भारतीय ओलंपिक दल को कोरोना वैक्सीन के लिए मिले प्राथमिकता: संसदीय कमेटी

ये सिफारिशें ‘2021 ओलंपिक की तैयारी’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट का हिस्सा थी जो राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को सौंपी गई थी।

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

अगले साल यानी 2021 में खेलों का सबसे बड़ा महाकुंभ ओलंपिक का आयोजन होने वाला है। टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों में भारत भी अपना सबसे बड़ा दल भेज रहा है। अब जबकि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी का खौफ छाया है तो सभी की नजरें वैक्सीन पर टिकी हुई है।

अब भारतीय एथलीट्स, कोच और स्पोर्ट स्टाफ भी ओलंपिक में हिस्सा लेने जाएंगे तो इसे देखते हुए पार्लियामेंट्री पैनल से एक सिफारिश की है कि टोक्यो  (Tokyo Olympics) जाने वाले सभी सदस्यों को वैक्सीन के लिए प्राथमिकता मिले।

ये सिफारिशें ‘2021 ओलंपिक की तैयारी’  शीर्षक वाली एक रिपोर्ट का हिस्सा थी जो राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को ऑनलाइन तरीके से सौंपी गई थी।

 इसे संसदीय स्टैंडिंग कमेटी ने शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल के ऊपर सासंद विनय पी सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता में तैयार किया था। दुनियाभर में कई वैक्सीन बन कर तैयार हो चुकी हैं और अब पूरी दुनिया में इसके वितरण पर बातचीत चल रही है।

वहीं वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (World Anti-Doping Agency) ने पहले कहा था कि वैक्सीन पर उनकी कड़ी नजर है और वह नहीं चाहते कि खिलाड़ियों को डोपिंग संबधित किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

टोक्यो ओलंपिक 2020 में होने वाला था लेकिन महामारी की वजह से इसे 2021 में स्थगित कर दिया या।

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि मेडिकल स्टाफ और आवश्यक मेडिकल उपकरण जैसे एक्स-रे और एमआरआई मशीन को भारतीय खेल प्राधिकरण और अन्य प्रशिक्षण केंद्रों में उपलब्ध कराया जाए ताकि एथलीटों को वायरस से होने वाले संभावित खतरों से बचाया जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि “यह सुनिश्चित करना होगा कि एथलीट्स का इलाज और रिकवरी में समय बर्बाद ना हो। इससे वह अस्पताल जाने से भी बच पाएंगे, जहां पर संक्रमण फैलना का खतरा ज्यादा रहता है।”

कई सिफारिशों के बीच रिपोर्ट में नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन को सलाह दी गई है कि भारतीय एथलीट्स को ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल इवेंट्स में हिस्सा लेने का मौका मिले क्योंकि कोरोना वायरस के कारण खिलाड़ियों का काफी नुकसान हुआ है।

इसके अलावा पैनल में कहा गया है कि ’’अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि ऐसी प्रतियोगिता में खेलने के बाद ही खिलाड़ी ओलंपिक के दौरान दबाव की स्थितियों से निपट सकते हैं, इस तरह की स्थिति उन्हें ओलंपिक में मदद करेगी।”

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल इवेंट्स का आयोजन करवाना चाहिए। इसके अलावा ट्रेनिंग में बायो बबल होना चाहिए ताकि खिलाड़ी सुरक्षित वातावरण में ट्रेनिंग कर पाएं और वह खतरे से दूर रहें। वहीं कमेटी में कहा गया है कि आने वाले समर गेम्स से पहले कोचों की जो भर्तियां रिक्त हैं, उन्हें भरा जाएगा।