पूर्व ओलंपियन और नेशनल एथलेटिक्स कोच जगमोहन सिंह का निधन

भारतीय हॉकी और एथलेटिक्स की ट्रेनिंग में विज्ञान के तरीकों को लाने वाले जगमोहन सिंह का दिल की धड़कन रुकने की वजह से देहांत हो गया जिसके बाद भारतीय स्पोर्ट्स और एथलेटिक्स सदमे में हैं।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

पूर्व ओलंपियन और नेशनल चैंपियन एथलीट जगमोहन सिंह (Jagmohan Singh) का मंगलवार को निधन हो गया है। 88 वर्षीय इस एथलीट की मौत दिल की धड़कन रुकने से हुई है।

जगमोहन सिंह ने भारत को 1960 रोम ओलंपिक में सम्मान दिलाया था। इतना ही नहीं इस खिलाड़ी के खाते में 110 मीटर हर्डल और डिकेथलॉन का नेशनल रिकॉर्ड भी है।

रोम ओलंपिक के बाद इस एथलीट ने एक खिलाड़ी के तौर पर खेल को छोड़ दिया लेकिन किसी न किसी रूप में वह हमेशा भारतीय ट्रैक एंड फील्ड में अपना योगदान देते गए। इसके बाद जगमोहन को उनकी किताब के लिए सराहा गया जिसमें वह खिलाड़ियों को ट्रेनिंग और रिकवरी के नुस्ख़े देते दिखाई दिए।

जगमोहन को उनकी किताब के लिए सराहा गया जिसमें वह खिलाड़ियों को ट्रेनिंग और रिकवरी के नुस्ख़े देते दिखाई दिए।

एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (Athletics Federation of India – AFI) के पूर्व सेक्रेटरी ललित भनोट ने PTI से बात करते हुए कहा “जगमोहन भारतीय खेल की दुनिया में एक अग्रणी साबित हुए, वह केवल एथलेटिक्स में ही नहीं बल्कि हॉकी और साइक्लिंग में भी वैज्ञानिक प्रशिक्षण विधियों को लेकर आए।”

“अपनी बढती उम्र में भी वह बहुत चुस्त थे। हाल ही में उन्होंने मुझे अपने रिसर्च के दस्तावेज़ भेजे और वह खिलाड़ियों से जुड़ी चीज़ों को और बेहतर करना चाहते थे।”

जगमोहन सिंह 1962 में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्पोर्ट्स (National Institute of Sports – NIS) से जुड़े थे और भारतीय खेल को आगे ले जाने के लिए रणनीति बनाने लग गए थे। NIS में ट्रैक एंड फील्ड के कोचिंग स्टाफ में जगमोहन के हिस्से स्प्रिंटर और हर्डल नेशनल कैंप आए वो भी 20 सालों के लिए।

इतना ही नहीं बल्कि जगमोहन 1966 कॉमनवेल्थ गेम्स 1966 Commonwealth Games और 1975 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप (1975 Asian Athletics Championships) में चीफ एथलेटिक कोच की भूमिका निभाते देखे गए थे और उस समय पदक की गिनती में भारत केवल जापान से पीछे रहा था।

इसके बाद 1973 में जगमोहन सिंह को भारतीय हॉकी टीम के फिज़िकल और कंडीशनिंग कोच बना दिया और यह सिलसिला 1976 ओलंपिक गेम्स तक चलता रहा।

वह कहते हैं न कि एक खिलाड़ी खेल छोड़ भी दे लेकिन खेल उसे कभी नहीं छोड़ता और इसके बाद जगमोहन सिंह को स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ़ इंडिया (Sports Authority of India – SAI) में डीन टीचर की भूमिका मिली और उन्होंने 1990 तक अपनी सेवाओं को जारी रखा।

जगमोहन सिंह फिर अपनी कला को साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (Cycling Federation of India) की ओर ले गए और फिज्कल कंडीशनिंग एडवाइज़र की भूमिका निभाकर देश के गौरव को बढ़ाने लगे।

AFI अध्यक्ष आदिल सुमरिवाला (Adille J. Sumariwalla) ने जगमोहन सिंह के निधन पर कहा “जगोहन सिंह के देहांत ने भारतीय एथलेटिक्स को कमज़ोर कर दिया है। वह हमेशा अपने अनुभव को बांटना चाहते थे और अब हम उनकी सीख से वंचित रह जाएंगे।”