ज्वाला गुट्टा की नज़रों से जानिए क्यों हैं पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 लिन डान दूसरों से अलग और ख़ास

चीन के लिन डान ने ली चोंग वेई को दो बार ओलंपिक फ़ाइनल में मात दी है और उनके खेल को समझाते हुए भारतीय बैडमिंटन स्टार ज्वाला गुट्टा ने उन्हें एक समझदार खिलाड़ी बताया।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

भारतीय दिग्गज बैडमिंटन स्टार ज्वाला गुट्टा (Jwala Gutta) ने पूर्व विश्व नंबर 1 लिन डान (Lin Dan) को मानसिक तौर पर बहुत सुलझा हुआ और मज़बूत बताया और यह भी कहा कि यही उनमें और मलेशिया के ली चोंग वेई (Lee Chong Wei) के बीच बड़ा फर्क है ।

यह दोनों दिग्गज अपने करियर में 40 बार एक दूसरे के खिलाफ खेले हैं, जिनमें 15 सेमी-फाइनल, 22 फाइनल और 2 ओलंपिक गोल्ड मेडल मैच हैं (2008 और 2012)। गौरलतब है कि लिन डान ने 28 बार बाज़ी बारी मारी है।

बात करें अगर ली चोंग वेई की तो रियो 2016 के सेमी-फाइनल मुकाबले में उन्होंने लिन डान को मात देते हुए अपने कारवां को आगे बढ़ाया था। बैडमिंटन के खेल में बहुत मेहनत और तकनीक लगती है और इसी तकनीक और मेहनत का इस्तेमाल करते हुए चीनी लिन डान ने मलेशिया के ली चोंग वेई के खिलाफ दो बार ओलंपिक गोल्ड मेडल और एक बार वर्ल्ड चैंपियन फाइनल मुकाबला जीता है।

भारतीय महिला शटलर ज्वाला गुट्टा का मानना है कि बड़े मुकाबले में लिन डान मानसिक रूप से अच्छे हैं और इसलिए वह बड़े स्टार हैं। गुट्टा ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा “यह हमेशा मेरे दिमाग़ में था। ली चोंग वेई ने लिन डान को बहुत बार हराया है लेकिन जब बात बड़े मुकाबलों की आती है तो लिन डान की मानसिक शक्ति में एक अलग ही बदलाव दिखता है।”

“ली चोंग बाकी खिलाड़ियों से ज़्यादा समझदार हैं लेकिन लिन डान के आगे ज़रा हलके पड़ जाते हैं। आधी स्टेमिना आपका वहीं ख़त्म हो जाती है जब आप डर जाते हैं या बेचैन हो जाते हैं।”

लिन डान की सफलता ही उनकी मानसिक और शिरिक ताकत को दर्शाती है। 

 चैंपियन तो बहुत हैं लेकिन दिग्गज कम

बीजिंग 2008 में लिन डान ने ली चोंग वेई को 21-12, 21-8 से सीधे सेटों में मात दी थी लेकिन 2012 लंदन गेम्स में ली चोंग वेई बहुत नज़दीक आगए थे लेकिन वह अच्छा खेलने के बावजूद 21-15, 21-10, 21-19 से हार गए। 

यह दोनों खिलाड़ी वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में भी दो बार एक दूसरे अ आमना सामना कर चुके हैं। गौरतलब है कि ऐसा 2011 और 2013 में किया था। ज्वाला गुट्टा ने उन पलों को याद कर अपनी टिप्पणी दी।

“मेरे हिसाब से लिन डान ज़्यादा समझदार खिलाड़ी हैं। उनको पता है कि उन्हें अपनी एनर्जी कब बचाने है और अपने प्रतिद्वंदी को कैसे भगाना है। वह सच में कोर्ट पर वॉक करते हैं। आप कोर्ट पर तब तक वॉक नहीं कर सकते जब तक आपको पता न हो कि आपका विरोधी कोर्ट के किस हिस्से पर रिटर्न देने लगा है।”

गुट्टा ने आगे अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “देखने वालों को यह सख़्त लग सकता है लेकिन वह समझदारी थी। चैंपियंस तो बहुत हैं लेकिन लीजेंड बहुत कम हैं।

सर्वश्रेष्ठ है ये खिलाड़ी

चीन से ताल्लुक रखने वाली ज्वाला गुट्टा की माँ की वजह से ज्वाला ने शुरू से ही बैडमिंटन के खेल को समझा है और उसमे रूचि दिखाई है और उन्हें समय समय पर काबिलियत भी हासिल हुई है।

2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली गुट्टा ने आगे कहा “मुझे याद है जब मैंने चीनी टीम के साथ समय बिताया। वह रोबोट थे और वह आज भी हैं। उनका फुटवर्क, खेलने का तरीका, ट्रेनिंग, लेंथ, कोर्ट पर स्वभाव और बाकी सब चीज़ें एक जैसी हैं।”

“लेकिन लिन डान शुरुआत से ही उनसे अलग थे। वह आक्रामक, स्टाइलिश खिलाड़ी थे और वह आप जानते हैं। उनके हिसाब से वह बेस्ट थे।”

गौरतलब है कि लिन डान ने इसी महीने की शुरुआत में संन्यास का ऐलान कर अपने 20 सालों का सुनहरा करियर पूरा किया है जहां उन्होंने 666 सिंगल्स मुकाबले जीते हैं।