एचएस प्रणॉय को उम्मीद, भारतीय स्पोर्ट्स में बढ़ेगी मनोवैज्ञानिक की भूमिका

थाईलैंड में कठिन समय से गुजरने के बाद भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी एचएस प्रणॉय को लगता है कि भारतीय स्पोर्ट्स में अब खिलाड़ियों की मानसिक ताकत पर भी ध्यान दिया जाएगा।

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

भारतीय शटलर एचएस प्रणॉय (HS Prannoy) को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारतीय खेल एथलीटों के मानसिक स्वास्थ्य में निवेश करने की सुविधा के साथ खेल मनोवैज्ञानिक जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

28 वर्षीय शटलर, जिन्होंने इस महीने थाईलैंड में होने वाले आयोजनों में एशियन स्विंग ऑफ इवेंट से वापसी की है, उन्होंने स्पोर्ट्स लॉ एंड पॉलिसी सेंटर द्वारा आयोजित एक वेबिनार में अपना अनुभव साझा किए।

भारतीय खिलाड़ी के अनुसार बायो-बबल की स्थिति से निपटना आसान हो सकता था, अगर उनके पास अपने विचारों को साझा करने के लिए कोई है।

भारतीय शटलर ने कहा, "काश, मेरे पास कोई होता जिससे मैं बात कर पाता ताकि मैं मैच से पहले शांत हो जाऊं और चीजों पर ध्यान केंद्रित कर सकूं।"

इसके अलावा उन्होंने कहा कि "बायो बबल में रहने के दौरान सोशल मीडिया और इधर-उधर की बातों पर ध्यान जाता है, जिससे आपको ध्यान भटक सकता है और इसी स्थिति में मनोवैज्ञानिक की भूमिका बढ़ जाती है।"

प्रणॉय ने आगे बात करते हुए कहा कि "मुझे उम्मीद है कि अगले पाँच वर्षों में, हमारे पास एक ऐसी संरचना होगी जहाँ खिलाड़ियों को एक खेल मनोवैज्ञानिक की सेवाएँ मिलेंगी क्योंकि क्या पता जो खिलाड़ी 30-40 की रैंकिंग में है और इस संरचना की मदद से वह टॉप 10 में पहुंच जाए।"

बैंकॉक में भारतीय खिलाड़ी को कड़े क्वारंटाइन नियमों से गुजरना पड़ा था और इस दौरान उन्हें केवल कमरे और ट्रेनिंग एरिया में जाने की इजाजत थी। इसके अलावा उन्हें सामान्य क्षेत्रों का उपयोग करने की अनुमति भी नहीं थी।

प्रणॉय के लिए ये कुछ ऐसा था, जिसका उन्हें बिल्कुल अनुभव नहीं था।

अपने उस अनुभव को याद करते हुए प्रणॉय ने बताया कि “वह स्थिति मेरे लिए बिल्कुल नई थी, ये पहली बार था, जब हम बायो-बबल में थे। हमे कुछ नहीं पता था कि आखिर ये सब क्या हो रहा है। दो हफ्ते तक आप अपने रूम से बाहर नहीं निकल सकते, हमे केवल प्रैक्टिस पर जाने की इजाजत थी। आप वहां भी मेन हॉल से सीधे बस में बढ़ते थे, यहां तक की हमे स्टेडियम के बाहर घुमने की भी इजाजत नहीं थी।”

भारतीय स्टार ने कहा कि “3-4 दिनों के बाद, आप मानसिक रूप से कमजोर महसूस करने लगते हैं। आपको लगता है कि आप धूप में नहीं निकल सकते। आप सिर्फ 22 घंटे के लिए कमरे में बैठते हैं, क्योंकि हम केवल दो घंटे के लिए प्रशिक्षण ले रहे थे। आप अपनी टीम के साथियों से नहीं मिल सकते। यह एक बुरा सपना था और छह दिनों के बाद ये मेरे ऊपर हावी हो रहा था। मैं समझ नहीं पा रहा था कि इसे कैसे संभालूं।”

थाईलैंड में एचएस प्रणॉय का कोरोना एपिसोड

प्रणॉय की साइना नेहवाल (Saina Nehwal) के साथ कोरोना आरटी-पीसीआर रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी, जिसका नुकसान उन्हें योनेक्स थाईलैंड ओपन (Yonex Thailand Open) से अपना नाम वापस लेकर उठाना पड़ा। इसके बाद दोनों ही खिलाड़ी तो एंटीबॉडी आईजीजी टेस्ट करवाना पड़ा।

भारतीय खिलाड़ी ने कहा कि “यह सबसे बुरे दिनों में से एक था क्योंकि सुबह से रात तक, हम अस्पताल में थे। कोई संचार नहीं था, हमें बताया गया था कि हमें 10 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रहना होगा। हमारी प्रविष्टियाँ (एंट्री) वापस ले ली गईं लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि हम जाने के लिए स्वतंत्र थे।"

“कल्पना कीजिए, रात में 9:30 बजे अस्पताल से वापस आ रहे हैं, और अगले दिन आपका एक मैच है और फिर सुबह, आपको बताया जाता है कि मैच शाम को स्थानांतरित कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में, आपको इन सभी चीजों को साझा करने के लिए किसी की आवश्यकता होती है, क्योंकि एक पेशेवर खिलाड़ी के रूप में आपको बस खेलना आता है, आपको ये नहीं पता होता कि इस स्थिति से कैसे निकले।"

हालांकि इसके बाद प्रणॉय का एशियन स्विंग ऑफ इवेंट कुछ खास नहीं रहा और योनेक्स थाईलैंड ओपन में उन्हें पहले राउंड में बाहर होना पड़ा और फिर टोयटा थाईलैंड ओपन (Toyota Thailand Open) में उनका सफर दूसरे राउंड में खत्म हो गया