करियर को सही दिशा देने के लिए जोखिम लेना कभी-कभी ज़रूरी हो जाता है: प्रकाश पादुकोण

भारतीय बैडमिंटन दिग्गज प्रकाश पादुकोण ने अपने करियर में लिए जोखिमों के बारे में चर्चा की।

भारत में खेल और खिलाड़ियों को को काफी ज़्यादा पसंद किया जाता है शुरूआती दौर में प्रशंसक केवल चुनिंदा खेलों की ओर आकर्षित थे। धीरे-धीरे कम प्रसिद्धि वाले खेलों ने भी भारतीय समर्थक जोड़ना शुरू कर दिया और इसमें सबसे ऊपर नाम रहा बैडमिंटन का। बैडमिंटन की दशा बदलने की बात की जाए तो सबसे पहला नाम प्रकाश पादुकोण (Prakash Padukone) का आता है।

प्रकाश पादुकोण ने 1980 का ऑल इंग्लैंड ओपन (1980 All England Open) जीत कर अपने कौशल का प्रमाण पेश किया और फिर दोबारा पीछे मुड़ कर नहीं देखा। इसके बाद 1978 कॉमनवेल्थ गेम्स (1978 Commonwealth Games) में इस भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने गोल्ड मेडल हासिल कर देश के सम्मान में चार चांद लगा दिए। पुरुष वर्ग की बात की जाए तो यह रिकॉर्ड साल 2014 तक इन्हीं के नाम था।
स्टेइंग अहेड ऑफ़ द कर्व – द पॉवर ऑफ़ ट्रस्ट नामक शो में होस्ट नंदन कामथ ने प्रकाश से पूछा कि आप जीवन में रिस्क लेने वाले व्यक्तियों में से हैं या नहीं। इस पर भारतीय बैडमिंटन दिग्गज ने कहा कि “मैं नाप तौल कर ही जोखिम लेता हूं। मैंने अपने स्पोर्टिंग करियर में काफी रिस्क उठाया है।’’

मध्य वर्ग में जन्मे इस खिलाड़ी के परिवार को जोखिम जैसी चीज़ें भाती नहीं थी और वे चाहते नहीं थे कि प्रकाश करियर में किसी भी तरह के जोखिम में आएं। इस दिग्गज ने बातचीत करते हुए आगे कहा “1980 में ऑल इंग्लैंड ओपन जीतने के बाद मुझे डेनमार्क के एक क्लब से खेलने का मौका मिला। उस समय मैं बैंक के सीनियर पद पर था और अगर मुझे डेनमार्क जाना था तो मुझे उस पद को छोड़ना पड़ता।”

64 वर्षीय पूर्व खिलाड़ी ने आगे कहा “1978 और 1980 में जीतने के बाद मुझे प्रमोशन मिल गया था और ऐसे में मेरा परिवार उस नौकरी को छोड़ कर किसी भी अनिश्चितता भरे खेल को खेलने के हक में नहीं थे। उस समय मैंने नपा तुला रिस्क लिया।”

उन्होंने आगे कहा “उस समय तक मैंने 7 से 8 नेशनल टाइटल जीत लिए थे तो ऐसे में डेनमार्क में खेलना मेरे लिए टॉप पर आने का भी मौका था।”

कोर्ट के अनुभव ने इस शटलर को बहुत कुछ सिखाया लेकिन वह नहीं कहते कि जिस पथ का पालन उन्होंने किया वही सबको करना है। प्रकाश पादुकोण ने अपना अनुभव साझा करते हुए आगे कहा “मैं लोगों को सतर्क रहने को कहता हूं और कम जोखिम लेने की सलाह देता हूं। नफा नुकसान को अच्छे से परखें और देखें कि आप अपने करियर में कहां खड़े हैं और उस हिसाब से निर्णय लें।”

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