पुलेला गोपीचंद की एक सलाह ने एन सिक्की रेड्डी के करियर को बचा लिया

पूर्व विश्व नंबर 1 शटलर की सलाह ने बैडमिंटन के दिग्गज खिलाड़ी को देश का सर्वश्रेष्ठ डबल्स खिलाड़ियों में से एक बना दिया।

एन सिक्की रेड्डी (N. Sikki Reddy) बैडमिंटन कोर्ट पर खेलने के बजाय अदालत में बहस कर रही होतीं, एक चोट के कारण एक दशक पहले उनका खेल करियर समाप्त हो गया होता।

लेकिन इस शटलर ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में एक स्वर्ण और एक कांस्य सहित खेल में कई पदक जीते, जो उनके आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

इन सब के लिए पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand) का धन्यवाद, जिनकी सलाह और मार्गदर्शन ने 2010 में एशियाई चैंपियनशिप के दौरान तत्कालीन 16 वर्षीय बैडमिंटन खिलाड़ी को चोट लगने के बाद उनके बैडमिंटन करियर को बचा लिया।

इंस्टाग्राम लाइव में साथी बैडमिंटन खिलाड़ी संजना संतोष (Sanjana Santosh) के साथ बातचीत में सिक्की रेड्डी ने कहा, “मैं रत्चानोक इंतानोन (Ratchanok Intanon) के साथ खेल रही थी और गेम 1-1 से बराबर था। तीसरे गेम में स्कोर 7-7 था और मैंने अपने घुटने को बहुत बुरी तरह से घुमा दिया।”

“जब मैं डॉक्टर के पास गई, तो उन्होंने कहा कि मैं अब बैडमिंटन नहीं खेल सकती। मैं सचमुच रोने लगी।”

सबसे कठिन समय के दौरान पुलेला गोपीचंद और उनके परिवार ने पूर्व राष्ट्रीय चैंपियन की मदद की और उन्हें पॉजिटिव रखने की कोशिश की।

26 वर्षीय शटलर ने बताया, “मैं अपने परिवार और गोपी सर और अपने दोस्तों और भाई की शुक्रगुज़ार हूं। सभी ने ये कहते हुए मेरा समर्थन किया, सिक्की तुम हार नहीं मान सकती। बस अपनी सर्जरी के लिए जाओ और ठीक होकर आओ रिहेब के लिए जाओ। हम देखेंगे कि ये कैसे होता है।''

एक सलाह, जिसने बदल दी ज़िंदगी

हालांकि चोट से लौटने के बाद सिक्की रेड्डी उस फॉर्म को फिर से जिंदा नहीं कर सकीं, जिसने उन्हें जूनियर में टॉप पर पहुंचने में मदद की थी। इसके अलावा उनका शरीर भी सिंगल्स प्रतियोगिताओं में उनका साथ नहीं दे रहा था, या ये कहें कि वो सिंगल्स में जूझ रही थीं।

ये उस कठिन दौर के दौरान हो रहा था, जिसके बाद पुलेला गोपीचंद ने उन्हें सलाह दी कि वो करियर को आगे बढ़ाने के लिए इसमें बदलाव करें।

26 वर्षीय ने कहा, "मैं वापस आ गई और सिंगल्स खेलना शुरू कर दिया, लेकिन फिर से मुझे कुछ चोटें आईं, जिससे मैं सही तरीके से नहीं निपट सकी। फिर गोपी सर और मैं एक केबिन में बैठे और उन्होंने पूछा कि मैं डबल्स क्यों नहीं खेलती। चलों देखते हैं इसमें कैसे खेल रही हो।”

सिक्की रेड्डी ने डबल्स पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया और जल्द ही एक साथी के साथ खेलने की आदी हो गई। डबल्स मुक़ाबलों में उनके शरीर पर कम बोझ पड़ता था और उसका करियर तब से अब तक पटरी पर है।

उन्होंने बताया कि अगर वो बैडमिंटन नहीं खेल रही होतीं तो वो कोर्ट में दलील पेश कर रही होतीं।

उन्होंने बाद में कहा, "यहां तक कि मेरे माता-पिता का कहना था कि मैं वकील बन सकती हूं।"

2013 में प्रज्ञा गद्रे (Pradnya Gadre) के साथ टाटा ओपन और बहरीन इंटरनेशनल जीतने के बाद, रेड्डी ने महाद्वीपीय प्रतियोगिता में अपना पहला पदक जीता। उन्होंने इंचियोन में 2014 एशियन गेम्स में कांस्य जीता।

उनके करियर का अब तक का सबसे बेहतरीन पल 2018 में आया, जब उन्होंने अश्विनी पोनप्पा (Ashwini Ponnappa) के साथ महिला युगल में कांस्य जीता और ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीता।

उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सिक्की रेड्डी को 2018 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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