भारत के उसैन बोल्ट? श्रीनिवास गौड़ा के तेज़ दौड़ने के कारनामे की सच्चाई की एक जांच

‘कम्बाला’ का वह जॉकी जिसने 9.55 सेकंड में 100 मीटर की दौड़ लगाकर उसैन बोल्ट के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। लेकिन यह ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ एक चेतावनी के रूप में सामने आया है।

लेखक रितेश जायसवाल ·

वेलेंटाइन डे (Valentine’s Day) से एक दिन पहले पूरा भारत एक 28 वर्षीय व्यक्ति से प्यार करने लगा, जिसने एक धान के खेत में दौड़ते हुए अपनी ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने इस कारनामे को एक वार्षिक इवेंट ‘कम्बाला’ (Kambala) के आयोजन के दौरान 13.62 सेकंड में 142.5 मीटर की दूरी को तय किया। आपको बता दें, इस इवेंट में प्रतिभागी दो भैंसों के साथ दौड़ लगाते हैं। इंटरनेट पर सनसनी बनने और ओलंपिक विजेता उसैन बोल्ट (Usain Bolt) से तुलना होने के बाद हमने भी श्रीनिवास गौड़ा (Srinivasa Gowda) को संज्ञान में लिया और इस कारनामे की सच्चाई की एक जांच की।

श्रीनिवास गौड़ के इंटरनेट स्टारडम में हुई बढ़ोतरी

कर्नाटक के इस व्यक्ति को गुरुवार की दौड़ से पहले वार्षिक दौड़ के बारे में जानने वाले लोगों के अलावा सभी लोग अनजान थे। उनके इस कारनामे को सबसे पहले स्थानीय कन्नड़ समाचार पत्रों ने रिपोर्ट किया। इसके अलावा इस बात को उस वक्त किसी समाचार पत्र ने तरजीह दी, जब एक अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) ने एक प्रमुख समाचार नेटवर्क के वरिष्ठ संपादक को इसके बारे बताया। इस बातचीत के बात इस कारनामे ने चारों ओर प्रसिद्धि हासिल कर ली।

जल्द ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें धान के खेत में दो भैंसों के साथ दौड़ लगाते हुए एक व्यक्ति को देखा गया। बेशक, लोगों ने उन्हें देखते ही फौरन उनकी तुलना उसैन बोल्ट के साथ करनी शुरू कर दी, क्योंकि गौड़ को 100 मीटर की दूरी को जमैका स्प्रिंटर्स की तुलना में कम समय में खत्म करते हुए देखा गया।

गौरतलब है कि बोल्ट ने 2009 में 9.58 सेकंड में 100 मीटर की रेस खत्म कर एक सनसनीखेज विश्व रिकॉर्ड बना दिया था, जो आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। कम्बाला के इस व्यक्ति की लाइमलाइट का एक बड़ा दौर उस वक्त भी आया जब भारतीय संसद सदस्य और खेल प्रेमी ने ट्वीट कर एथलेटिक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया से आग्रह किया कि वह ‘इस आदमी को अपनी जीत के दायरे में लें’ और इसके साथ ही उन्होंने उसे ओलंपिक चैंपियन के रूप में देखने की कामना की।

भारत के खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने इसके बाद एक बड़ी घोषणा की और बताया कि भारतीय खेल प्राधिकरण ने श्रीनिवास गौड़ा को न केवल संज्ञान में लिया है, बल्कि पहले ही उनके ट्रायल के लिए व्यवस्था कर ली है। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि शीर्ष स्तर के कोच उनपर ध्यान देंगे।

हालांकि यह सराहनीय है कि इंटरनेट पर रातों-रात प्रसिद्धि ने श्रीनिवास गौड़ा के जीवन को पूरी तरह बदल दिया है और ठीक एक एथलीट की तरह चर्चा में हैं। यह उस ज्वलंत मुद्दे जैसी कहानी है जिसकी सच्चाई की जांच करना बहुत जरूरी हो जाता है।

श्रीनिवास गौड़ा ने किस खेल में भाग लिया?

श्रीनिवास गौड़ा एक पारंपरिक भारतीय खेल में दौड़ रहे थे, जिसे कम्बाला कहा जाता है। यह एक वार्षिक इवेंट है, जिसमें दो भैंसों के साथ दौड़ने वाले व्यक्ति को ‘कम्बाला जॉकी’ कहा जाता है। जहां दोनों भैंस उसे जीत की रेखा की ओर खींचती हैं।

जानवरों को खेल के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और 28 वर्षीय निर्माण कार्यकर्ता श्रीनिवास गौड़ा ने वास्तव में 142.5 मीटर की दौड़ लगाई है, न कि केवल 100 मीटर की। उन्होंने अपनी पूरी दौड़ को 13.62 सेकंड में खत्म किया, जिसकी गणना 100 मीटर की दौड़ के हिसाब से करने का समय लगभग 9.55 सेकंड आता है। जो कि उसैन बोल्ट के 9.58 सेकेंड के रिकॉर्ड से महज़ 0.03 सेकंड कम समय है।

वास्तविक तौर पर यह तथ्य सही है कि उसने इतनी तेज़ दौड़ लगाई और प्रशिक्षित जानवर उसे तेज़ गति से खींचते रहे, जिसकी बदौलत वह कई अन्य एथलीटों से भी तेज़ दौड़ लगाने में कामयाब रहा।

इन सभी तथ्यों से यह बात साफ हो जाती है कि ट्रैक-एंड-फील्ड दिग्गज उसैन बोल्ट के साथ तुलना करना सही नहीं होगा, क्योंकि श्रीनिवास गौड़ा दौड़ के दौरान कई अन्य कारकों का सहारा लेकर और रेस ट्रैक से भिन्न परिस्थितियों में दौड़ को पूरा करते हैं।

कम्बाला ने इससे पहले भी बटोरीं हैं सुर्खियां

सबसे पहले यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत के दक्षिणी राज्य कर्नाटक में इस वार्षिक कार्यक्रम का विवादास्पद इतिहास रहा है। 2014 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय से संपर्क करने वाले पशु कल्याण संगठन ने ‘कम्बाला’ पर प्रतिबंध लगाने में सफलता हासिल की थी। लेकिन 2017 में प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (कर्नाटक संशोधन) अध्यादेश ने कर्नाटक में कम्बाला उत्सव को फिर से वैध करार दे दिया था।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि जब श्रीनिवास गौड़ा की यह किर्तिमान रचने वाली कहानी विदेशों तक फैली, तब ज्यादातर लोगों ने यही कहा या लिखा कि पारंपरिक भारतीय खेल कम्बाला में यह रिकॉर्ड बना। दैनिक इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि गौड़ी ‘100 मीटर की दूरी ने 9.55 सेकंड’ में इसलिए तय कर सके क्योंकि ‘उनकी गति भैंसों की वजह से काफी बढ़ गई’ थी। कुछ वीडियो देखें और आप ध्यान दें कि दौड़ में एथलीट को अपने चार-पैर वाले भागीदार भैंसों की मदद से गति बनाए रखना पड़ रहा है।

अंततः इस कारनामे को सच्चाई के दृष्टिकोण से अगर देखा जाएगा तो आपके मन में भी यह बात साफ हो जाएगी कि श्रीनिवास की तुलना उसैन बोल्ट से करना थोड़ा अधिक हो जाएगा। हालांकि, इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनकी उपलब्धि के साथ उनकी दौड़ की तस्वीरें लाजवाब हैं और लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए काफी हैं। अब उन्हें प्राप्त हुए नए अवसर में एक पेशेवर ट्रैक एंड फील्ड एथलीट के तौर पर खुद को तैयार करना होगा। जिससे कि आने वाले वक्त में वह सनसनीखेज़ कीर्तिमान रचते हुए नज़र आएं। जल्द ही होने वाले ट्रायल में अगर वह यही समय फिर से हासिल करने में कामयाब रहे तो यह नज़ारा अद्भुत और देखने लायक होगा।