2019 में भारतीय टेनिस: इन खिलाड़ियों के साथ हो सकता है एक नए युग का उदय

सुमित नागल और अंकिता रैना का उदय भारत में टेनिस के लिए एक नए युग की शुरूआत कर सकता है।

लेखक रितेश जायसवाल ·

भारत में टेनिस के लिए साल 2019 काफी बेहतर रहा, कई नए खिलाड़ी उभरकर सामने आए जिन्होंने खुद को साबित करने के लिए काफी बेहतर प्रदर्शन किया।

एक ओर मातृत्व अवकाश पर चल रहीं सानिया मिर्ज़ा की अनुपस्थिति से थोड़ी कमी महसूस की गई। वहीं दूसरी ओर दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस और रोहन बोपन्ना के बहुत ज्यादा सुर्खियां न बटोर पाने के चलते यह महसूस किया गया कि भारतीय टेनिस खिलाड़ियों के लिए यह एक शांत वर्ष रहा। हालांकि, ये सारी बातें सच्चाई से बहुत परे हैं।

सुमित नागल, अंकिता रैना और प्रजनेश गुन्नेस्वरन जैसे खिलाड़ियों ने इस सीज़न में शानदार प्रदर्शन किया और साल 2019 को कुछ अच्छी यादों के साथ यादगार बना दिया। आइए हम बीते 12 महीनों में उनकी उपलब्धियों पर और करीब से नज़र डालते हैं।

नागल ने बनाए रिकॉर्ड और फेडरर से हुआ मुकाबला

इस साल किसी भी भारतीय टेनिस खिलाड़ी का 22 वर्षीय सुमित नागल जितना बेहतर प्रदर्शन देखने को नहीं मिला। उन्होंने वर्ष की शुरुआत दुनिया में 361वें स्थान के साथ की और वर्ष के अंत तक शीर्ष 100 में रहते हुए इसे समाप्त किया।

उनकी उम्मीदों के अनुसार वर्ष की शुरुआत उतनी अच्छी नहीं रही। वह साल 2019 में अपने पहले आठ टूर्नामेंट में से प्रत्येक के क्वार्टरफाइनल में जगह बनाने में असफल रहे, लेकिन अप्रैल में टालाहासी टेनिस चैलेंजर में बेहतरीन प्रदर्शन के साथ उन्होंने शानदार वापसी की।

इसके बाद वह अपने अगले आठ टूर्नामेंट में से पांच में सेमीफाइनल में जगह बनाने में सफल रहे। इस बढ़े हुए आत्मविश्वास के साथ वह यूएस ओपन के क्वालीफायर्स में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क गए। जहां नागल ने अपने पहले दो क्वालीफाइंग मैचों को मामूली प्रयास के साथ ही सीधे सेटों के साथ जीत लिया।

हालांकि, तीसरा क्वालीफाइंग मैच उतना आसान नहीं था। ब्राज़ील के जोआओ मेनेज़ेस के खिलाफ खेलते हुए नागल एक सेट में कमज़ोर पड़ गए। लेकिन इस भारतीय ने फिर वापसी की और अगले दो सेटों को जीतते हुए मुख्य ड्रॉ में प्रवेश किया, जहां उनका सामना महान रोजर फेडरर से होना था।

नागल की यह जीत सभी के लिए हैरान करने वाली थी। आर्थर ऐश स्टेडियम में बैठे हुए सभी दर्शक स्विस खिलाड़ी के जीतने की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन इस युवा और निडर भारतीय की जीत ने फेडरर को भी आश्चर्यचकित कर दिया।

सभी मुश्किलों के बावजूद, नागल ने फेडरर के खिलाफ पहले सेट की शुरुआत 6-4 की बढ़त के साथ की, जिसकी दर्शक दीर्घा में बैठे सभी दर्शकों ने खूब प्रशंसा की। हालांकि यह नज़ारा ज्यादा देर तक देखने को नहीं मिला और फेडरर ने खेल पर अपनी पकड़ मजबूत बनाते हुए अगले तीन सेटों को आराम से जीतते हुए दूसरे दौर में अपनी जगह पक्की की। लेकिन उन्होंने नागल के उत्साही प्रयास की प्रशंसा की और युवा भारतीय टेनिस स्टार के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

नागल ने तीन और सेमीफाइनल के साथ वर्ष का समापन किया, जिससे वह आठ टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में प्रवेश करने के लिए एटीपी टूर पर एकमात्र खिलाड़ी बन गए और ब्यूनस आयर्स चैलेंजर में उनकी जीत ने उन्हें दक्षिण अमेरिकी धरती पर एकल खिताब जीतने वाला पहला भारतीय बना दिया।

भारतीय महिलाओं की रैंकिंग के शिखर पर पहुंचीं अंकिता रैना

सानिया मिर्ज़ा के इस खेल से विराम लेने के साथ, अंकिता रैना ने 2019 में अपने अवसरों पर ख़रा उतरते हुए शानदार प्रदर्शन किया। जिसके चलते भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी एकल और युगल दोनों वर्गों में शीर्ष स्थान पर पहुंच गईं।

ऑस्ट्रेलियाई ओपन में क्वालिफायर में हारने के बाद रैना ने सिंगापुर में ITF टूर्नामेंट में इस वर्ष सिर्फ एक सेट हारते हुए अपना पहला खिताब जीता। वह तुर्की में हुए ITF इवेंट के फाइनल में भी पहुंची, लेकिन रूस की विटालिया डायचेंको से फाइनल में हार गईं।

ITF स्तर पर उन्होंने कुछ शानदार परिणाम हासिल किए। वह चीन में सेमीफाइनल और ग्रेट ब्रिटेन में क्वार्टरफाइनल तक पहुंची। उन्होंने भारत के सोलापुर में एक और ITF सिंगल्स का खिताब जीतकर साल 2019 का समापन किया। इस तरह से देखा जाए तो इस 26 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी के लिए यह एक अच्छा साल रहा।

युगल वर्ग में रैना बिबिआने स्कूफ्स के साथ जर्मनी में हुए ITF टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची। इसके बाद उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के साथ ही साथ चीन में हुए ITF टूर्नामेंट के महिलाओं के युगल फाइनल में क्रमशः नाइकाथा बैंस और रोजली वैन डेर होक के साथ मुकाबला किया, लेकिन वह दोनों बार फाइनल की चुनौती से पार पाने में असमर्थ रहीं।

अंततः सोलापुर में हुए मुकाबले में उन्हें साल की बड़ी सफलता प्राप्त हुई। वह साथी खिलाड़ी उलरिके आइकेरी के साथ वर्ष का एकमात्र युगल खिताब जीतने में सफल रहीं। जिसके साथ उन्होंने शीर्ष भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी के रूप में इस वर्ष को पूरा किया।

गुन्नेस्वरन के लिए दिलचस्प रहा यह साल

भारत के शीर्ष क्रम के पुरुष एकल खिलाड़ी प्रजनेश गुन्नेस्वरन के लिए साल 2019 दिलचस्प रहा। 30 वर्षीय यह टेनिस खिलाड़ी एकल वर्ग में हर ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिता के पहले दौर में जगह बनाने वाला एकमात्र भारतीय रहा, लेकिन सभी चार इवेंट में वह उससे आगे बढ़ने में असफल रहा।

साल 2019 में प्रजनेश गुणेश्वरण सभी ग्रैंड स्लैम इवेंट के सिंगल्स के मेन ड्रॉ तक पहुंचने में कामयाब रहे थे।

गुन्नेस्वरन चेन्नई ओपन और बैंकाक ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचे और चीन में कुनमिंग ओपन के फाइनल में जगह बनाई। हालांकि बाद के महीनों में वह फॉर्म को बरकरार रखने में संघर्ष करते हुए नज़र आए। लेकिन साल के अंत में खेल पर एक बार फिर मजबूत पकड़ बनाते हुए वह जिनान ओपन के क्वार्टर फाइनल और चीन में हुए यिनझाऊ टेनिस मेंस टेनिस चैलेंजर के साथ ही साथ शंघाई मास्टर्स के सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहे।

हालांकि गुन्नेस्वरन को शायद ही एक उभरती हुई प्रतिभा के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, क्योंकि यह 30 वर्षीय खिलाड़ी अपने करियर में देर से शिखर पर पहुंचे और अब वह 2020 में एक और मजबूत अभियान का लक्ष्य रखते हुए आगे बढ़ेंगे। ऐसे में हम यह कह सकते हैं कि भारतीय टेनिस में अभी आगे देखने के लिए बहुत कुछ है। सानिया मिर्ज़ा की वापसी के साथ भी दर्शक उम्मीद कर सकते हैं कि नया वर्ष उत्साह और रोमांच से भरपूर होगा।