आर्चरी के पूर्व कोच और खिलाड़ी प्रमोद चांदुरकर अब PPE किट बनाकर दे रहे हैं देश को योगदान

आर्चरी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल प्रमोद चांदुरकर ने बताया कि कैसे वे भारत में आर्चरी का बेस मज़बूत करना चाहते हैं।

जहां कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया रुक चुकी है, वहीं भारतीय आर्चर प्रमोद चांदुरकर (Pramod Chandurkar) ने इस समय से लड़ने के लिए अपना योगदान देना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि प्रमोद चांदुरकर एक फैक्ट्री चलाते हैं, जहां स्पोर्ट्स के कपड़े बनाए जाते हैं लेकिन उन्होंने फिलहाल के लिए उस काम पर रोक लगा दी है।

आपको बता दें, चांदुरकर आर्चरी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (Archery Association of India AAI) के सेक्रेटरी जनरल भी हैं और वह इस मुश्किल समय में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रमोद चांदुरकर ने स्पोर्ट्सवीयर और धनुष और बाण (Bows and Arrows) के बदले डॉक्टरों के लिए पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (Personal Protective Equipment - PPE) किट बनाने का फैसला किया है। उनकी फैक्ट्री में लगभग 30 कारीगरों ने फेस मास्क, दस्ताने और गाउन बनाए हैं जो इस समय की सबसे बड़ी ज़रूरतों में से एक हैं।

चांदुरकर ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया (PTI) से बातचीत के दौरान बताया कि लॉकडाउन के बाद से सभी किसी न किसी तरह अपना योगदान दे रहे हैं। मेरे पास पूरा सिलाई का सेट अप है तो मुझे लगा की PPE से जुड़ी सामग्री बनाना उचित होगा।”

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कारीगर बना रहे हैं पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कारीगर बना रहे हैं पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंटकोरोना वायरस से लड़ने के लिए कारीगर बना रहे हैं पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट

उन्होंने आगे कहा, “मेरा एक दोस्त है जो मेडिकल किट सप्लाई करता है जिससे हमें काफी मदद मिली और साथ ही उनकी कंपनी ने हमें जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने हमे रॉ-मटेरियल भी दिए और तबसे हम लोगों ने लगातार काम किया है। यह एक योगदान है जो हम देश को देना चाहते थे।”

चांदुरकर की फैक्ट्री लगभग हज़ारों गाउन बना चुकी है। उनके करियर की बात की जाए तो वह 1976 नेशनल गेम्स (1976 National Games) और 1982 ऐसन गेम्स 1982 (Asian Games) का हिस्सा रहे हैं और साथ ही वे भारतीय आर्चरी टीम के कोच की भूमिका भी निभा चुके हैं। उनके कोचिंग के दौर में इस टीम ने 1989 एशियन कप (1989 Asian Cup) में गोल्ड मेडल भी अपने नाम किया था।

एक नज़र चांदुरकर के आर्चरी के ऑनलाइन सेशन पर

फैक्ट्री के काम से राहत लेकर प्रमोद चांदुरकर AAI द्वारा चलाए गए ऑनलाइन सेशन के ज़रिए आर्चरी के खिलाड़ी और कोच से भी बात करते नज़र आते हैं। इस दिग्गज ने आगे बात करते हुए कहा, “मुझे यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि इस सेशन में भाग ले रहे सभी स्पीकर पहले से तैयार हो कर आएं और इसी वजह से मैं उन्हें कुछ पॉइंटर्स भी भेजता हूं।”

इनके AAI के साथ भूमिका की बात की जाए तो उन्होंने पुष्टि की कि वे आर्चरी का बेस मज़बूत करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “आपकी सही देखरेख हुई और आप एक नेशनल आर्चर बन गए लेकिन युवा खिलाड़ियों का क्या होगा। यही कारण है कि मैं हर गांव में एक कोच और ट्रेनर को तैयार करना चाहता हूं। इसी तरह हम एक मज़बूत खेमा तैयार कर सकते हैं। आर्चरी ही मेरा जुनून है।”

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!