पीवी सिंधु अपने विश्व खिताब को साल 2022 तक रख सकती हैं बरक़रार

भारत की शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने 2019 में विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता और 2022 तक विश्व चैंपियनशिप होना मुश्किल नज़र आ रहा है। ऐसे में वह अगले संस्करण तक विश्व विजेता बनी रह सकती हैं।

COVID-19 महामारी की वजह से दुनियाभर में बहुत सारी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। इससे विश्व बैडमिंटन जगत के सभी इवेंट भी प्रभावित हुए हैं। मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु के लिए एक अच्छी खबर है। अगर मौजूदा हालात के अनुसार ही चीज़ें आगे बढ़ीं तो पीवी सिंधु (PV Sindhu) 3 वर्ष तक वर्ल्ड चैंपियन बनी रह सकती हैं।

सिंधु 2019 में वर्ल्ड चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय बनीं। उन्हें 2021 में इस खिताब की रक्षा करने के लिए वर्ल्ड चैंपियनशिप में उतरना था, लेकिन फिलहाल ऐसा होता नज़र नहीं आ रहा है। दरअसल, ओलंपिक खेलों को इस वर्ष जापान के टोक्यो में होना था, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से अब टोक्यो 2020 को अगले साल जुलाई, 2021 में आयोजित किया जाएगा।

विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन द्वारा आयोजित किया जाने वाला एक वार्षिक इवेंट है, जिसमें हर साल पांच श्रेणियों में से प्रत्येक श्रेणी में विश्व चैंपियनशिप का ताज़ कोई एक शटलर जीतता है। हालांकि, ओलंपिक वर्ष में इस चैंपियनशिप को आयोजित नहीं किया जाता है। अब क्योंकि कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से टोक्यो ओलंपिक को साल 2021 तक के लिए टाल दिया गया है। इसलिए हो सकता है कि इस प्रतियोगिता को 2021 BWF कैलेंडर से हटा दिया जाए।

विश्व खिताब जीतने वाली पहली भारतीय शटलर

2019 में पीवी सिंधु वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बनीं। उन्होंने जापान की नोज़ोमी ओकुहारा के साथ चले 30 मिनट के मुकाबले में एकतरफा जीत दर्ज की। बेसल में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी अपनी शानदार फॉर्म में थीं, क्योंकि वह अपने खिताब को जीतने के सफर में महज एक गेम ही हारी। इस तरह से वह उस सत्र में एक महत्वपूर्ण खिताब अपने नाम करने में सफल रहीं।

क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड नम्बर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी ताई त्ज़ु यिंग के खिलाफ पीवी सिंधु पहला मैच हारने के बाद बाकी दोनों मैच जीतने में सफल रहीं।

रियो डी जेनेरो में 2016 ओलंपिक में रजत पदक विजेता पीवी सिंधु हालांकि फ्रेंच ओपन सुपर 750 इवेंट में क्वार्टर-फाइनल तक उस फॉर्म को बरकरार रखने में असफल रहीं। वर्ल्ड चैंपियनशिप का उनका प्रदर्शन ही सर्वश्रेष्ठ रहा।

भारतीय बैडमिंटन शीर्ष खिलाड़ी अब अपनी खराब फॉर्म में सुधार करने के लिए काफी उत्सुक होंगी। बैडमिंटन खेलों के शुरू होते ही वह टोक्यो ओलंपिक खेलों के लिए अपनी तैयारी जारी रखेंगी और खुद को बेहतर फॉर्म में रखने की कोशिश करेंगी।

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!