लॉकडाउन के समय ज़रूरतमंदों की मदद की लिए उठते भारतीय एथलीट्स के हाथ

आवारा जानवरों को खाना खिलाना, प्रवासियों की मदद करना और संघर्षरत एथलीटों को सहायता प्रदान कर भारतीय एथलीट्स अपनी ज़िम्मेदारी बख़ूबी निभा रहे हैं।

जैसा की पूरे देश में कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण लॉकडाउन लागू है तो भारतीय एथलीट्स जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं।

स्टार खिलाड़ियों से लेकर युवा खिलाड़ियों तक इस मुहिम में जुड़े हुए हैं। इस महीने की शुरुआत से ही दुती चंद (Dutee Chand), अचंता शरथ कमल (Achanta Sharath Kamal), दत्तू बबन भोकानल (Dattu Baban Bhokanal) और लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) अपने कामों के कारण सुर्खियों में छाए हुए हैं।

भारत में लॉकडाउन में जरुरतमंद लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है और इस समय कई एथलीट्स ने मदद को हाथ बढ़ाए हैं।

प्रवासी मज़दूरों को घर पहुंचाने की मदद

 रियो 2016 ओलंपियन देविंदर वाल्मीकि (Devindar Walmiki) के छोटे भाई हॉकी खिलाड़ी अनूप वाल्मीकि (Anup Walmiki) इस महामारी के दौरान मदद करने में हमेशा तत्पर रहे।

25 साल के सेंट्रल रेलवे स्टार जो टिकट कलेक्टर की नौकरी कर रहे हैं, उन्हें सरकार द्वारा मुम्बई में प्रवासियों की मदद के लिए विशेष रेलगाड़ियों को मंजूरी देने के बाद उन्हें मुंबई में ड्यूटी करने के लिए बुलाया गया था।

ये फॉरवर्ड 12 घंटे की शिफ्ट में काम कर रहा है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करते है कि इन ट्रेनों के अंदर प्रवासियों को उनकी यात्रा के दौरान पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध कराया जाए। 

अनूप ने आईएएनएस एजेंसी से बातचीत में कहा कि “ये लोग हमारे समाज की रीढ़ की हड्डी है। मैं खुद जानता हूं कि गरीबी क्या है और कौन सी हताशा लाती है, इसलिए आप वहीं मदद करते हैं, जो आप कर सकते हैं।”

आवारा जानवरों को खाना खिलाना

एक अन्य हॉकी खिलाड़ी जसजीत कुलर (Jasjit Kular) जो 2014 हॉकी विश्व कप में प्रतिस्पर्धा करने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे, जालंधर में अपने गांव के पास हर दिन सैकड़ों आवारा जानवरों को खिला रहे हैं। लॉकडाउन के समय हाईवे से जुड़े खाने के साधन और होटल के बंद होने के साथ ही इन्हें भूखा ही रहना पड़ रहा था।

इसलिए, 30 साल का ये खिलाड़ी अपने 5 दोस्तों के सात मिलकर जालंधर में राजमार्ग और वाणिज्यिक क्षेत्रों के आसपास हर दिन लगभग 500 आवारा कुत्तों को खिला रहे हैं। जसजीत ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि “हमें राउंड पूरा करने में सुबह 4 घंटे लग जाते हैं। हमारा 6 लोगों का समूह है और हम 2-2 तीन समूह में बंट जाते हैं। हम रोजाना करीब 25-30 किलोमीटर का एरिया कवर करते हैं।”

जसजीत ने भारत की तरफ से 65 मैचों में हिस्सा लिया है और वह सोया चंक्स और कुत्ते के भोजन के बैग खरीदते हैं और कुत्तों को खिलाने के लिए शहर की यात्रा करने से पहले इसे खुद पकाते हैं।

दिल खोलकर दान

युवा निशानेबाज शिवम ठाकुर जो अगले एशियन यूथ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं, उन्होंने अगले तीन साल तक अपनी आय का ज्यादा हिस्सा दान देने का फैसला किया है, ताकि जरुरतमंदों की मदद की जा सके।

ठाकुर ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि “मैं जो भी कमाता हूं, उसका 60% उन एथलीट्स के लिए दान करूंगा, जो  इस महामारी के कारण प्रभावित हुए हैं।” ठाकुर ने आगे कहा, '' मैंने महामारी के खिलाफ अपनी लड़ाई में संघर्ष कर रहे एथलीटों को अब तक जो भी कमाया है, उसका 60 फीसदी देने का फैसला किया है।''

शिवम ठाकुर अपने शुरुआती दिनों में तेज गेंदबाज थे लेकिन लिगामेंट की चोट के कारण उन्हें क्रिकेट छोड़ना पड़ा और इसके बाद उन्होंने स्थानीय 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धाओं में प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

नोएडा के रहने वाले 17 वर्षीय इस खिलाड़ी ने क्रिकेट के एक जोड़ी पैड की नीलामी करने के बारे में सोचा है, यह पैड उन्हें भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) ने गिफ्ट में दिए थे। इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल भी वह इसी काम में करेंगे।

एक मदद करने वाला हाथ और एक हेल्पलाइन

एक अन्य निशानेबाज पृथ्वीराज टोंडिमन (Prithviraj Tondaiman) जो मार्च में दिल्ली में आयोजित ओलंपिक शूटिंग ट्रैप में शीर्ष पर रहे थे। वह अपने जन्म स्थान पुडुकोट्टई तमिलनाडु में जरूरतमंद लोगों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

32 साल का ये निशानेबाज 350 से अधिक परिवारों को किराने का सामान और अन्य आवश्यक सामान की आपूर्ति करने से पहले अपनी निजी शूटिंग रेंज में अभ्यास करते हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान पृथ्वीराज ने बताया कि, ''अपने परिवार की मदद से हमने एक हेल्पलाइन भी स्थापित की है, ताकि हम ज़रूरतमंद लोगों तक पहुंच सके। हम आने वाले हफ्तों में ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद करेंगे।''

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