कभी अपने सस्ते जूतों पर ख़ुद ही लिख दिया था एडिडास, आज वही ब्रांड मेरे नाम के बना रहा जूते – हिमा दास

भारतीय स्टार धावक ने ख़ुलासा किया कि 2018 जूनियर विश्व चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करने के बाद सामने आए परिणामों ने उन्हें रातोंरात देशभर में स्टार बना दिया, लेकिन यह कभी उनकी योजनाओं में शामिल नहीं था।

अपने पिता के दिए हुए साधारण से जूतों पर खुद एडिडास लिखने वाली 400 मीटर की तेज़ धावक हिमा दास (Hima Das) के लिए आज जर्मनी का दिग्गज स्पोर्ट्सवीयर ब्रांड उनके लिए कस्टमाइज़्ड जूते बना रहा है। वाकई उनकी सफलता का सफर बेहद दिलचस्प रहा है।

फ़िनलैंड में 2018 वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में 400 मीटर में स्वर्ण पदक जीतने के बाद जर्मनी के इस ब्रांड ने हिमा दास को अपना ब्रांड एम्बेसडर चुना था।

IAAF इवेंट में भारत का पहला ट्रैक गोल्ड मेडल विजेता बनने के लिए उन्होंने रिकॉर्ड 51.46 सेकंड में 400 मीटर की दौड़ समाप्त की थी। आज उनके एडिडास के जूतों पर एक तरफ उनका नाम और दूसरी तरफ ‘क्रिएट हिस्ट्री’ लिखा रहता है।

इंस्टाग्राम लाइव के दौरान भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना (Suresh Raina) से बात करते हुए असम की इस एथलीट ने खुलासा किया और कहा, “मेरे पहले नेशनल्स के दौरान मेरे पिता ने मेरे लिए स्पाइक्स वाले जूते खरीदकर मुझे दिए थे। वह बहुत ही साधारण से जूते थे, इसलिए मैंने उनपर खुद अपने हाथों से ‘एडिडास’ लिखा था।”

20 वर्षीय ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "आप कभी नहीं जानते कि तक़दीर आपके साथ क्या कर सकती है, एडिडास अब मेरे नाम के साथ जूते बना रहा है।”

हिमा दास ने यह भी खुलासा किया कि 2018 जूनियर विश्व चैंपियनशिप ने उन्हें रातोंरात देशभर में सुर्खियों में ला दिया था और यह कभी भी उनकी योजनाओं में शामिल नहीं था।

हिमा दास ने इंस्टाग्राम चैट के दौरान कहा, “मैं उस समय एशियन गेम्स की तैयारी कर रही थी और ट्रेनिंग के लिए चेक गणराज्य की राजधानी प्राग (Prague) गई हुई थी। AFI ने मुझे वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए कहा और मैंने स्वर्ण पदक जीता।"

हिमा दास ने IAAF वर्ल्ड U-20 चैंपियनशिप में व्यक्तिगत 400 मीटर में रजत पदक और महिलाओं के 400 मीटर में स्वर्ण पदक और 2018 एशियाई खेलों में 400 मीटर रिले रेस में स्वर्ण पदक जीता है।

इस एथलीट का मानना है कि इंडोनेशिया के जकार्ता में भारतीय एथलेटिक्स की सफलता से लोगों पर काफी असर पड़ा, जहां एथलीटों ने 20 पदक जीते। नतीजतन "लोगों ने पहले से कहीं अधिक एथलेटिक्स को फॉलो करना शुरू कर दिया।"

असम के ढ़ींग गांव की हिमा दास “ढ़ींग एक्सप्रेस” के नाम से भी जानी जाती हैं। उन्होंने कहा, जब एथलीटों को लोग जानते हैं और प्रशंसक आपका नाम लेकर आपको प्रोत्साहित करते हैं तो यह आपको बहुत अधिक प्रेरित करता है।”

हिमा दास की ओलंपिक संभावनाएं

कोरोना वायरस (COVID-19) के बढ़ते प्रकोप की वजह से टोक्यो ओलंपिक को स्थगित किया जाना इस एथलीट के लिए काफी फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। खासतौर से अगर उनका 2019 का सीज़न देखा जाए तो वह खास नहीं रहा, इस दौरान उनका प्रदर्शन मिला-जुला रहा है।

हिमा दास को दोहा में 2019 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करनी थी, लेकिन पीठ की चोट की वजह से वह हिस्सा नहीं ले पाईं।
हिमा दास को दोहा में 2019 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करनी थी, लेकिन पीठ की चोट की वजह से वह हिस्सा नहीं ले पाईं।हिमा दास को दोहा में 2019 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करनी थी, लेकिन पीठ की चोट की वजह से वह हिस्सा नहीं ले पाईं।

चेक गणराज्य में लगभग एक महीने में पांच लगातार स्वर्ण पदक हासिल करने के बाद इस एथलीट को दोहा में वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करनी थी, तभी पीठ में लगी एक चोट ने उन्हें इस दौड़ से बाहर होने पर मजबूर कर दिया।

दिसंबर और जनवरी में तीन सप्ताह की ट्रेनिंग के दौरान एक बार फिर से उन्हें बुखार का सामना करना पड़ा। नतीजतन, एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने इस वर्ल्ड जूनियर 400 मीटर चैंपियन और 200 मीटर स्पर्धा के लिए एशियाई खेलों की रजत पदक विजेता को उनकी गति में आई कमी और उनकी एंड्यूरेंस ट्रेनिंग के दौरान जूझते हुए देखा।

हालांकि, हिमा दास देशभर में जारी लॉकडाउन के बावजूद अपनी इस समस्या से उबरने में कामयाब रही हैं और अब वह आने वाले महीनों में ओलंपिक बर्थ को सील करना चाहेंगी।

हिमा दास ने अपनी दिनचर्या को समझाते हुए कहा, “अब क्योंकि हमें मैदान पर जाने की अनुमति नहीं है, ऐसे में मैं कमरे में ही वर्कआउट कर रही हूं। हमारे पास 30-40 मीटर लंबा लॉन है, और मैं व्यायाम के लिए इसी का उपयोग कर रही हूं। मैंने योग और दिमाग के लिए जरूरी व्यायाम करना शुरू कर दिया है। खाने की आदतें भी बदली हैं। मैंने मांसाहारी (Non Veg) खाना बंद कर दिया है और अधिक फल और पानी का सेवन कर रही हूं।”

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