लॉकडाउन की इस घड़ी में पुलेला गोपीचंद का मंत्र है परिवार और फ़िटनेस

भारतीय शटलरों को पुलेला गोपीचंद ने ये भी कहा कि इस समय को एक लंबे इंजरी ब्रेक के तौर पर देखें

भारतीय बैडमिंटन नेशनल कोच पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand) ने अपने खिलाड़ियों को कहा कि लॉकडाउन के इस समय को अपने परिवार को समर्पित करें।

46 वर्षीय पूर्व भारतीय दिग्गज को लगता है कि इस समय को सकारात्मक नज़रिए से देखना ही शटलरों के लिए फ़ायदेमंद होगा।

ऐसे में जब टोक्यो ओलंपिक को एक साल के लिए स्थगित कर दिया गया है तो फ़िलहाल कोई बड़ा टूर्नामेंट नहीं होने जा रहा और नियमित तौर पर ट्रेनिंग में भी बाधाएं हो रही हैं। लिहाज़ा शटलरों को इस समय का ध्यान रखते हुए अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करना होगा।

भारतीय न्यूज़ एजेंसी IANS के साथ एक बातचीत में पुलेला गोपीचंद ने कहा, ‘’मैं ये समय अपने परिवार के साथ बिता रहा हूं। साथ ही साथ योगा और मेडिटेशन के ज़रिए सकारात्मक चीज़ों में समय दे रहा हूं। ताकि मैं अपनी फ़िटनेस पर भी ध्यान दे सकूं और इन सबके बीच खिलाड़ियों से भी बातचीत कर रहा हूं।‘’

इस दौरान पुलेला बेहद शांत और इत्मिनान की ज़िंदगी जीने पर ज़ोर दे रहे हैं, उनके हिसाब से इस ब्रेक से भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों के क्वालिफ़िकेशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उन्होंने आगे कहा, ‘’अगर ओलंपिक कुछ महीनों के लिए ही स्थगित हुआ होता तो मुझे खिलाड़ियों को लेकर चिंता होती। लेकिन अभी हमारे पास एक साल से ज़्यादा का समय है। और ये सिर्फ़ भारतीय खिलाड़ियों का ही नहीं बल्कि विश्व के सभी खिलाड़ियों का हाल है, यानी सभी के लिए चीज़ें एक समान हैं।‘’

मंगलवार को बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) ने भी आधिकारिक ऐलान कर दिया है कि जुलाई तक किसी भी तरह की कोई प्रतियोगिता नहीं होगी। वर्ल्ड रैंकिंग भी फ्रीज़ कर दी गई है और क्वालिफ़िकेशन कट ऑफ़ तारीख़ भी स्थगित कर दी गई है।

लॉकडाउन होने से पहले ऑल इंग्लैंड ओपन के तौर पर आख़िरी अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था

2020 टोक्यो ओलंपिक के बाद पुलेला गोपीचंद एक नई भूमिका में नज़र आएंगे
2020 टोक्यो ओलंपिक के बाद पुलेला गोपीचंद एक नई भूमिका में नज़र आएंगे2020 टोक्यो ओलंपिक के बाद पुलेला गोपीचंद एक नई भूमिका में नज़र आएंगे

एक लंबा इंजरी ब्रेक

वैसे खिलाड़ी जो पिछले कुछ समय से चोट से जूझ रहे थे, उनके लिए कोरोना वायरस (COVID-19) एक मौक़ा लेकर आया है। उनके पास एक बार फिर वापसी करने का लंबा समय मिल गया है।

भारतीय शटलर पारुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap) भी उन्हीं एथलीटों में से एक हैं जो इस समय का फ़ायदा उठा रहे हैं। लगातार चोटों की वजह से कश्यप का फ़ॉर्म भी अच्छा नहीं जा रहा था। ऑल इंग्लैंड ओपन के पहले राउंड में ही 33 वर्षीय इस भारतीय शटलर को इंडोनेशियाई खिलाड़ी शेसर हिरेन रुस्तावितो (Shesar Hiren Rhustavito) के ख़िलाफ़ चोट की वजह से मैच छोड़ना पड़ा था।

तो वहीं एक और भारतीय शटलर एचएस प्रणॉय (HS Prannoy) ने भी ये माना है कि इस लंबे ब्रेक का इस्तेमाल वह अपनी निरंतरता को बेहतर करने पर लगाएंगे।

पुलेला गोपीचंद ने उन दिग्गज भारतीय शटलरों को भी सलाह दी जो क़रीब क़रीब टोक्यो ओलंपिक में जगह बना चुके हैं, कि इस समय का फ़ायदा वह ख़ुद को फ़िट रखने और परिवार को समय देने में लगाएँ।

गोपीचंद ने कहा कि, ‘’ज़्यादातर एथलीट ऐसे भी होते हैं जो लगातार खेलते रहने की वजह से चोटिल हो जाते हैं, और फिर आगे के टूर्नामेंट से उन्हें बाहर होना पड़ता है। ऐसे में उन एथलीटों के लिए ये समय एक लंबे इंजरी ब्रेक की तरह है।‘’

‘’मैं बस यही कहूँगा कि जितना हो सके सकारात्मक सोचें और ख़ुद को फ़िट रखें। खिलाड़ियों की अक्सर ये शिकायत होती है कि उन्हें परिवार के साथ और घर पर समय बिताने का वक़्त नहीं मिल पाता, तो लीजिए इस समय का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाइए।‘’

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