बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व और पुलेला गोपीचंद की कोचिंग के कारण भारत में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आ रहे हैं

क्रिकेट के बाद भारत में सबसे लोकप्रिय खेल बैडमिंटन में पिछले कुछ दशकों में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी देखने को मिले हैं।

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

लंबे समय पहले तक भारत को खेलों की दुनिया में ज्यादा ताकतवर नहीं माना जाता था लेकिन पिछले कुछ सालो में लोगों की सोच बदली है। प्रकाश पादुकोण (Prakash Padukone), पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand), सैयद मोदी (Syed Modi) और अपर्णा पोपट (Aparna Popat) के कारण लोगों की सोच में बदलाव आया और भारतीय बैडमिंटन लगातार आगे बढ़ता रहा।

भारत के पहले बैडमिंटन सुपरस्टार

भारत के पहले बैडमिंटन स्टार के रूप में प्रकाश पादुकोण को याद किया जाता है। इस खिलाड़ी ने अपना पहला आधिकारिक मैच कर्नाटक स्टेट जूनियर चैंपियनशिप (Karnataka state junior championship) में साल 1962 में खेला था। इस टूर्नामेंट में भले ही वह जल्दी बाहर हो गए हों लेकिन अंत में भारत के महान बैडमिंटन खिलाड़ी बनें।

प्रकाश पादुकोण ऑल इंग्लैंड ओपन जीतने (All England Open) वाले पहले भारतीय हैं। ये कारनामा उन्होंने साल 1980 में किया था और इसी साल वह दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी भी बने थे। दानिश ओपन (Danish Open) और स्वीडिश ओपन (Swedish Open) जीतने के अलावा इस खिलाड़ी ने साल 1978 के कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) और 1981 वर्ल्डकप (World Cup) में गोल्ड मेडल जीता।

पुलेला गोपीचंद भले ही प्रकाश पादुकोण जितनी सफलता हासिल नहीं कर पाएं हों लेकिन चेन्नई के इस खिलाड़ी ने भी ऑल इंग्लैंड ओपन का खिताब जीता। ऐसा करने वाले वह भारत के दूसरे और आखिरी खिलाड़ी हैं।

साइना नेहवाल का आगमन

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी अपर्णा पोपट और सैयद मोदी ने एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में सफलता जरूर हासिल की लेकिन साइना नेहवाल (Saina Nehwal) के रूप में भारत को प्रकाश पादुकोण के बाद एक महान खिलाड़ी मिली।

इस खिलाड़ी ने साल 2008 बीडबल्यूएफ वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप (BWF World Junior Championships) जीतकर दिखा दिया था कि वह भारत का पुराना दौर वापस लाने के लिए बिल्कुल तैयार हैं। इस खिलाड़ी सीनियर लेवल पर भी अपना नाम बनाने में ज्यादा देर नहीं लगाई और एक साल बाद ही बीडबल्यूएफ इंडोनेशिया ओपन (BWF Indonesia Open) का खिताब जीत लिया।

साल 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने से चूक जाने के बाद साइना नेहवाला का ये सपना 2012 लंदन ओलंपिक में पूरा हुआ। इस खिलाड़ी ने 10 बीडबल्यूएफ सुपर सीरीज टाइटल (BWF Super Series titles), 10 बीडबल्यूएफ ग्रांड प्रिक्स टाइटल (BWF Grand Prix titles) और 1 बीडबल्यूएफ वर्ल्ड टूर टाइटल (BWF World Tour title) ने अपने नाम किए।

साइना नेहवाल अपने पहले कोच पुलेला गोपीचंद की तरह कभी भी ऑल इंग्लैंड ओपन नहीं जीत पाई। साल 2015 में वह फाइनल तक पहुंचने में सफल रही लेकिन खिताब नहीं जीत पाई। फाइनल में पहुंचने के साथ ही वह विमल कुमार (Vimal Kumar) की कोचिंग में दुनिया की नंबर वन खिलाड़ी बन गई थी

पीवी सिंधु के पास 3 BWF सुपर सीरीज खिताब, एक विश्व चैम्पियनशिप, एक विश्व टूर खिताब और छह ग्रैंड प्रिक्स खिताब हैं

पीवी सिंधु का उदय

जब साइना नेहवाल भारत की महान खिलाड़ी बन चुकी थी, जब एक और हैदराबाद की एक शटलर सीनियर लेवल पर सफलता की तरफ कदम बढ़ा चुकी थी। इस खिलाड़ी का नाम है पीवी सिंधु (PV Sindhu)

साल 2010 में बीडबल्यूएफ वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में हारने वाली पीवी सिंधु को असली पहचान मिली साल 2013 में, इस साल इस खिलाड़ी ने मलेशिया ओपन का खिताब जीता। साल 2016 तक यह दुनिया की टॉप बैडमिंटन खिलाड़ी बन चुकी थी।

साल 2016 में वह ना केवल साइना नेहवाल से एक कदम आगे रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने में सफल रही बल्कि इसी साल उन्होंने बीडबल्यूएफ चीन ओपन में उन्होंने दुनिया की टॉप खिलाड़ियों को चुनौती दी।

चार साल बाद इस 24 साल की खिलाडी ने 3 बीडबल्यूएफ सुपर सीरीज, एक बीडबल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप, एक बीडबल्यूएफ वर्ल्ड टूर टाइटल खिताब और 6 बीडबल्यूएफ ग्रांड प्रिक्स टाइटल खिताब अपने नाम कर लिए थे। इसी शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने टोक्यो ओलंपिक का टिकट हासिल कर लिया था।

पुरुष खिलाड़ी इतिहास रचने को तैयार

ऐसा नहीं है कि केवल महिला बैडमिटन खिलाड़ी ही बैडमिंटन एसोशिसन ऑफ इंडिया का नाम पूरी दुनिया में कर रहे हों बल्कि किदांबी श्रीकांत (Kidambi Srikanth), पारुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap), एचएस (HS Prannoy) प्रणॉय और बी साई प्रणीत (B Sai Praneeth ) भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रहे हैं।

जहां पारुपल्ली कश्यप ने साल 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में में शानदार प्रदर्शन कर अपना नाम पूरी दुनिया में किया तो किदांबी श्रीकांत के लिए अपनी काबिलियत दिखाना का मौका 2017 में आया। साल 2016 के ओलंपिक क्वार्टर फाइनल में चीन के महान खिलाड़ी लीन डन(Lin Dan) को हराने के बाद श्रीकांत का नाम पूरी दुनिया में हो गया।

हालांकि साल की शुरुआत में ही साथी खिलाड़ी बी साई प्रणीत ने किदांबी श्रीकांत को पीछे छोड़ते हुए सिंगापोर सुपर सीरीज़ पर कब्ज़ा जमाया था। इसके बाद उन्होंने इंडोनेशिया सुपर सीरीज टाइटल, ऑस्ट्रेलियन सुपर सीरीज टाइटल, डेनमार्क सुपर सीरीज टाइटल और फ्रेंच सुपर सीरीज जीत भारतीय बैडमिंटन में इतिहास रच दिया।

चोट के कारण दुनिया के पूर्व नंबर वन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत को टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। बी साई प्रणीत ने साल 2019 में बीडबल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत ओलंपिक का कोटा हासिल कर लिया था। अब कोरोना वायरस के कारण उनकी उम्मीदों को झटका लग सकता है।

बी साई प्रणीत के टोक्यो ओलंपिक का सपना इसके स्थगित होने से टल गया

पिछले कुछ सालों में भारतीय पुरुष हो या महिला, दोनों वर्ग में ही काफी सुधार देखने का मिला है। इसके अलावा हाल ही में पुरुष युगल जोड़ी सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी (Satwiksairaj Rankireddy) और चिराग शेट्टी (Chirag Shetty) में सुधार भारत के लिए अच्छी खबर है।

जहां पारुपल्ली कश्यप, साइना नेहवाल और किदांबी श्रीकांत टोक्यो ओलंपिक के लिए जूझ रहे हैं, वहीं भारतीय युगल जोड़ी ने साल 2019 ने बीडबल्यूएफ थाईलैंड ओपन जीत ओलंपिक के सफर को कम कर दिया है।

भारतीय टीम के नेशनल कोच पुलेला गोपीचंद जहां एक तरफ भारत में काबिलियत को तराश रहे हैं तो वहीं पीवी सिंधु और चिराग शेट्टी ने भारत की उम्मीद को मजूबत किया हुआ है। वहीं लक्ष्य सेन (Lakshya Sen ) जैसे खिलाड़ी भविष्य में स्टार बनने की उम्मीद दिखा रहे हैं