पीवी सिंधु और उनके एमबीए करने की कहानी 

भारतीय क्रिकेटर्स के साथ एक चैट शो के दौरान भारत की इस स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी ने खुलासा किया कि कैसे बहुत ज्यादा व्यस्त रहने के दौरान उन्होंने अपनी मास्टर्स डिग्री पूरी की।

 पीवी सिंधु (PV Sindhu) ने अपने करियर में बहुत सी उपलब्धि हासिल की है लेकिन 24 साल की इस खिलाड़ी ने वो भी किया है, जो ज्यादातर एथलीट्स नहीं कर पाते। इस भारतीय बैडमिंटन स्टार के पास कई कई शैक्षणिक डिग्री हैं।

उनके पास हैदराबाद के सेंट एन वूमेंस कॉलेज से एक बैचलर ऑफ कॉमर्स (बी.कॉम) की डिग्री, चेन्नई वेल्स यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की मानद उपाधि तो है ही इसके साथ ही उन्होंने बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) में मास्टर्स की है।

एमबीए डिग्री पीवी सिंधु के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रही, हालांकि चुनौतीपूर्ण से ज्यादा ये शर्मनाक रहा। जेमिमा रोड्रिगेज (Jemimah Rodrigues) और स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) से चैट शो के दौरान भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी इस बारे में विस्तृत चर्चा की।

पीवी सिंधु ने बताया कि मैं पढ़ाई में अच्छी थी और मेरे माता-पिता ने मुझे हमेशा पढ़ाई जारी रखने के लिए हौसला दिया। वहीं एमबीए डिग्री के दौरान ना तो मैं मुख्य परीक्षा दे पाई और ना ही सप्लीमेंट्री, क्योंकि उस दौरान मैं टूर्नामेंट के लिए ट्रैवल कर रही थी।

इस खिलाड़ी ने हंसते हुए बताया कि “मैंने 5-6 विषयों में सप्लीमेंट्री परीक्षा दी, यह थोड़ा शर्मनाक था क्योंकि आसपास के लोग पूछते थे कि क्या मैं मुख्य परीक्षा में फेल हो गई थी”

24 साल की इस खिलाड़ी ने साल 2017 में अपनी एमबीए पूरी की। कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि बैडमिंटन से संन्यास लेने के बाद डिग्री शायद मेरी मदद करें।

एक जती ने बदल दी ज़िंदगी

पीवी सिंधु इस समय वर्ल्ड रैंकिंग में छठे स्थान पर काबिज है और हाल की सालों में वह भारत के बैडमिंटन में उभर कर आई हैं। सिंधु को लगता है कि साल 2012 में संन्यास ले चुकीं ली झुइरुई (Li Xuerui) को हराना उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

भारतीय स्टार ने बताया कि “उनकी (झुइरुई) लंदन ओलंपिक में गोल्ड जीतने बाद थोड़ी फॉर्म बिगड़ी और फिर मैंने उन्हें केवल 17 साल की उम्र में हरा दिया था”

साल 2016 रियो ओलंपिक में सिल्वर पदक जीतने के बाद पीवी सिंधु पूरी दुनिया में छा गई लेकिन कई इवेंट में वह खिताब जीतने के लिए संघर्ष करती नजर आई, उन्हें सेमीफाइनल और फाइनल में हार का सामना करना पड़ा, जिसके कारण लोग उन्हें “सिल्वर सिंधु” नाम से बुलाने लगे।

इस भारतीय खिलाड़ी ने ये धारण पिछले साल गलत साबित की, जब उन्होंने बीडबल्यू वर्ल्ड चैंपियनशिप (BWF World Championships) का खिताब जीता। यह खिताब जीतने वाली वह भारत की पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। इसके बाद उन्होंने कहा था कि हर तरफ नकारात्मक बातों ने उन्हें खिताब जीतने की प्रेरणा दी।

पीवी सिंधु ने बताया कि “मझे याद है कि साल 2017 में मैंने 6-7 सिल्वर मेडल जीते थे लेकिन किसी भी मैच के दौरान, मैं अपनी ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करना पसंद करती हूं, इसलिए मैंने कभी भी अपने पिछले टूर्नामेंट पर ध्यान नहीं दिया।”

भारतीय स्टार ने बताया कि “मुझे पता है कि मैं कइयों से बेहतर हूं और लोग जब मेरी आलोचना करते हैं तो सच में मैं इससे परेशान नहीं होती। मैं पिछले साल जब फाइनल में थे तो मैंने खुद से कहा कि मुझे किसी भी कीमत पर जीतना है। मैंने सिर्फ अपना 100 प्रतिशत दिया और आखिर में जीत हासिल की”।

भारतीय बैडमिंटन स्टार अभी हैदराबाद स्थित अपने घर पर ही है क्योंकि पूरे देश में लॉकडाउन लगा हुआ है। इस दौरान वह कोरोना वायरस से लड़ने के लिए फंड जुटाने के लिए अपने ही शहर की सानिया मिर्जा ( Sania Mirza) के साथ कई एक्टिविटी में शामिल होती हैं।

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