क्रिस्टी गिलमौर ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में साइना नेहवाल के ख़िलाफ़ मुक़ाबले को सबसे कठिन बताया

स्कॉटलैंड की क्रिस्टी गिलमौर ने मुक़ाबले को रोमांचक बनाते हुए तीसरी गेम तक ले गईं थीं लेकिन जीत न सकीं। 

भारतीय फैंस के ज़हन में 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स का फाइनल मुकाबला हमेशा के लिए बस गया है क्योंकि इसमें भारत की दो चहेती बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल (Saina Nehwal) और पीवी सिंधु (PV Sindhu) एक दूसरे के खिलाफ़ टाइटल के लिए कोर्ट पर उतरीं थीं।

गोल्ड कोस्ट का गोल्ड मेडल मुकाबला तो साइना नेहवाल ने 21-18, 23-21 से हासिल कर लिया लेकिन उनके सफ़र का सबसे मनोरंजक मुकाबले सेमिफिनल बना, जहां वह क्रिस्टी गिलमौर (Kirsty Gilmour) के सामने अपने जौहर को दिखाने कोर्ट पर उतरीं थी।

सेमीफाइनल में भारतीय बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल की भिड़ंत स्कॉटलैंड की क्रिस्टी गिलमौर से हुई और इस मुकाबले का रोमांच देखते ही बना।

जहां साइना नेहवाल फाइनल में पहुंचने की राह बना रहीं थीं वहीं दूसरी तरफ क्रिस्टी गिलमौर उन्हें एक-एक अंक के लिए उम्दा खेलने पर मजबूर कर रहीं थीं।

स्कॉटलैंड की खिलाड़ी ने इन्स्टाग्राम लाइव चैट के दौरान भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी संजना संतोष (Sanjana Santosh) को कहा “मैंने 2017 ग्लासगो में उनके खिलाफ तीन गेम का मुकाबला खेला था और उस समय आत्मविश्वास भी पूरा था।

स्कॉटलैंड की क्रिस्टी गिलमौर ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया था।
स्कॉटलैंड की क्रिस्टी गिलमौर ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया था।स्कॉटलैंड की क्रिस्टी गिलमौर ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया था।

पूरी प्रतियोगिता में ही मैंने अच्छा प्रदर्शन दिखाया था और मुझे कड़ी स्पर्धा का मौका नहीं मिला और में एक दम फ्रेश थी।” हालांकि 26 वर्षीय गिलमौर ने साइना नेहवाल को कड़ी टक्कर दी लेकिन मुकाबले को जीत न सकीं।

क्रिस्टी गिलमौर ने आगे अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “मैं झूठ नहीं कहूंगी, वह एक कड़ा मुकाबला था। मैंने उस दिन अद्भुत बैडमिंटन खेला था लेकिन साइना के सामने मुझे हार का सामना करना पड़ा था। वह दिन शायद मेरे करियर के लिए सबसे मुश्किल दिन था।”

गौरतलब है कि साइना नेहवाल ने वह मुकाबला 21-14, 18-21, 21-17 से अपने नाम किया और अपने कारवाँ को आगे बढ़ाया।

तीनों गेम मे साइना ने शुरूआती बढ़त हासिल की (5-0, 4-0 और 7-2) लेकिन हर बार क्रिस्टी गिलमौर ने उम्दा प्रदर्शन दिखाते हुए पलटवार भी किया।

हालांकि दोनों खिलाड़ियों ने ही शानदार प्रदर्शन दिखाया लेकिन जीत भारत की झोली में ही आई। इसके बाद गिलमौर का सामना कनाडा की मिशेल ली (Michelle Li) से हुआ और उन्होंने 21-11, 21-16 से जीत हासिल कर ब्रॉन्ज़ मेडल पर अपने नाम की मुहर लगा दी।

सिंधु या साइना, कौन ज़्यादा कठिन ?

उस समय साइना और सिंधु दोनों ही भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन कर रहीं थीं लेकिन साइना के पास लय और फॉर्म दोनों थी। जहां गिलमौर को नेहवाल के सामने शिकस्त का सामना करना पड़ रहा था वहीं पीवी सिंधु के खिलाफ उन्हें कुछ हसीन पल देखने को मिले।

सिंधु के सामने 1-1 के हेड टू हेड स्कोर के बाद उन्हें अहसास हो गया कि सिंधु ने भी कोर्ट पर उन्हें आसानी से जीतने नहीं दिया और उनकी राह में कांटे बिछाती गईं है।

क्रिस्टी गिलमौर ने आगे कहा “मुझे लगता है जैसा मैंने खेला वह कुछ हद तक साइना के खेल से मेल खाता है और मुझ उनका अंदाज़ ज़्यादा भाता है। मेरे लिए सिंधु, साइना से ज़्यादा कठिन प्रतिद्वंदी हैं क्योंकि उनकी और मेरी कुछ चीज़ें मिलती हैं।

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!