लॉकडाउन में टोक्यो के टिकट ने मानसिक तनाव से बचने में मदद की: नीरज चोपड़ा

भारतीय एथलीट ने अपने ओलंपिक टिकट को सुरक्षित करने के लिए जनवरी में पोचेफस्ट्रूम में एक इवेंट में 87.86 मीटर की दूरी पर भाला फेंकी थी।

दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी की वजह से सभी क्वालिफाइंग इवेंट्स को लंबे समय के लिए टाल दिया गया, लेकिन उससे पहले अपने टोक्यो ओलंपिक बर्थ को बुक करके नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) मानसिक रूप से मजबूत नजर आ रहे हैं।

4x400 मिश्रित रिले टीम के अलावा दिग्गज जेवेलिन थ्रोअर केवल पांच भारतीय एथलीटों में से एक है, जिन्होंने टोक्यो के लिए अपनी टिकट बुक की है। और इसी आश्वासन ने उन्हें पिछले दो महीनों से सकारात्मक उर्जा दिया है।

नीरज चोपड़ा ने ईएसपीएन से कहा कि, "मुझे लगता है कि ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली बात मुझे निराशा से बचने में मदद करने में बहुत महत्वपूर्ण थी।"

उन्होंने बताया कि "अगर मुझे उस टूर्नामेंट को खेले बिना लॉकडाउन में रहने के लिए मजबूर किया गया होता, तो मेरे अंदर नकारात्मक विचार आने लगते।"

“कोहनी में लगी चोट की वजह से मुझे 2019 में ज्यादातर समय मैदान से बाहर ही रहना पड़ा था।”

 नीरज चोपड़ा 16 महीने के लंबे अंतराल के बाद पोचेफस्ट्रूम में ACNE लीग में होने वाली प्रतियोगिता में दिखे, जहां उन्होंने ओलंपिक का टिकट बुक किया था।

हालांकि, इस प्रतिभाशाली एथलीट ने ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया, जहां उन्होंने 85.8 ओलंपिक कट-ऑफ अंक को पार करते हुए 87.86 मीटर की रिकॉर्ड दूरी पर भाला फेंककर सभी को चौंका दिया।

अपनी ताकत पर विश्वास करने वाले जेवेलिन थ्रोअर अपने आप को धैर्यवान बनाने में सफल रहे और पटियाला में अपने होटल के कमरे में ही रह रहे हैं।

नीरज चोपड़ा ने कहा, "भले ही मैं अपनी चोट से उबर गया था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि मैं वास्तव में उतनी दूरी तक फेंकने की क्षमता रखता हूं।"

नीरज चोपड़ा ने कहा कि “अब, मुझे पहले से ही पता है कि मैं कम से कम इतना फेंक सकता हूं। तो अब केवल इंतज़ार करना होगा।”

समय के साथ सीखते गए नीरज

नीरज चोपड़ा उस समय चोटिल हो गए थे जब वो 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में अपने स्वर्ण पदक का जश्न मना रहे थे।

भाला फेंकते समय उसके कंधे में जकड़न हो गई था और फिर कोहनी में चोट लग गई थी, जिसके कारण इस एथलीट को खेल से दूर रहना पड़ा। जिसके कारण नीरज चोपड़ा को अकेले ट्रेनिंग करनी पड़ी और 2019 में अकेले रिहेब से गुजरना पड़ा।

नीरज चोपड़ा का कहना है कि अनुभव ने पिछले कुछ महीनों में धैर्य रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नीरज चोपड़ा ने बताया, "मैंने पिछले साल इन चीजों से कैसे निपटा जाए, इसमें बहुत कुछ सीखा है।" मुझे मैदान से दूर रहने का काफी अनुभव मिला।

"मैं वास्तव में संघर्ष कर रहा था। मैं सोचता रहा कि मैं कब वापस लौट पाऊंगा।"

एशियन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट ने कहा कि "इस स्थिति में, कम से कम मुझे पता था कि जब भी लॉकडाउन समाप्त होता है, मैं भाला फेंकना शुरू कर सकता हूं।"

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