अपने पहले ओलंपिक में मुझे प्राइमरी स्कूल के छात्र जैसा लग रहा था: पीटी उषा 

पीटी उषा ने 16 साल की उम्र में मॉस्को ओलंपिक में डेब्यू किया था। 100 मीटर और 200 मीटर रेस में वह छठे स्थान पर रहीं थीं।

1984 लॉस एंजिल्स गेम्स में भारत के लिए पीटी उषा (PT Usha) ने शानदार प्रदर्शन दिखाया लेकिन वह ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने से महज़ 1/100 सेकंड से चूक गईं। ग़ौरतलब है कि भारतीय स्प्रिंटर 400 मीटर हर्डल रेस में हिस्सा ले रहीं थीं।

वह पीटी उषा का पहला ओलंपिक संस्करण नहीं था बल्कि वह 4 साल पहले मॉस्को गेम्स का भी हिस्सा रह चुकीं थीं। आपको बता दें कि उस समय पीटी उषा भारत के लिए सबसे छोटी खिलाड़ी बनीं थी जिन्होंने ओलंपिक गेम्स में भाग लिया हो और यह रिकॉर्ड आज तक उन्ही के नाम है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए उषा ने बताया “वह तथ्य ओलंपिक के ख़त्म होने के बाद मुझे पता लगा था। ओलंपिक में मैं अकेली पड़ गई थी क्योंकि सभी लोग मुझसे काफी ज़्यादा सीनियर थे।”

अपनी ज़िंदगी का ज़्यादातर हिस्सा केरल में बिताने की वजह से उन्हें सिर्फ मलयालम भाषा समझ में आती थी और मॉस्को गेम्स 1980 में वह केवल बास्केटबॉल कोमकोलनाथ राजन (Makkolath Rajan) से ही बातचीत कर पातीं थीं।

अपने शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय एथलेटिक्स के चीफ कोच जोगिंदर सिंह सैनी (Joginder Singh Saini) ने उन्हें अपने नेत्रित्व में लिया और धीमे-धीमे उन्हें और बेहतर करने लग गए।

“जेएस सैनी ने मुझे प्रोत्साहन दिया जिससे मझे आत्मविश्वास मिला कि मैं 100 मीटर हीट में भी अच्छा कर सकती हूं। मैं कभी भी 200 मीटर में दौड़ना नहीं चाहती थी लेकिन उन्होंने मेरी काब़िलियत देखी और मुझे इसके लिए पुश किया और इसके बाद मैं उस वर्ग में छठे स्थान पर रही।”

मॉस्को 1980 में पीटी उषा 100 और 200 मीटर में छठे स्थान पर रहीं। फोटो:पीटी उषा/फेसबुक  
मॉस्को 1980 में पीटी उषा 100 और 200 मीटर में छठे स्थान पर रहीं। फोटो:पीटी उषा/फेसबुक  मॉस्को 1980 में पीटी उषा 100 और 200 मीटर में छठे स्थान पर रहीं। फोटो:पीटी उषा/फेसबुक  

यह कहना गलत नहीं होगा कि पीटी उषा को ओलंपिक गेम्स में भागते देख सभी भारतीय प्रशंसकों का दिल प्रेम और इज्ज़त से लबरेज़ हो जाता था और वह भी अपनी मेहनत से, अपने जज़्बे से सभी का मन मोहने में सफल हो जाती थी।

पयोली एक्सप्रेस (Payyoli Express) ने आगे कहा “मेरी पहली फ्लाईट थी दिल्ली से मॉस्को और सभी उम्र में बहुत बड़े थे और यह देख कर में नर्वस हो गई और लग रहा था कि मैं प्राइमरी क्लास की छात्र हूं। लेकिन वह अनुभव एक बहुत ही अच्छी भावना थी।”

किसे पता था कि उसके चार साल बाद पीटी उषा भारत के लिए सबसे खास खिलाड़ियों में अपना नाम शुमार कर ओलंपिक गेम्स का हिस्सा होंगी। मेहनत के बल पर इस भारतीय ट्रैक एंड फील्ड क्वीन ने 1982 एशियन गेम्स में 100 और 200 मीटर में भाग लेते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया और 1983 एशियन गेम्स चैंपियनशिप में सिल्वर और गोल्ड मेडल पर अपने नाम की मुहर लगा दी।

कैलिफोर्निया में चल रहे प्री ओलंपिक इवेंट में भारतीय धावक पीटी उषा ने अमेरिकी जूडी ब्राउन किंग (Judy Brown King) को मात देते हुए अपाने कारवां को आगे बढ़ाया। इसके बाद वह रुकीं नहीं और 1984 लॉस एंजिल्स गेम्स में भी उन्होंने ठीक ऐसा ही किया।

अब बारी थी सेमीफाइनल की और किंग ने पीटी उषा से बेहतर प्रदर्शन किया और दोनों ही एथलीट फाइनल तक पहुंच गईं। इसके बाद ओलंपिक इतिहास में भारतीय रनर के प्रदर्शन को देखते हुए उनका नाम हमेशा के लिए सुनहरे शब्दों में लिख दिया गया।

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!