टोक्यो 2020 से पहले TTFI कर रहा नए टेबल टेनिस कोच की तलाश

भारत का टेबल टेनिस प्रबंध निकाय अप्रैल तक एक नए कोच को नियुक्त करने की उम्मीद कर रहा है।

भारतीय टेबल टेनिस के पूर्व मुख्य कोच मैसिमो कोस्टेंटिनी के सितंबर 2018 में छोड़कर जाने के बाद अब इस जगह को भरने के लिए टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) ने मार्च तक एक नया कोच नियुक्त करने की घोषणा कर दी है।

पूर्व मुख्य कोच कॉस्टेंटिनी के कार्यकाल में भारत ने 2018 एशियाई खेलों में दो ऐतिहासिक ब्रॉन्ज़ मेडल जीते। सितंबर 2018 में उन्होंने अप्रत्याशित रूप से अपना पद छोड़ दिया और वर्तमान में वह टेबल टेनिस के वैश्विक निकाय इंटरनेशनल टेबल टेनिस फेडरेशन के लिए काम कर रहे हैं।

TTFI द्वारा 2019 में कनाडाई कोच देजान पपिक को जोड़ने का प्रयास किया गया था। हालांकि, घुटने की चोट ने उन्हें इस दौड़ से बाहर कर दिया। भारत तब से एक कोच के बिना ही खेल रहा है और इसका प्रभाव पुर्तगाल में जनवरी में टोक्यो 2020 टीम क्वालिफायर में निराशाजनक प्रदर्शन के रूप में सामने आया, जहां पुरुष और महिला दोनों ही टीम कोटा हासिल करने में नाकामयाब रहीं।

अगले चार साल की योजना पर नज़र

टोक्यो 2020 के करीब आने के साथ ही अप्रैल में आने वाले एकल क्वालिफाइंग इवेंट के साथ टीटीएफआई के महासचिव एमपी सिंह ने इस मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि महासंघ नए कोच को नियुक्त करने की दिशा में काम कर रहा है।

सिंह ने पीटीआई से बात करते हुए कहा, “ज्यादातर टीमें चार साल के ओलंपिक चक्र के अनुसार कोच को नियुक्त करती हैं। इसलिए, पिछले कोच के अचानक चले जाने के बाद हमारे पास चुनने के लिए केवल सीमित विकल्प थे और वह भी हमारे काम नहीं आए। अब हमने हर साल अनुबंध को नवीनीकृत करने के बजाय चार साल के लिए एक कोच रखने का फैसला किया है। हमें इसके लिए खेल मंत्रालय की मंजूरी भी मिल गई है।

कोच के बिना भारत का प्रदर्शन

कोच की अनुपस्थिति के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने बहुत ही सम्मानजनक तरीके से अपने खेल को आगे बढ़ाया। क्रमशः 30वें, 34वें और 86वें स्थान पर काबिज़ साथियान गनासेकरन, शरथ कमल और हरमीत देसाई अभी भी शीर्ष 100 में शामिल हैं और भारत में खेल के मानक को बढ़ाने में मदद की है। यह सभी टीटीएफआई और अल्टिमेट टेबल टेनिस लीग की शुरुआत के प्रयासों के परिणाम हैं।

ओलंपिक चैनल से बात करते हुए साथियान ने दिसंबर में कहा था, “फेडरेशन ने हमें भारतीय खेल प्राधिकरण के साथ-साथ बहुत अधिक मौका देना शुरू कर दिया है। हम बहुत सारे विदेशी प्रशिक्षण शिविरों और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में जाने लगे हैं। मैच खेलने के अनुभव में काफी वृद्धि हुई है और अल्टीमेट टेबल टेनिस लीग के आगमन से निश्चित रूप से हमें किसी भी टूर्नामेंट में अधिक आत्मविश्वास के साथ खेलने में मदद मिली है।”

टीम के लिए कोच जरूरी

हालांकि, यदि खिलाड़ी 2020 ओलंपिक खेलों के लिए कोटा स्थान हासिल करने में विफल रहते हैं तो उनके सभी प्रयास व्यर्थ हो जाएंगे। अप्रैल में होने वाले एकल क्वालिफायर को ध्यान में रखते हुए भारत के लिए एक नया कोच बहुत जरूरी है, जिससे कि भारत अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सुनिश्चित कर सके।

एमपी सिंह ने कहा, "मुझे विश्वास है कि अगले महीने तक कोच (विश्व चैंपियनशिप के लिए) के लिए जारी हमारी तलाश खत्म हो जाएगी।” हालांकि, सिंह ने पूरी तरह से इस राय पर सहमति नहीं जताई कि कोच की अनुपस्थिति की वजह से भारत को पुर्तगाल में निराशा हाथ लगी।

उन्होंने कहा, “महिला टीम ओलंपिक कोटा हासिल करने में भले ही असफल रही, लेकिन अच्छा खेली। हालांकि, पुरुषों की टीम को क्वालिफाई करना चाहिए था, लेकिन दबाव में उसे भी निराशा हाथ लगी।”

इस बीच, यह देखा जाना बाकी है कि क्या टीटीएफआई 2020 ओलंपिक से पहले एक नए कोच को नियुक्त करने में सफल हो पाती है या फिर अप्रैल में होने वाले ओलंपिक टेबल टेनिस एकल क्वालिफायर में भारत कोच के बिना ही खेलते हुए नज़र आएगा।

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