भारतीय स्टार शटलर्स ने दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी लिन डैन की लोकप्रियता और शानदार करियर की सराहना की

जहां पारुपल्ली कश्यप ने अपने करियर में तीन बार लिन डैन का सामना किया है, वहीं एचएस प्रणॉय ने पांच मौक़ों पर चीन के इस ओलंपियन और विश्व चैंपियन का सामना किया है।

शनिवार को पूर्व विश्व नंबर 1 और बैडमिंटन के दिग्गज खिलाड़ी लिन डैन (Lin Dan) ने अपने संन्यास की घोषणा कर दी, जिसके बाद भारतीय शटलर पारुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap) और एचएस प्रणॉय (HS Prannoy) ने चीनी बैडमिंटन खिलाड़ी की प्रशंसा की।

दो बार के ओलंपिक और पांच बार के विश्व चैंपियन ने 20 साल के अपने करियर में 666 सिंगल्स मैच जीते हैं और पदकों की ढेर लगाई है।

छह बार के ऑल इंग्लैंड ओपन चैंपियन के बारे में पारपल्ली कश्यप ने कहा कि लिन डैन खेल के महानतम खिलाड़ियों में से एक थे।

पारुपल्ली कश्यप ने ओलंपिक चैनल को बताया, "वो एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी है और बैडमिंटन की दुनिया में सबसे अधिक लोकप्रिय हैं।"

पारुपल्ली कश्यप ने कहा कि, "मेरे हिसाब से वो इतनी उपलब्धियों को हासिल करने वाले सबसे अच्छे खिलाड़ी रहे हैं।"

कश्यप ने अपने करियर में तीन बार लिन डैन का सामना किया है- पहली बार उन्होंने 2011 में सुदीरमन कप में उनका सामना किया, उसी साल हांगकांग ओपन में फिर उनके खिलाफ खेलने का मौका मिला और 2019 ऑस्ट्रेलियन ओपन में - सभी मौकों पर चीनी खिलाड़ी को जीत मिली।

इस परिणाम के बावजूद, 2014 राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता कश्यप के लिए लिन डैन एक प्रेरणा थे।

पारुपल्ली कश्यप ने कहा, 'मैच के दौरान जिस तरह से वो खेलते हैं, वो एक अलग की क्लास है और जिस तरह से वो आगे बढ़ते हैं और जिस तरह से वो खेलते हैं, उससे पता चलता है कि वो किस क्लास के खिलाड़ी हैं। शायद वो अब तक के सबसे अच्छे खिलाड़ी हैं।”

“वो मेरे खेल की आइडल थे। मुझे उनके परिणामों से प्रोत्साहन मिला और मैं उनकी तरह खेलना चाहता था।”

शानदार खेल की वजह से मिला सुपर डैन का नाम

उनके शानदार खेल की वजह से उऩका निकनेम ‘सुपर डैन’ पड़ गया। लिन डैन ने हमेशा खुद के आत्म विश्वास पर भरोसा किया है। ये बात उनके विरोधियों के साथ-साथ दुनिया भर में प्रशंसकों भी पता है।

भारतीय शटलर एचएस प्रणॉय ने पांच बार लिन डैन का सामना किया और तीन बार जीत हासिल की है। उन्होंने माना कि चीनी दिग्गज के रवैये ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया है।

एचएस प्रणॉय ने ओलंपिक चैनल को बताया कि, “लिन डैन की एक अलग ही पहचान थी, वो कोर्ट में बिल्कुल अलग अंदाज से आया करते थे। जो किसी औऱ के पास नहीं था।”

"वो मानते थे कि वो दुनिया के सबसे अच्छे खिलाड़ी थे और कोई भी उन्हें हरा नहीं सकता। मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं।”

इतनी सारी उपलब्धियों के अलावा, लिन डैन ने बैडमिंटन जैसे खेल में अपने लंबे करियर की वजह से सभी को प्रभावित किया।

2001 में एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप में सीनियर प्रोफेशनल सर्किट में पदार्पण करते हुए, लिन डैन ने सभी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया।

एचएस प्रणॉय का मानना ​​है कि ये लिन डैन को खेल से प्यार की वजह से ही संभव हो पाया था।

भारतीय शटलर ने कहा कि, “मुझे लगता है कि वो एक कैलेंडर वर्ष में किसी भी एक टूर्नामेंट से नहीं चूके हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने सभी बड़े टूर्नामेंट्स में दो बार जीत हासिल की है।”

उन्होंने आगे कहा कि, “ऐसा कुछ करने के लिए, आपको अतिरिक्त कोशिश करने की आवश्यकता होती है। लिन डैन अपने खेल से बहुत प्यार करते थे, जिसने उन्हें अब तक सबसे आगे रखा।

उन्होंने कहा, "वो हमेशा सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करना चाहते थे और अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहते थे।"

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