जोड़ीदार के साथ अच्छा रिश्ता खेल के नतीजों को भी अच्छा करता है: अश्विनी पोनप्पा 

भारतीय शटलर अश्विनी पोनप्पा का मानना है कि अपने जोड़ीदार के साथ कोर्ट के बाहर का रिश्ता महत्वपूर्ण होता है।

भारतीय बैडमिंटन की युगल खिलाड़ी अश्विनी पोनप्पा (Ashwini Ponnappa) का नाम खेल जगत में अदब और तहज़ीब से लिया जाता है। उनका मानना है कि अगर एक खिलाड़ी को लंबा करियर चाहिए तो उन्हें बदलते समय के साथ खुद को ढालना ज़रूरी है।

इन्स्टाग्राम लाइव के दौरान भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री (Sunil Chhetri) के साथ हुई बातचीत में पोनप्पा ने कहा “युगल खिलाड़ी होने के नाते आप एक तरह का माइंडसेट नहीं रख सकते क्योंकि आपको एक ही जोड़ीदार मिलेगा और उसी के साथ आपको आगे बढ़ना है।”

उन्होंने आगे कहा “एक समय ऐसा आता है जब आप अच्छा कर रहे होते हैं और सब कुछ आपके पक्ष में जा रहा होता है। फिर आप बदल जाते हैं, आप अपना पार्टनर बदल लेते हैं फिर सब कुछ नया हो जाता है। नए जोड़ीदार के साथ दोबारा से तालमेल बैठाना होता है और फिर एक दिन वह भी बदल जाता है।”

कोरोना वायरस (COVID-19) के चलते पोनप्पा इस समय बेंगलुरु में अपने घर पर हैं। इस 30 वर्षीय खिलाड़ी ने इस बात को भी स्वीकार किया कि अपने करियर में उन्होंने बहुत से दिग्गज खिलाड़ियों के साथ खेला है और कोर्ट के बाहर बने रिश्तों से उनको खेल में भी सफलता मिली है।

2011 वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में ज्वाला गुट्टा (Jwala Gutta) के साथ ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वाली इस खिलाडी ने आगे कहा "बिलकुल (यह मायने रखता है)। आप एक साथ बहुत ट्रैवल करते हैं और काफी बार आप अपने साथी के साथ नहीं रहते। कोर्ट के बाहर आपका आपके पार्टनर के साथ रिश्ता अच्छा होना बहुत ज़रूरी है। अगर ऐसा नहीं होता तो आप कितनी भी मेहनत कर लें आपके लिए एक जुट हो कर खेलना बहुत मुश्किल हो जाएगा।”

कोर्ट के बाहर दोस्ती करने से भी ज़्यादा अहम समान महत्वाकांक्षा और मकसद रखना होता है। अगर ऐसा नहीं है तो आपकी दोस्ती आपके खेल को कहीं भी नहीं ले जा सकती। आखिर में दो लोग एक साथ जीतते हैं और आप अकेले कुछ नहीं कर सकते। हमेशा आपका और आपके पार्टनर का सहयोग होता है।”

बदलाव अनिवार्य है !

बैडमिंटन के खेल में जोड़ी की बात की जाए तो पोनप्पा-ज्वाला की जोड़ी को दर्शकों ने बहुत सराहा था। इस जोड़ी ने देश को एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और उबेर कप में जीत दिलाई है, इन दोनों का साथ मानो देखते ही बनता है।

रियो गेम्स के बाद जब ज्वाला ने पीछे हटने का फैसला लिया तो मजबूरन पोनप्पा को अपना साथी बदलना पड़ा और फिर से एक बार नए खिलाड़ी के साथ लय खोजनी पड़ी।

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सुनील छेत्री से बातचीत के दौरान इस भारतीय शटलर ने बताया “आपको इस बात का बुरा नहीं लगना चाहिए। बदलाव अनिवार्य है, आपको बदलाव को सहमति देना ज़रूरी है। यह बुरी चीज़ नहीं है, आप अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं अगर फिर भी वह काम नहीं करता तो वह काम नहीं करता, और ऐसा होना ठीक है। एक खिलाड़ी की हैसियत से आपका जीवन छोटा है और आपको यह हमेशा याद रखना चाहिए। कभी कुछ निर्णय लेने मुश्किल होते हैं, लेकिन अगर आपको वह निर्णय लेने हैं तो लेने हैं।

”भारतीय युगल बैडमिंटन के खेमे को फिलहाल एक कोच की भी ज़रूरत है। पिछले साल फ़्लैनडी लिमपेल (Flandy Limpele) के पद को छोड़ने के बाद यह स्थान अभी तक भरा नहीं है। इसी के चलते पोनप्पा ने भी कोच की मांग करते हुए कहा “यह बहुत महवपूर्ण है सुनील”। वे जानती हैं की एक कोच का साथ होने का एक खिलाड़ी पर क्या प्रभाव पड़ता है और वे कैसे अपने परिणामों को बदल सकता हकोच दोनों खिलाड़ियों के बीच एक ब्रिज की भूमिका अदा करता हैइस दिग्गज खिलाड़ी ने आगे कहा “आखिरकार यह आपका करियर है, यहां बस दो लोग हैं, मैं और मेरा जोड़ीदार। ऐसे में एक कोच की भूमिका अहम है। अगर कभी पार्टनर्स में सोच न मिले या खेल में अंतर दिखाई दे, तो कोच ही वह शख़्स होता है जो बीच का रास्ता निकाल कर देता है। वह टीम को जोड़े रखने के लिए एक ग्लू की तरह काम करता है।

अश्विनी पोनप्पा ने कार्य के पीछे के मकसद पर भी ज़ोर डाला। उनका मानना है कि खेल के दौरान किसी भी रणनीति के पीछे का मकसद जानना बहुत ज़रूरी होता है और अगर आपको यह मकसद पता है तो आप लय के साथ खेलते चले जाते हैं।

अश्विनी पोनप्पा ने आगे कहा “अगर आपका संबंध आपके कोच के साथ अच्छा नहीं है तो आप कितनी भी ट्रेनिंग करे, वह किसी मकसद से नही जुड़ी होगी। आपको अपने कोच पर भरोसा रखना ज़रूरी होता है। हमेशा एक मकसद के साथ काम करो और काम करते समय आपको पता होना चाहिए कि यह काम आप क्यों कर रहे हैं। यहां पर कोच की भूमिका बढ़ जाती है।”

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