फ़िज़िकल एजुकेशन ही भारत को बना सकता है स्पोर्टिंग पॉवरहाउस: पुलेला गोपीचंद

पूर्व बैडमिंटन खिलाडी पुलेला गोपीचंद ने बताया कि कम उम्र में ही फिज़िकल एजुकेशन का ज्ञान पा लेना है लाभदायक।

भारतीय बैडमिंटन नेशनल टीम के कोच पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand) जानते हैं कि एक खिलाड़ी को जीत की ओर कैसे लेकर जाया जाता है। भारत में बैडमिंटन का नक़्शा बदलने वाला यह खिलाड़ी पिछले कुछ अरसे से स्कूली छात्रों और अध्यापकों को फिज़िकल एजुकेशन टीचर्स (Physical Education Teachers PET) के माध्यम से फायदे देने में जुटा हुआ है।

फिज़िकल लिट्रेसी फॉर नेशन डेवलपमेंट के वेबिनार में इस 46 वर्षीय पूर्व खिलाड़ी ने कहा “कोई सिस्टम PET को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। अगर भारत को एक स्पोर्टिंग नेशन बनना है तो PET का सहारा लेना ज़रूरी क्योंकि यह एक मुख्य भूमिका निभाता है। यह प्रक्रिया स्कूल लेवल से ही बच्चों को पोलिश करती है और अगर भारत ने इसे अपनाया तो वे ऐसा करने वाला पहला देश बन सकता है।

उन्होंने आगे कहा “किसी भी खेल के महत्व को बढ़ाने में PET एक महत्वपूर्ण किरदार अदा करता है और यह फिज़िकल लिट्रेसी के लिए भी अच्छा है। किसी भी ग्रुप के लिए शारीरिक गतिविधि का कोई विकल्प नहीं है।”

इस सेशन का हिस्सा डॉ. मार्गरेट व्हाइटहेड (Dr Margaret Whitehead) भी थी और उन्होंने भी गोपीचंद की राय से सहमति जताई। ग़ौरतलब है कि डॉ. मार्गरेट व्हाइटहेड को मॉडर्न फिज़िकल लिट्रेसी की ‘मदर’ कहा जाता है।

'राष्ट्र के विकास में फ़िज़िकल साक्षरता अहम', इस विषय पर हुए वेबिनार को संबोधित करते हुए पुलेला गोपीचंद
'राष्ट्र के विकास में फ़िज़िकल साक्षरता अहम', इस विषय पर हुए वेबिनार को संबोधित करते हुए पुलेला गोपीचंद'राष्ट्र के विकास में फ़िज़िकल साक्षरता अहम', इस विषय पर हुए वेबिनार को संबोधित करते हुए पुलेला गोपीचंद

WHO कोलैबोरेटिंग सेंटर फ़ॉर पॉलिसि रिसर्च ऑन सोशल डिटरिमिनंट्स के हेड ने बताया कि किसी भी देश को ज़मीनी स्तर पर PET शुरू करना चाहिए और स्कूल में शारीरिक शिक्षा पर बेहतर ध्यान देना चाहिए।

गोपीचंद के सवाल का जवाब देते हुए डॉ. व्हाइटहेड ने कहा “युवा बच्चों को खेल, योग और डांस से जुड़ी सभी चीज़ें मुहैया करानी चाहिए। फिज़िकल लिट्रेसी का ओलंपिक मूवमेंट पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा। शारीरिक साक्षरता एक भाव है, यह एक ख़ुशी है जिसे बढ़ावा मिलना चाहिए।

धीमी प्रक्रिया के फ़ायदे अनेक

डॉ. व्हाइटहेड का संदर्भ यह था कि एक कार्य में समय तो लगेगा ही लेकिन धीरे-धीरे हम उंचाईयों तक पहुंच सकते हैं। इससे जुड़ी चुनौतियों पर डॉक्टर ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया “आपको विश्वास रखना होगा और यह जानना होगा कि यह प्रक्रिया एक दम से नहीं बढ़ सकती। इसके लिए एक प्लान की ज़रूरत होगी और उसके बाद इसे बढ़ाया जाएगा। आपको प्रतिभागियों से फीडबैक लेकर धीरे-धीरे कदम बढ़ाने होंगे।”

पुलेला गोपीचंद और डॉ. व्हाइटहेड का मानना है कि आज के समाज में जहां कोरोना वायरस (COVID-19) जैसी चीज़ें जगह बना रही है और साथ ही इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स अपने पांव फैला रहे हैं तो ऐसे में शारीरिक शिक्षा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

डॉ. मार्गरेट व्हाइटहेड ने तो यह भी कहा कि, “माता पिता को नज़र रखनी चाहिए कि उनके बच्चे लैपटॉप जैसी चीज़ों के साथ कितना समय बिता रहे हैं ताकि वे शरीर से जुड़े लाभों पर भी काम कर सके।”

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