अरपिंदर सिंह को उम्मीद, वह टोक्यो ओलंपिक के लिए कर सकते हैं क्वालिफाई

भारतीय ट्रिपल जम्पर ने बताया कि किस तरह ओलंपिक का स्थगन उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

भारतीय ट्रिपल जम्पर अरपिंदर सिंह (Arpinder Singh) उन एथलीटों में से एक हैं, जिन्हें टोक्यो ओलंपिक के स्थगन के बाद फायदा मिल रहा है। 2018 में चेक गणराज्य में कांस्य पदक जीतने के बाद कॉन्टिनेंटल कप पदक जीतने वाले पहले भारतीय अरपिंदर सिंह को लगता है कि COVID-19 महामारी की वजह से एक साल के लिए टाले गए ओलंपिक खेलों की वजह से उनकी टोक्यो 2020 में क्वालिफाई करने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

अरपिंदर सिंह ने स्पोर्टस्टार से बात करते हुए कहा, “यह स्थगन मेरे लिए एक तरह से फायदेमंद साबित हुआ है। ऐसा लगता है कि मैं अप्रैल में फेडरेशन कप के लिए तैयार नहीं था। मुझे लगा कि मैं अंतर-राज्यीय मीट (बेंगलुरु में जून के अंत में होने वाला मुकाबला) के समय तक ही तैयार हो जाऊंगा। इसलिए, ओलंपिक में यह एक साल की देरी से मुझे काफी मदद मिलेगी।”

ओलंपिक में ट्रिपल जंप के लिए क्वालिफाई करने के लिए एथलीटों को मानक के अनुसार 17.14 मीटर के निशान को छूने की आवश्यकता होती है। 2014 में लखनऊ में अंतर-राज्यीय नेशनल्स में अरपिंदर सिंह ने 17.17 मीटर की छलांग लगाकर साबित किया था कि वह उस मानक को पार कर सकते हैं। यह (17.17 मीटर) उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ भी रहा।

भारत के अरपिंदर सिंह प्रदर्शन करते हुए
भारत के अरपिंदर सिंह प्रदर्शन करते हुएभारत के अरपिंदर सिंह प्रदर्शन करते हुए

हालांकि, अमृतसर के ट्रिपल जम्पर तक से अपने उस रिकॉर्ड को पार करने में असफल रहे हैं। अरपिंदर सिंह ने 2018 गुवाहाटी अंतर-राज्यीय नेशनल्स में 17 मीटर का आंकड़ा जरूर पार किया था।

उन्हें जकार्ता एशियाई खेलों में 16.77 मीटर की छलांग के साथ स्वर्ण जीतने की वजह से गुवाहाटी अंतर-राज्यीय नेशनल्स में हिस्सा लेने का मौका मिला। उनका मानना है कि टोक्यो के लिए अब उन्हें जो अधिक समय मिला है, उसकी बदौलत वह अपनी तकनीक को बदलकर ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफाई कर सकते हैं।

अरपिंदर सिंह ने स्वीकार किया, “अब मुझे अपनी तकनीक में किए गए परिवर्तनों को आज़माने के लिए बहुत अधिक समय मिल गया है। मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ, क्योंकि शुरू में मुझे बताया गया था कि ओलंपिक चार साल के चक्र में होता है। इसलिए खेलों को अगले साल के लिए टालना संभव नहीं था। हमने पहले कभी इस तरह की स्थिति नहीं देखी, यह अनुभव मेरे लिए नया है। लेकिन मैं खुश हूं, क्योंकि मुझे पता है कि मैं इंटर-स्टेट के समय तक अपनी फॉर्म में वापस लौट सकता हूं”।

अरपिंदर से फिर जुड़े कोच पीबी जयकुमार

ओलंपिक के स्थगन के अलावा तिरुवनंतपुरम के उनके कोच पीबी जयकुमार एक बार फिर अरपिंदर सिंह से जुड़ गए हैं और वह उनकी तैयारियों को तेज़ी से आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। 2014 राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदक विजेता विजेता पीबी जयकुमार से ट्रेनिंग लेकर एशियाई खेलों में एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले 48 वर्षों में पहले भारतीय बन गए।

27 वर्षीय ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “मुझे अच्छे परिणाम नहीं मिल रहे थे। ऐसे में कुछ समझ नहीं आ रहा था। चाहकर भी अच्छी छलांग नहीं लगा पा रहा था। इसलिए मैंने फिर से जयकुमार से प्रशिक्षण लेने का फैसला किया। उन्होंने एंटनी (यिच) विधि के को इस्तेमाल नहीं करने की बात कही। जयकुमार ने रूसी तकनीक को प्राथमिकता दी, जो कूदने की क्षमता पर ध्यान केंद्रित करने को कहता है। जबकि एंथोनी का फॉर्मूला गति पर आधारित है।”

अब अरपिंदर अपने कोच पीबी जयकुमार से ट्रेनिंग लेकर ट्रैक पर वापसी का सपना देख रहे हैं। उनका आत्मविश्वास अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है। उनकी नज़र टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई करने पर होगी।

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