AAI के हस्तक्षेप से बीमार चल रहे लिम्बा राम को मिलेगी मदद

भारत के महान तीरंदाज में एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी को डाइग्नोस किया गया है और कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप चलते जारी किए गए लॉकडाउन की वजह से वह उचित उपचार के लिए संघर्ष कर रहे थे।

तीरंदाज़ी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएआई) के समय पर हस्तक्षेप से बीमार चल रहे दिग्गज तीरंदाज़ लिम्बा राम (Limba Ram) को पूरी मदद मिलेगी, जो एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी (मल्टीपल सिस्टम एट्रोफी) से जूझ रहे हैं। उन्हें जल्द ही सभी जरूरी उपचार मिलेंगे।

उन्हें नई दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 48 वर्षीय इस तीरंदाज़ में यह बीमारी कोरोना वायरस महामारी के चलते देशभर में लागू लॉकडाउन के दौरान डाइग्नोस की गई।

लिम्बा राम की रिपोर्ट से पता चलता है कि उनके दिमाग में कीड़े हैं, जो उनकी नसों को दबा रहे हैं और उनका तंत्रिका तंत्र (नर्व सिस्टम) सही तरह से काम करता रहे उसके लिए उन्हें इस समय जीवनरक्षक इंजेक्शन की आवश्यकता है।

लेकिन लॉकडाउन के कारण भारत में जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, अस्पताल के अधिकारी जरूरी इंजेक्शन की खरीद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले एक महीने से लिम्बा राम को एक भी इंजेक्शन नहीं लगाया गया है।

हालांकि, एएआई के महासचिव प्रमोद चंदुरकर ने कहा कि फेडरेशन के अध्यक्ष अर्जुन मुंडा ने इस मुद्दे पर ध्यान देकर जरूरी हस्तक्षेप करते हुए सभी मुश्किलों को दूर कर दिया गया है।

स्पोर्टस्टार से बात करते हुए चंदुरकर ने कहा, “मैं अपने अध्यक्ष से बात कर रहा हूं ताकि हम तुरंत ही उन्हें किसी प्रकार की सहायता प्रदान कर सकें। पिछले एक साल से उनका इलाज भारतीय खेल प्राधिकरण साई में चल रहा है। मैंने उनकी पत्नी से बात की है और इस बात का विश्वास दिलाया है कि जल्द ही लिम्बा का नियमित उपचार शुरू किया जाएगा।”

दिग्गज लिम्बा राम का सफर

तीन बार के ओलंपियन लिम्बा राम 90 के दशक में भारतीय तीरंदाजी के पोस्टर बॉय बन गए थे, उस समय उनकी प्रतिभा ने दक्षिण कोरिया जैसे पावरहाउस देशों के चैंपियनों को कड़ी टक्कर देते हुए देखा गया था।

लिम्बा राम ने 1989 में एशियाई तीरंदाज़ी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नेतृत्व किया था। इसके साथ ही इसी प्रतियोगिता में उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में भी रजत पदक जीता था।

तीन ओलंपिक खेलों (1988, 1992, 1996) में भाग लेने के बाद यह भारतीय तीरंदाज़ बार्सिलोना 1992 में पदक जीतने के बेहद करीब पहुंच गए, वह अपने कांस्य पदक मैच में केवल एक अंक से कम रह गए।

इसी बीच पूर्व एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता डिंग्को सिंह, जो लॉकडाउन की वजह से इम्फाल में थे, उन्हें शनिवार को उनके लिवर के कैंसर के इलाज के लिए नई दिल्ली ले जाया गया था।

बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने जानकारी देते हुए कहा कि पूर्व मुक्केबाज़ को आगे के उपचार के लिए लिवर एंड बायिलरी साइंसेज (ILBS) में ले जाया गया है।

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