अश्विनी पोनप्पा का मानना है कि पढ़ाई और खेल दोनों का मज़ा साथ-साथ है 

भारतीय शटलर के मुताबिक़ उचित सपोर्ट सिस्टम के होने से युवा एथलीट किताबी दुनिया और खेल की दुनिया का साथ में आनंद ले सकते हैं।

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी अश्विनी पोनप्पा (Ashwini Ponnappa) का मानना है कि एथलीट के जीवन में शिक्षा और खेल एक साथ हो सकते हैं।

ज्वाला गुट्टा (Jwala Gutta) के साथ मिलकर 2011 विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय शटलर अश्विनी पोनप्पा ने महसूस किया कि शुरुआती दिनों में कोई भी एथलीट अपने खेल को आगे ले जाने के लिए समर्थन चाहता है, जो उसे करियर में आग ले जा सकता है।

बैडमिंन-टॉक (BadminTalk) चैनल के साथ एक YouTube इंटरव्यू में 30 वर्षीय शटलर ने कहा “मुझे लगता है कि दोनों के बीच संतुलित रास्ता खोजने की ज़रूरत है। आपके माता-पिता चाहते हैं कि आप पढ़ाई करें, जो कि महत्वपूर्ण है। लेकिन बैलेंस ढूंढना भी संभव है।”

“समस्या ये है कि अभी तक भारत जैसे देश में खेल को उतना महत्व नहीं मिलता है जितना पढ़ाई को दिया जाता है। बहुत सारे माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाई करने के लिए मजबूर करते हैं, खेल-कूद के लिए नहीं। इसलिए, स्पोर्ट्स हमेशा पढ़ाई के बाद ही आता है।’’ 

"लेकिन मेरे लिए, सौभाग्य से, मेरे माता-पिता ने मुझे खेलने के लिए और उसमें करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया और बहुत सारे बच्चों को इस प्रकार का अवसर नहीं मिला।’’

इस स्टार भारतीय शटलर ने आगे कहा कि, "वे कम उम्र में खेलना शुरू तो करते हैं, लेकिन जैसे ही वो हाई स्कूल में पहुंच जाते हैं, तो उनके लिए बैडमिंटन बंद हो जाता है और बस पढ़ाई दिखने लगती है।’’

कोर्ट पर उतरने को बेक़रार हैं पोनप्पा

हालाँकि, भले ही बैडमिंटन में करियर न बन पाए, लेकिन भारतीय शटलर ने महसूस किया कि ऐसे कई रास्ते हैं जो एथलीट अपने जुनून को आगे बढ़ाने के लिए तलाश सकते हैं।

लंदन 2012 और रियो 2016 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली अश्विनी पोनप्पा ने कहा “आप अपनी पढ़ाई कर सकते हैं और बैडमिंटन भी खेल सकते हैं। इस तरह आप पढ़ने के साथ साथ खेल में भी बेहतर हो सकते हैं, लेकिन साथ ही आपको अपने पसंदीदा चीज को पकड़े रहना होगा।”

“अगर ये संभव नहीं हो पाता है, तो इन दिनों ऐसे कई YouTube वीडियो हैं जिन्हें आप देख सकते हैं और सीख सकते हैं।’’

“आप शीर्ष खिलाड़ियों को देख सकते हैं और सीख सकते हैं। आप हमेशा खेल सीख सकते हैं। अपने दिमाग का उपयोग करें ... किसी को देखें और गेम को अपने अंदर ढालने का प्रयास करें।"

भारतीय शटलर कोरोना वायरस (COVID-19) के चलते बेंगलुरु अपने घर वापस आ गई हैं, लेकिन जल्द से जल्द वो कोर्ट पर उतरने के लिए बेक़रार हैं।

“मैं (बेंगलुरु में) एक अपार्टमेंट में रहती हूं, इसलिए मेरे पास एक छोटा सा एरिया है जहां मैं वर्कआउट कर सकती हूं। और फिर हमने घर के अंदर एक छोटा सा बैडमिंटन नेट भी लगाया है, इसलिए मैं वहां अभ्यास कर सकती हूं।’’

उन्होंने अपनी बात ख़त्म करते हुए कहा कि, "लेकिन मैं जल्द ही कोर्ट पर आने की उम्मीद कर रही हूं।"

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