चीनी वर्चस्व को ख़त्म करने के लिए प्रकाश पादुकोण ने साइना-सिंधु को दिया श्रेय

पूर्व ऑल इंग्लैंड चैंपियन ने ऐकेडमी सिस्टम की भी प्रशंसा की, जहां से कई प्रतिभाशाली बैडमिंटन खिलाड़ियों ने भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

प्रकाश पादुकोण (Prakash Padukone) का मानना ​​है कि ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल (Saina Nehwal) और पीवी सिंधु (PV Sindhu) के दमदार खेल की वजह से भारतीय बैडमिंटन इस मुकाम तक पहुंचा है।

प्रकाश पादुकोण ने स्क्रॉल.इन के साथ एक वीडियो इंटरव्यू में कहा कि, “सिंधु और साइना दोनों ने भारतीय बैडमिंटन को आगे ले जाने में प्रमुख भूमिका निभाई है। वो दोनों असली सुपरस्टार हैं।”

“एक समय था जब भारतीय खिलाड़ी चीनी खिलाड़ियों का सामना करने से डरते थे। पहले जब उन्हें चीनी खिलाड़ियों के सामने पहले दौर में खेलना होता था, तो वो दूसरे दौर के बारे में सोचते भी नहीं थे। अब समय पूरी तरह बदल चुका है।”

इसमें साइना नेहवाल के पति और बैडमिंटन खिलाड़ी परुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap) ने भी पिछले एक दशक में भारतीय बैडमिंटन को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कश्यप लंदन 2012 में ओलंपिक क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाने वाले पहले भारतीय पुरुष हैं।

साइना नेहवाल ने पहली बार बीजिंग 2008 में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर एक उम्मीद जगाई थी और अगले तीन वर्षों में छह सुपरसीरीज खिताब अपने नाम किया। यहीं नहीं उन्होंने चीनी दिग्गज वांग यिहान और वांग शिक्सियान को नियमित रूप से चुनौती दी।

उनका फॉर्म ऐसे ही जारी रहा, जिसकी बदौलत वो 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक अपने नाम करने में सफल रहीं। ये भारतीय बैडमिंटन का पहला ओलंपिक पदक बन गया।

रियो 2016 की रजत पदक विजेता पीवी सिंधु ने अपने सीनियर करियर में जल्दी ही अपनी प्रतिभा दिखाई, जब उन्होंने पूर्व विश्व नंबर 1 चीनी और लंदन के स्वर्ण पदक विजेता ली ज्युरूई (Li Xuerui) को हरा दिया।

सिंधु ने एक और चीनी दिग्गज और दो बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता झांग निंग (Zhang Ning) के विश्व चैंपियनशिप में पांच पदकों के रिकॉर्ड की बराबरी की।

प्रकाश पादुकोण ने कहा, "उन्होंने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को पीछे छोड़ा है, चाहे वो डैन्स या कोरियन खिलाड़ी हों, ये सब बिना किसी डर के खेलने का नतीजा है।"

पीवी सिंधु और साइना नेहवाल
पीवी सिंधु और साइना नेहवालपीवी सिंधु और साइना नेहवाल

भारतीय बैडमिंटन को आगे ले जाने का सुझाव

पूर्व शटलर ने ऑल इंग्लैंड ओपन विजेता और वर्तमान राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand) को इसका श्रेय दिया, जिसने फ़ाइनेंस की चिंता किए बगैर संन्यास के बाद एकेडमी शुरू की, जहां से भारत को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिले।

वहीं प्रकाश पादुकोण को लगता है कि ज़मीनी स्तर पर प्रतिभाओं को ढूंढने के लिए इस तरह की और ऐकेडमियों को स्थापित की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि कैसे आने वाले सालों में भारतीय बैडमिंटन को आगे बढ़ाया जा सकता है।

प्रकाश पादुकोण ने कहा, "मुझे लगता है कि हमें एक कैलेंडर वर्ष में चार महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों पर ध्यान देने की आवश्यकता है - ऑल इंग्लैंड, विश्व चैंपियनशिप, चार साल में एक बार होने वाला ओलंपिक और वर्ल्ड टूर फाइनल।"

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि भारतीय बैडमिंटन में बहुत फर्क पड़ेगा अगर हम ओलंपिक स्वर्ण हासिल करते हैं या ऑल इंग्लैंड जीतते हैं या विश्व चैंपियनशिप जीतते हैं। हम दुनिया में नंबर एक बनना चाह रहे हैं।”

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