ज़रूरतमंदों के लिए भोजन और सैनिटाइज़ेशन का इंतज़ाम कर रहे हैं कई भारतीय एथलीट

पूर्व और वर्तमान एथलीट कोविड-19 के वक्त अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए ग़रीबों की मदद कर रहे हैं।

कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण पूरी दुनिया ठहर सी गई है और सभी इस वायरस से लड़ रहे हैं। इस दौरान सभी ज़रूरतमंदों की मदद भी कर रहे हैं और एथलीट भी इससे अछूते नहीं हैं।

भारतीय महिला वेल्टरवेट बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) जिन्होंने पिछले महीने ही टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया है, वह असम स्थित अपने घर गोलाघट में ग़रीबों की मदद कर रही हैं।

लवनीना ने की गरीबों की मदद की अपील

लवलीना बोरगोहेन ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि “मैंने यहां (गोलघाट) में ज़िम्मेदारी उठाने का फैसला किया, यहां बहुत से लोग हैं, जिन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसी को खाना तक नहीं मिल रहा है, इसलिए मुझे लगा कि मदद करनी चाहिए।’’ इसके अलावा उन्होंने कहा कि, ‘’मेरे पिता भी मेरी मदद कर रहे हैं और मेरा पूरा परिवार मेरा सपोर्ट कर रहा है।”

भारतीय बॉक्सर अपने पिता टिकेन बोरगोहेन (Tiken Borgohain) की मदद से 200 से ज्यादा परिवारों की मदद कर चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए दूसरे लोगों को भी इस काम में हाथ बंटाने की अपील की।

इस बॉक्सर ने कहा कि, ‘’मैंने सोशल मीडिया पर लोगों से कहा कि इस महामारी में एकजुट हों। कई लोग है, जो मदद करना चाहते हैं लेकिन नहीं कर पा रहे हैं। मैं फेसबुक पर भी पोजिटिव वीडियो डाल रही हूं।’’

भोकानल ने किया रोइंग पैडल के बजाय उर्वरक स्प्रेयर का इस्तेमाल

दत्तू बबन भोकानल (Dattu Baban Bhokanal) एक और एथलीट हैं जो कोविड-19 के खिलाफ चल रही जंग में शामिल हैं। भारतीय रोवर ने अधिक हाथों के दृष्टिकोण का विकल्प चुना है।

एशियन गेम्स का ये गोल्ड मेडलिस्ट अपने गांव तालेगांव रुही में फ्रंटलाइन पर देखा गया है, ये खिलाड़ी घर से मूल रूप से कृषि उपयोग के लिए एक उर्वरक स्प्रेयर का उपयोग कर स्वच्छता अभियान चला रहे हैं।

भारत के दत्तू बबन भोकानल ने रियो 2016 में सिंगल स्कल्स क्वार्टरफ़ाइनल पूरा किया था।
भारत के दत्तू बबन भोकानल ने रियो 2016 में सिंगल स्कल्स क्वार्टरफ़ाइनल पूरा किया था।भारत के दत्तू बबन भोकानल ने रियो 2016 में सिंगल स्कल्स क्वार्टरफ़ाइनल पूरा किया था।

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) से बातचीत के दौरान दत्तू बबन ने बताया कि, ‘’मैं और मेरा परिवार और कुछ दोस्त मिलकर गांव को सैनिटाइज़ कर रहे हैं, हमारे गांव की जनसंख्या करीब 12000 है।’’

29 साल के इस खिलाड़ी ने साल 2016 रियो ओलंपिक में भी क्वालिफाई किया था। अब ये खिलाड़ी अपने दोस्तों और पिता के साथ हफ्ते में दो बार गांव को सैनिटाइज़ कर रहे हैं।

इस खिलाड़ी ने बताया कि, ‘’सैनिटाइज़ेशन इस वायरस को दूर रखने में काफी कारगर साबित होता है। उदाहरण के तौर पर जब एक व्यक्ति डॉक्टर के क्लिनिक जाता है तो हो सकता है कि वहां उसने वहां रखी चीजों को छुआ हो। ’इसलिए हम क्लिनिक के साथ बाकी हिस्सों को भी सैनेटाइज कर रहे हैं।’’

दत्तू बाबन भोकानल ने आगे कहा, "हमने सरकारी क्लिनिक, पशु चिकित्सा क्लिनिक, ग्राम पंचायत कार्यालय के गेट को कई बार साफ किया, इसके अलावा मेडिकल दुकानों, मंदिरों और स्थानीय सब्जी बाजार को भी सैनिटाइज़ किया है।

हॉकी बिरादरी ने अपनी भूमिका निभाई

इसके अलावा भारतीय मेंस हॉकी टीम के पूर्व फॉरवर्ड और मौजूदा समय में पंजाब पुलिस के साथ कार्यरत गगन अजीत सिंह (Gagan Ajit Singh) भी गरीबों को खाने के पैकेट बांट रहे हैं और लॉ एंड ऑर्डर का पालन करवा रहे हैं।

इस खिलाड़ी के पूर्व कप्तान राजपाल सिंह (Rajpal Singh) भी पंजाब पुलिस में हैं और लॉ एंड ऑर्डर का पालन करवा रहे हैं। राजपाल सिंह ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि, ‘’कई हॉकी खिलाड़ियों ने मुझसे बात की और ग़रीबों की मदद करने की इच्छा जताई। हमने 30 परिवारों को चिन्हित किया और उनकी मदद कर रहे हैं।’’

वहीं चंडीगढ़ गोल्फ क्लब, जिसने जीव मिल्खा सिंह (Jeev Milkha Singh) और शुभशंकर शर्मा (Shubhankar Sharma) जैसे खिलाड़ियों को तराशा वह भी गरीबों को खाना वितरीत कर रहे हैं। ये संस्था 600 पैकेट रोजाना लोकल क्षेत्र में बांट रही है। वहीं क्लब मैनेजमेंट ने सूखा राशन और पैसे भी 200 से ज्यादा लोगों को दिए हैं।

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