के दाएं हिस्से को “लो हाउस” और क्ले को “पुल” कहा जाता है। हर एथलीट 25 बार निशाना साधता है और यह इवेंट कुल मिलाकर 3 दिनों तक चलता है। इस खेल में टॉप 6 खिलाड़ी मेडल जीतने की रेस में शामिल होते हैं।

ट्रैप इवेंट में क्ले खिलाड़ियों के सामने 5 अलग-अलग जगहों से उछाली जाती है। मेंस और वूमेंस वर्ग के नियम “स्कीट” के नियमों जैसे ही होते हैं और मिक्स्ड टीम में हर साथी खिलाड़ी 25 शॉट के 3 राउंड खेलता है और कुल मिलाकर 75 शॉट हर खिलाड़ी के हिस्से में आते हैं। टॉप 6 टीमों को आगे जाने का मौका मिलता है जो कि मेडल जीतने के बेहद करीब होते हैं।

भारतीय सुनहरा इतिहास

ओलंपिक गेम्स में भारत आज तक 17 व्यक्तिगत मेडल जीत चुका है जिनमें 4 मेडल शूटिंग के दौरान आए हैं। 1900 में नॉर्मन प्रिचार्ड के बाद पहला व्यक्तिगत सिल्वर मेडल भारत की ओर से राज्यवर्धन सिंह राठौर ने एथेंस 2004 में डबल ट्रैप इवेंट के दौरान जीता था।

बीजिंग 2008 ने मानों भारतीय खेल के इतिहास को बदल कर रख दिया जहां अभिनव बिंद्रा ने भारत की ओर से पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीता और करोड़ों लोगों के दिलों पर कब्ज़ा किया। बिंद्रा ने यह मेडल 10 मीटर एयर राइफल में खेलते हुए जीता था। 2012 लंदन ओलंपिक गेम्स में दो भारतीय शूटरों ने जलवा दिखाया और भारत को दो मेडल जितवाए गगन नारंग ने 10 मीटर एयर राइफल में ब्रॉन्ज़ और विजय कुमार शर्मा ने 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल इवेंट में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था।

India’s Olympic Games medallists Abhinav Bindra and Gagan Narang posing with their 2010 Commonwealth Games medals
India’s Olympic Games medallists Abhinav Bindra and Gagan Narang posing with their 2010 Commonwealth Games medalsIndia’s Olympic Games medallists Abhinav Bindra and Gagan Narang posing with their 2010 Commonwealth Games medals

तीन लगातार जीत के बाद भारत को रियो 2016 में निराशा हाथ लगी। हालांकि पिछले दो सालों में भारतीय शूटर खिलाड़ियों ने जमकर नाम बटोरा और प्रशंसकों में टोक्यो 2020 के लिए अपनी उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

छोटी उम्र में मनु भाकर और सौरभ चौधरी ने आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में 6-6 गोल्ड मेडल जीते और खुद के खेल को अलग चरम पर ले गए। दोनों ही युवा खिलाड़ियों ने 2020 ओलंपिक गेम्स के लिए कोटा स्थान प्राप्त किया है और यही वजह है कि दोनों ही खिलाड़ी ओलंपिक में भाग लेते नज़र आ सकते हैं। इन दोनों से ही भारत को काफी उम्मीदें हैं और आईएसएसएफ वर्ल्ड कप के दौरान इन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम में खेलते हुए 4 गोल्ड मेडल जीत लिए हैं। हौंसले की बुलंदियों को छूते हुए यह दोनों खिलाड़ी भारत के गौरव को लगातार आगे बढ़ाते जा रहें हैं।

पिछले दो सालों में 10 मीटर एयर राफल शूटर अपूर्वी चंदेला ने कड़ी मेहनत कर दर्शकों के दिलों में जगह बना ली है। 2019 में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में चंदेला ने 3 गोल्ड मेडल जीत कर अपना लोहा मनवाया। अभिषेक वर्मा, अंजुम मौदगिल और इलावेनिल वलारिवन ने वर्ल्ड कप में कई गोल्ड मेडल जीते। यह तो तय है कि टोक्यो 2020 के लिए भारतीय शूटिंग का खेमा तेज़ी और मज़बूती के साथ आगे बढ़ रहा है।

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