अपनी खोई हुई पोज़ीशन को हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे किदांबी श्रीकांत  

तीन साल पहले विश्व नम्बर-1 खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत चोट से उबरने के बाद डेनमार्क ओपन बैडमिंटन से वापसी करेंगे।

लेखक रितेश जायसवाल ·

2017 में चार बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) टूर खिताब के साथ और दुनिया में नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी का ताज अपने नाम कर चुके किदांबी श्रीकांत (Kidambi Srikanth) इस महानता के शिखर तक पहुंचने के दौरान काफी किस्मती नज़र आए।

हालांकि, लगातार कई चोटों के चलते भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी को बीते कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर फिर से उसी शानदार खेल को दोहराने के लिए संघर्ष करते हुए देखा गया।

कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के बढ़ते प्रकोप के चलते बैडमिंटन की दुनिया पर विराम लग गया। आंध्र प्रदेश के गुंटूर के इस शटलर ने इस विराम का अच्छा इस्तेमाल किया और अब वह प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

टोक्यो 2020 वेबसाइट को दिए एक इंटरव्यू में श्रीकांत ने कहा, “पिछले छह महीनों में मुझे अपने शरीर पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिला और शारीरिक रूप से मैं अच्छा महसूस कर रहा हूं। अब यह सिर्फ कुछ टूर्नामेंट खेलने के बारे में है और मुझे समझ आ जाएगा कि मैं कहां खड़ा हूं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं 2017 में वास्तव में अच्छा खेल रहा था और खेल में चोटों के बारे में आप पहले से कुछ नहीं कह सकते हैं, और यहां तक कि अगर आप फिट होकर वापसी करते हैं तो यह तब तक पर्याप्त नहीं होता है जब तक कि आप टूर्नामेंट नहीं जीतते हैं।”

ग़ौरतलब है कि 2017 की सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में किदांबी श्रीकांत को घुटने में चोट लगी थी। हालांकि वह जल्द ही कोर्ट पर वापस लौट आए थे, लेकिन खासतौर पर उनके टखने पर थोड़ी समस्या की वजह से उनका प्रदर्शन प्रभावित होता रहा।

प्रकाश पादुकोण के बाद किदांबी श्रीकांत दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी होने का दावा करने वाले मात्र दूसरे भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।

श्रीकांत का मानना है कि कोर्ट पर वापसी करने की उनकी भूख उन्हें लंबे समय तक चलने में फायदेमंद साबित हो सकती है।

27 वर्षीय किदांबी ने समझाया, "बैडमिंटन एक ऐसा खेल है जिसमें चोटों से वापसी करना और फिर तुरंत खिताब जीतना मुश्किल है। मुझे लगता है कि मैंने चोट लगने के बाद वापसी करने में थोड़ी जल्दबाज़ी की और अपने शरीर को ठीक होने के लिए उचित समय नहीं दिया। जिसने स्वाभाविक तौर पर मेरे प्रदर्शन को प्रभावित किया।”

उन्होंने आगे कहा, “जब घुटने की चोट की बात आती है, तो वापसी करना वास्तव में कठिन होता है क्योंकि यह आपके खेल का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कोर्ट में क्या करते हैं, लेकिन आपके घुटने लगातार हिल रहे होते हैं।

"यहां तक कि जब आप कूदते हैं, तो इसका मतलब है कि आपके घुटनों पर बहुत अधिक दबाव पड़ना है। क्योंकि अंक जीतने के लिए आक्रामक होने की आवश्यकता होती है।"

हालांकि, टोक्यो ओलंपिक अब काफी करीब है, ऐसे में किदांबी श्रीकांत जल्द से जल्द अपनी खोई हुई फॉर्म और पोज़ीशन को वापस पाने के लिए आश्वस्त हैं।

अगले महीने 2020 डेनमार्क ओपन से अपनी वापसी करने जा रहे किदांबी श्रीकांत ने कहा, “मैं पहले से ही वहां पहुंच गया हूं, इसलिए मुझे निश्चित तौर पर पता है कि मैं इसे फिर से कर सकता हूं। मैं हर हाल में 2017 में खोई हुई अपनी फॉर्म को फिर से हासिल करना चाहता हूं और शायद खुद को भी बेहतर कर सकता हूं।”

शीर्ष तक पहुंचने का सफर अभी काफी लंबा है लेकिन श्रीकांत का दृढ़ विश्वास भी कुछ कम नहीं है। यह बस उनके शरीर के साथ देने पर निर्भर करेगा।