एक फोटोग्राफर, पशु प्रेमी और घुमक्कड़ हैं भारत की शूटिंग स्टार अपूर्वी चंदेला

शूटिंग में समर्पण को देखते हुए पिता ने अपूर्वी को राइफल गिफ्ट की और चाचा ने शूटिंग रेंज का निर्माण कराय

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

अपूर्वी चंदेला महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में आगामी टोक्यो ओलंपिक में भारत की पदक उम्मीदों में से एक हैं। इस श्रेणी में वर्ल्ड रैंकिंग में पहले नम्बर पर रहीं चंदेला ओलंपिक दूसरी बार भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उन्होंने कोरिया के चांगवोन में 2018 विश्व चैंपियनशिप में चौथे स्थान हासिल करते हुए 207 के स्कोर के साथ टोक्यो 2020 के लिए कोटा हासिल किया।

उन्हांने 2016 में रियो में पहला ओलंपिक खेला था। हालांकि, यह उनके लिए निराशाजनक रहा था, क्योंकि वो क्वालिफिकेशन राउंड में 34वें स्थान पर रहीं और फाइनल में जगह नहीं बना पाई। ऐसे में वो टोक्यो में पिछली बुरी यादों को दफन करते हुए मजबूती के साथ उबरने की कोशिश कर रही हैं।

आइये नजर डालते हैं 28 वर्षीय इस निशानेबाज के जीवन से जुड़ी बातों पर-

प्रारंभिक जीवन

अपूर्वी का जन्म राजस्थान की राजधानी जयपुर में होटल व्यवसाय से जुड़े कुलदीप सिंह चंदेला और बिंदू राठौर के घर हुआ। उन्होंने शुरूआती पढ़ाई अजमेर के मेयो कॉलेज गर्ल्स स्कूल और जयपुर में महारानी गायत्री देवी गर्ल्स स्कूल में की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के जीसस एंड मैरी कॉलेज से समाजशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

शुरूआत में वो एक खेल पत्रकार बनना चाहती थीं, लेकिन अभिनव बिंद्रा को 2008 बीजिंग में भारत का पहला ओलंपिक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतते हुए देखकर उनके करियर का रास्ता बदल गया।

शूटिंग से जुड़ाव

चंदेला के परदादा के चचेरे भाई पांच बार के ओलंपियन डॉ कर्णी सिंह के कोच थे। कर्णी सिंह अपने समय के सबसे कुशल निशानेबाजों में से एक थे। इसी कारण बाद में नई दिल्ली में उनके नाम पर शूटिंग रेंज का नाम रखा गया। इसके अलावा उनके अभिभावक भी अपने समय के दौरान शूटिंग में रुचि रखते थे, लेकिन अपूर्वी को पोलो और शूटिंग में से किसी एक को चुनना था।

अपूर्वी चंदेला ने NRAI से गुहार लगाई थी कि टोक्यो ओलंपिक के लिए भारतीय शूटिंग दल का ऐलान जल्द हो।

शूटिंग में करियर की शुरुआत

शूटिंग को एक खेल के रूप में चुनाव करने के कुछ हफ्तों बाद उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। चंदेला ने पहली बार जयपुर की शूटिंग रेंज में कदम रखते हुए एकदम सही शॉट लगाये। इस समर्पण को देखते हुए उनके पिता ने अपूर्वी को राइफल गिफ्ट की और चाचा हेम सिंह ने अभ्यास में मदद करने के लिए घर पर ही एक शूटिंग रेंज का निर्माण कराया।

2012 की राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय परिदृश्य पर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद चंदेला ने 2014 में हेग में इंटरशूट चैंपियनशिप में चार पदक अपने नाम किए। इसी साल में उन्होंने, ग्लासगो के राष्ट्रमंडल खेलों में 206.7 के स्कोर के साथ एक नया रिकॉर्ड कायम करते हुए स्वर्ण पदक जीता।

शीर्ष पर पहुंची

2019, चंदेला के लिए एक यादगार वर्ष था, क्योंकि इसमें वो विश्व रैंकिंग में नंबर 1 पर पहुंच गई। उन्हांने शीर्ष रैंकिंग, नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन (ISSF) विश्व कप 2019 में स्वर्ण पदक जीतने के साथ 252.9 स्कोर की शूटिंग करते हुए रिकॉर्ड बनाते हुए हासिल की।

रुचियां और अतिविश्वास

ओलंपियन गगन नारंग से मागर्दशन लेने वाली चंदेला की शूटिंग रेंज के बाहर भी कई चीजों में रुचि है। 

चंदेला ने पिछले साल मई में एक साक्षात्कार में कहा था, "मुझे गगन (नारंग) द्वारा ली गई फोटो काफी पसंद आई। क्योंकि, मैं भी हमेशा से प्रकृति / वन्यजीव की फोटोग्राफी सीखना चाहता थी। इसे बेहतर बनाने के लिए मैं ऑनलाइन कोर्स कर रही हूं, क्योंकि शूटिंग के कारण पहले मुझे इसके लिए कभी समय नहीं मिला।"

उन्हांने फोटोग्राफी में अपना हाथ आजमाया और अब वो इसकी बारीकियां सीखना चाहती हैं। 28 वर्षीय चंदेला को एक पशु प्रेमी के रूप में भी जाना जाता है। उनके पास तीन पालतू कुत्ते हैं।

एक अंतरराष्ट्रीय एथलीट का जीवन व्यस्त हो सकता है, लेकिन चंदेला को यात्रा करना पसंद है। उनकी पसंदीदा जगह में से एक द इटरनल सिटी, रोम में वो हमेशा गुलाबों की खुश्बू सूंघने के लिए रूकती हैं। चंदेला की भी विभिन्न भाषाओं में भी गहरी रुचि है, और वो जर्मन सीखना चाहती हैं।