साइना नेहवाल ने भारत के लिए बैडमिंटन में जगाई उम्मीद: पारुपल्ली कश्यप

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी और साइना नेहवाल के पति ने कहा कि उनके ओलंपिक कांस्य पदक ने भारत बैडमिंटन को बेहतर होने के लिए प्रेरित किया।

साइना नेहवाल (Saina Nehwal) के पति और साथी भारतीय शटलर पारुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap) का मानना है इस महिला खिलाड़ी की वजह भारतीय बैडमिंटन के नए युग की शुरुआत हुई है।

ओलंपिक कांस्य पदक, तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड, दो बीडबल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल के साथ साथ दो एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली साइना नेहवाल निस्संदेह के भारत की सबसे सफल बैडमिंटन खिलाड़ियों में शुमार है।

लेकिन साइना के हमसफर पारुपल्ली कश्यप को लगता है उनकी वजह से देश को विश्वास दिलाया कि भारतीय खिलाड़ी अच्छा कर सकते हैं। कश्यप ने कहा कि “साइना हमेशा से एक बहुत बड़ी प्रेरक रही है। उनकी उपलब्धियों, उनके परिणामों ने सभी बैडमिंटन खिलाड़ियों की मानसिकता में बदलाव लाया।”

भारतीय टेबिल टेनिस खिलाड़ी मुदित दानी (Mudit Dani) के साथ इंस्टाग्राम लाइव के दौरान कश्यप ने बताया कि “साइना भारत की तरफ से पहली खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने चीन के खिलाड़ियों को हराना शुरू किया, जो पहले नामुमकिन माना जाता था।”

साइना नेहवाल भारत की एकमात्र महिला खिलाड़ी हैं, जो BWF रैंकिंग के शिखर पर पहुंची। इसके अलावा वह ओलंपिक में पदक जीतने वाली सिर्फ दो भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों में भी शामिल हैं। भारत की तरफ से ये कारनामा साइना नेहवाल के अलावा पीवी सिंधु (PV Sindhu) ने ही किया है।

ओलंपिक में साइना नेहवाल की सफलता

 साइना नेहवाल ने साल 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था, यह इस लेवल पर बैडमिंटन में भारत का पहला पदक था। इस ओलंपिक में साइना पूरे देश की उम्मीद लेकर चौथी वरीयरता के साथ मैदान में उतरी थ।

उन्होंने आसानी से ग्रुप स्टेज की बाधा पार की। इसके बाद राउंड ऑफ 16 में उन्होंने डच शटलर याओ जी (Yao Jie) को मात दी। वहीं बड़ा मौका तब आया, जब उन्होंने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में दो बार के ऑल इंग्लैड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप विजेता टाइन बून (Tine Baun) को शिकस्त दी।

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अपने प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ, साइना नेहवाल ने सीधे गेम्स में जीत दर्ज करते हुए एक मास्टर क्लास दुनिया को दिखाई, पारुपल्ली कश्यप का मानना है कि यह जीत साइना के करियर की सबसे महत्वपूर्ण जीत में से एक है।

इसके अलावा कश्यप ने कहा कि “लोग भूल जाते हैं और केवल कांस्य पदक की ही बात करते हैं। लेकिन आपको ये देखना चाहिए कि उन्होंने किसे हराया था। टाइन बून टूर्नामेंट में किसी को भी हरा सकती थी और वह आसानी से ली ज्यूरुई (Li Xuerui) को परेशान कर स्वर्ण पदक जीत सकती थी।”

ओलंपिक की सफलता पर मिली जुली भावना

अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद साइना नेहवाल को सेमीफाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त वांग यिहान (Wang Yihan) के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा लेकिन चीन की वांग झिन (Wang Xin) के खिलाफ जीत हासिल कर वह कांस्य पदक जीतने में सफल रही।

कांस्य पदक मैच में साइना नेहवाल 18-21 से पिछड़ रही थी लेकिन वांग झिन को घुटने में चोट लग गई और इस वजह से उन्हें मैच से बाहर होना पड़ा। इसी के साथ साइना को पोडियम में खड़े होने का अवसर मिल गया।

पारुपल्ली कश्यप ने नोटिस किया कि साइना नेहवाल अपनी इस सफलता पर ज्यादा उत्साहित नहीं होती, हां उन्हें अपनी उपलब्धि पर गर्व जरूर है।

उन्होंने कहा कि “यह बहुत बड़ा पल था। उनका पोडियम समारोह बहुत भावुक था। कांस्य पदक मैच जिस तरह से समाप्त हुआ, उससे वह वह खुद भ्रम में थी, उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि उन्होंने मेडल जीत लिया है”

साइना के ओलंपिक पदक जीतने के बाद भारत में बैडमिंटन की स्थिति में बहुत सुधार हुआ। आज दुनिया के टॉप 50 खिलाड़ियों में आठ पुरुष खिलाड़ियों और शीर्ष 100 में छह महिला खिलाड़ी शामिल हैं।

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