ओलंपिक खेलों में भारतीय दल के ध्वज वाहक बने खिलाड़ियों पर डालें एक नज़र

ओलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में देश का ध्वज ले जाने से बड़ा कोई सम्मान नहीं है। यहां भारत के उन एथलीटों का उल्लेख किया गया है जिन्हें यह गौरव प्राप्त हुआ।

लेखक रितेश जायसवाल ·

ओलंपिक खेलों में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना एक एथलीट के लिए बहुत गर्व का विषय होता है। वहीं किसी एथलीट की छाती तब और भी चौड़ी हो जाती है जब उसे ओलंपिक उद्घाटन समारोह में अपने दल का ध्वज वाहक बनने का अवसर प्राप्त होता है। आज हम यहां हॉकी के दिग्गज बलबीर सिंह सीनियर से लेकर एकल प्रतियोगिता में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाने वाले शूटर अभिनव बिंद्रा जैसे खेल सितारों की बात करेंगे, जो ओलंपिक उद्घाटन समारोह में भारतीय दल के ध्वज वाहक बने।

बलबीर सिंह सीनियर

भारत के पूर्व हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर का जन्म 10 अक्टूबर 1924 को हुआ। वह भारत की उस हॉकी टीम के सदस्य थे जिसने ओलंपिक में 3 गोल्ड मेडल जीते। लंदन (1948), हेल्सिंकी (1952) और मेलबोर्न (1956) में खेली इस टीम के हॉकी के जादूगर ध्यानचंद भी हिस्सा थे। बलबीर सिंह सीनियर ऐसे हॉकी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ओलंपिक के फाइनल मुकाबले में सबसे अधिक गोल का रिकार्ड अपने नाम किया है। 1952 के ओलपिंक के फाइनल के दौरान नीदरलैंड के विरूद्ध खेलते हुए उन्होंने 5 गोल कर यह रिकॉर्ड बनाया था। बलबीर ने 1952 और 1956 में भारतीय दल का ध्वजवाहक बनकर देश को गौरवांवित किया।

लिएंडर पेस

भारतीय टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस का जन्म 17 जून 1973 में गोवा में हुआ था। इन्होंने 1996 में अटलांटा ओलंपिक में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर भारत का टेनिस में ओलंपिक पदक का रास्ता खोला था। उस वक्त लिएंडर ने व्यक्तिगत खेलों में भारत के लिए 44 साल बाद ओलंपिक मेडल हासिल किया था। जिसके चार साल बाद उन्हें 2000 सिडनी ओलंपिक में भारतीय दल का ध्वज वाहक बनने का गौरव प्राप्त हुआ था।

अंजू बॉबी जॉर्ज

भारत की प्रसिद्ध एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज को भारतीय एथलेटिक्स को नई दिशा देने के लिए जाना जाता है। इन्होंने सितम्बर 2003 पेरिस में हुए वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप की लॉन्ग जंप प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया था। इसी के साथ वो 25 वर्ष की उम्र में विश्व एथलेटिक्स में भारत की प्रथम पदक विजेता बन गईं थीं। ओलंपिक इतिहास में पहली बार 1992 में किसी भारतीय खिलाड़ी को फ्लैग बियरर बनते देखा गया था। यह महिला एथलीट बार्सेलोना की शिनी अब्राहम विलसन थीं। इसके बाद 2004 एथेंस ओलंपिक में अंजू बॉबी जॉर्ज को यह गौरव प्राप्त हुआ।

भारतीय दल का ओलंपिक खेलों में प्रतिनिधित्व करने वाली अंजू बॉबी जॉर्ज दूसरी महिला खिलाड़ी हैं।

सुशील कुमार

दो बार ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार का जन्म 26 मई 1983 को हुआ था। उन्होंने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में ब्रॉन्ज और 2012 के लंदन ओलंपिक में सिल्वर मेडल हासिल किया था। इसी के साथ वह ओलंपिक मुकाबलों में दो व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। उन्हें 2012 लंदन ओलंपिक में भारतीय दल का ध्वज वाहक बनने का गौरव प्राप्त हुआ।

अभिनव बिंद्रा

भारत को ओलंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक दिलाने वाले अभिनव बिंद्रा पहले और एकमात्र खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्द्धा में स्वर्ण पदक जीतकर यह इतिहास रचा। साल 1980 के 28 साल बाद अभिनव ने भारत को ओलंपिक में पहला गोल्ड मेडल दिलाने का गौरवपूर्ण काम किया। इससे पहले, 1980 ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने अंतिम बार गोल्ड मेडल जीता था।

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यही नहीं अभिनव पहले ऐसे निशानेबाज़ भी हैं, जिनके नाम एक ही समय पर विश्व खिताब और ओलंपिक स्वर्ण पदक दोनों रहे हैं। इन्होंने 2008 ओलंपिक से पहले 2006 में हुई आईएसएसएफ विश्व निशानेबाज़ी चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीता था। बिंद्रा को 2016 रियो ओलंपिक में भारतीय दल का ध्वज वाहक बनने का गौरव प्राप्त हुआ था।