पीटी उषा का डॉक्टर बेटा विग्नेश उज्ज्वल खेल की दुनिया में कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार

27 वर्षीय स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ जल्द ही उषा स्कूल ऑफ एथलेटिक्स में एथलीटों की सहायता करते हुए देखे जा सकते हैं।

एथलेटिक्स से संन्यास लेने के बाद भारतीय ट्रैक एंड फ़ील्ड की क्वीन पीटी उषा (PT Usha) ने अपनी अकादमी के ज़रिए एक बार फिर खेल की दुनिया में वापसी की है। अब वह जल्द ही अपने बेटे डॉ. विग्नेश उज्ज्वल के साथ काम करते हुए देखी जा सकती हैं।

2017 में डॉक्टर बन 27 वर्षीय विग्नेश ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) द्वारा संचालित दो वर्षीय ऑनलाइन कोर्स को पूरा करने के बाद खेल चिकित्सा में अपना डिप्लोमा हासिल कर लिया है।

विग्नेश उज्ज्वल ने स्पोर्टस्टार को दिए गए एक इंटरव्यू में बताया, "खेल चिकित्सा दवा की अन्य शाखाओं से अलग है, यह बहुत विशाल है और यह एक ऐसी चीज़ है जिसमें मुझे बहुत दिलचस्पी है। यहां बहुत अधिक संभावनाएं हैं। मैं यहां डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में एक क्लब में शामिल हो सकता हूं या विदेश जा सकता हूं। या फिर मैं हमेशा रिसर्च कर सकता हूं।”

शुरूआती सालों में स्प्रिंटिंग के गुण उनके अंदर स्पष्ट तौर पर देखे जा सकते थे - विग्नेश उज्ज्वल ने स्कूल में कई पदक जीते - लेकिन ऐसा नहीं था कि वह इसे पेशेवर तौर पर करना चाहते थे।

पीटी उषा ने स्वीकार किया, “जब हमने उसे दौड़ाया और उसके टेस्ट लिए तो उसने बहुत अच्छा किया। लेकिन उसने तब एथलेटिक्स में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। मुझे अच्छा लगता, अगर वह एथलेटिक्स को लेकर आगे बढ़ता, लेकिन हम उसपर दबाव नहीं बनाना चाहते थे।"

हालांकि, विग्नेश उज्ज्वल ने किसी न किसी स्तर पर खेल को खेलना जारी रखा। उन्होंने अपने मेडिकल कॉलेज की फुटबॉल टीम के लिए एक स्ट्राइकर के रूप में खेला, लेकिन बाद में अपनी डिग्री को सही से उपयोग में लाने का फैसला किया।

ट्रैक पर वापस लौटीं पीटी उषा 

COVID-19 महामारी के बीच धीरे-धीरे फिर से खेल शुरू किए जा रहे हैं। पीटी उषा ने सितंबर में भारतीय एथलेटिक्स सीज़न के फिर से शुरू होने के लिए अपने छात्रों को तैयार करना शुरू कर दिया है।

दिग्गज भारतीय धावक केरल के कोझीकोड में “उषा स्कूल ऑफ एथलेटिक्स” नाम से अपनी खेल अकादमी चलाती हैं, जहां उभरते हुए एथलीटों को हर संभव सुविधाएं और उचित प्रशिक्षण मुहैया कराया जाता है।

पूर्व में ओलंपियन टिंटू लुक्का (Tintu Lukka) और दुती चंद (Dutee Chand) को पीटी उषा ने प्रशिक्षित करने का भी काम किया। पीटी उषा ने लॉस एंजेलिस 1984 में 400 मीटर बाधा दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान हासिल किया और महज कुछ पल से कांस्य पदक जीतने से चूक गईं।

भले ही वह अपने एक सपने को पूरा करने से चूक गईं, लेकिन पूर्व भारतीय धावक अब अपने किसी छात्र के माध्यम से इस सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।

पीटी उषा ने एक इंटरव्यू में कहा, “ओलंपिक पदक को छोड़कर मैंने जो भी लक्ष्य रखा, उसे हासिल किया। मैं अब यह सुनिश्चित करना चाहती हूं कि मेरे छात्रों में से कोई एक ओलंपिक पदक जीते।”

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