भारतीय टेबल टेनिस: जानें खिलाड़ियों के लिए कैसा रहा साल 2019

साथियान गनासेकरन इस वर्ष टॉप 25 रैंकिंग में अपना नाम शुमार करने में सफल रहे, वहीं युवा मानव ठक्कर ने भी अपनी छाप छोड़ी।

लेखक रितेश जायसवाल ·

भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी वर्ष 2019 में भी यादगार प्रदर्शन करने में सफल रहे। संक्षेप में कहें तो एक ओर जहां साथियान गनासेकरन ने पहली बार वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया वहीं दूसरी ओर कई खिलाड़ी अपनी रैंक बेहतर करने में सफल रहे और साथ ही कुछ ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपने उज्जवल भविष्य की छाप छोड़ी। 

भारत में इस खेल के लिए यह एक फलदायी वर्ष रहा है, क्योंकि मुख्य एथलीट ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल करने में सफल रहे। इसमें कई होनहार युवा खिलाड़ी भी शामिल हैं। ऐसे में यह जानना बेहद ही दिलचस्प हो जाता है कि बीते 12 महीनों में भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी साथियान गनासेकरन, मणिका बत्रा और शरत कमल अचंता और कई अन्य खिलाड़ियों ने कैसा प्रदर्शन किया।

साथियान का यादगार सत्र

26 साल के साथियान गनासेकरन इस सत्र में भारतीय टेबल टेनिस के लिए ध्वजवाहक साबित हुए हैं। पिछले डेढ़ दशक से शरत टेबल टेनिस में अकेले कमान संभाले हुए थे। लेकिन साथियान ने अपने खेल में तेज़ी से सुधार करते हुए उन्हें राहत पहुंचाने का काम किया है।

उन्होंने अपने सीज़न की शुरुआत 2019 के ITTF चैलेंज प्लस ओमान ओपन में एक उत्साही प्रदर्शन के साथ की। इस टूर्नामेंट में उन्होंने एंथनी अमलराज और फ्रांस के इमैनुएल लेबेसन को हराकर ब्रॉन्ज़ मेडल पर कब्ज़ा किया। दुर्भाग्यवश साथियान कतर ओपन में अपनी उसी लय को बरकरार रखने में असमर्थ नज़र आए और मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने में असफल रहे।

कुछ महीने बाद चेन्नई के इस पैडलर ने वर्ल्ड टूर प्लैटिनम ऑस्ट्रेलियन ओपन में एक बार फिर शानदार वापसी करते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया। हालांकि, साथियान एकल वर्ग के मुख्य ड्रॉ में जगह नहीं बना सके, लेकिन वह एंथनी अमलराज के साथ जोड़ी बनाते हुए प्रतियोगिता के पुरुष युगल वर्ग में जीत दर्ज करने में सफल रहे। भारतीय जोड़ी प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में पहुंची और अंततः ली संग-सू और जियॉन्ग यंग-सीक की उस जोड़ी से हार गई, जिसने उस टूर्नामेंट को जीत लिया।

साथियान 2019 एशियाई टेबल टेनिस चैंपियनशिप में भी इतिहास रचने में सफल रहे। वह 43 वर्षों में उस प्रतियोगिता के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने। जबकि अन्य भारतीय पैडलर्स जैसे अमलराज, हरमीत देसाई और मानव ठक्कर शीर्ष 32 में अपनी जगह बनाने में विफल रहे। वह एक अकेले खिलाड़ी रहे जिन्होंने क्वार्टरफाइनल में जगह बनाई। अंततः वह चौथे स्थान के पैडलर लिन गौयुआन से हार गए, लेकिन उनके शानदार प्रदर्शन ने सभी को स्तब्ध कर दिया.

इसके बाद 26 वर्षीय यह खिलाड़ी अपनी पहली ही कोशिश में नवंबर के अंत में ITTF पुरुष विश्व कप के मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने में सफल रहा। उन्होंने प्रतियोगिता के नॉकआउट चरणों में जर्मन दिग्गज टिमो बोल का सामना करने के अपने सपने को साकार करने के लिए फ्रांस के साइमन गॉज़ी और डेनमार्क के जोनाथन ग्रोथ को शिकस्त दी। हालांकि साथियान ने यह टाई 1-4 से गंवा दिया, लेकिन फिर भी टेबल टेनिस में उनका कद काफी बढ़ गया। इसी के साथ वह टेबल टेनिस की रैंकिंग में शीर्ष 25 में पहुंचने वाले पहले भारतीय बन गए।

मनिका बत्रा का संघर्ष

भारतीय खिलाड़ी अभी तक केवल व्यक्तिगत स्पर्धाओं में ही ओलंपिक में भाग लेते रहे हैं। महिला टीम भले ही पुरुष टीम की तरह मजबूत नहीं रही है, लेकिन मनिका बत्रा के 2018 कॉमनवेल्थ खेलों में चार मेडल जीतने के बाद से उनसे काफी उम्मीदें की जाने लगी हैं। वह इस टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली पैडलर बनीं। 

हालांकि, विश्व में 61वें पायदान पर काबिज़ बत्रा 2019 में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाईं और इसलिए विश्व रैंकिंग में नीचे खिसक गई। उनका लक्ष्य अब फिर से शीर्ष 50 में जगह बनाना है।

मनिका बत्रा 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में सिंगल्स और टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी हैं।

भविष्य के लिए संकल्प

बीते 12 महीनों ने भारतीय टेबल टेनिस प्रशंसकों को भविष्य के लिए उत्साहित करने के लिए बहुत कुछ दिया है। कई युवा पैडलर्स पूर्व के सर्वोच्च खिलाड़ियों को चुनौती देते हुए सामने आए।

19 वर्षीय मानव ठक्कर के नाम पर चार आईटीटीएफ वर्ल्ड जूनियर सर्किट बॉयज़ सिंगल्स खिताब हैं और पिछले सीज़न में वह दुनिया के शीर्ष 18 पैडलर में शुमार थे। योग्यकार्ता में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में ठक्कर ने शीर्ष 32 के राउंड में प्रवेश किया और पुरुषों के युगल वर्ग के लिए सानिल शेट्टी के साथ जोड़ी बनाकर 2019 पोलिश ओपन के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।

आने वाले दशक में देश की एक और उम्मीद के तौर पर पैडलर आहिका मुखर्जी भी हैं। उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में शीर्ष 32 के दौर में जगह बनाई और 2019 दक्षिण एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल पर कब्ज़ा करने में भी सफलता हासिल की। महज 20 वर्ष की उम्र में वह एक अकेली युवा पैडलर रहीं जिन्होंने वरिष्ठ स्तर पर प्रवेश किया। वह आने वाले समय में महिलाओं के लिए मिसाल साबित हो सकती हैं।

अल्टीमेट टेबल टेनिस लीग ने भी भारतीय पैडलर्स के लिए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे देश के कई नए खिलाड़ियों को प्रदर्शन करने का मौका मिल रहा है। वहीं, पिछले साल एशियाई खेलों में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने के बाद अब शरत (विश्व रैकिंग 34), साथियान (विश्व रैकिंग 30) और हरमीत देसाई (विश्व रैकिंग 85) के पास 22 जनवरी से पुर्तगाल में शुरू होने वाले ओलंपिक क्वालिफायर में अच्छा प्रदर्शन करके पहली बार ओलंपिक में जगह बनाने का मौका होगा। भारत अभी आठवें नंबर पर है और उसे टीम के रूप में पहली बार ओलंपिक में जगह बनाने के लिए क्वार्टरफाइनल में पहुंचने की जरूरत है।