मनीष कौशिक की बॉक्सिंग को और बेहतर करने में उनके भाई कर रहे हैं उनकी मदद

ट्रेनिंग के लिए जल्दी उठने से लेकर एक बेहतरीन साथी के तौर मनीष कौशिक के भाई उनके लिए काफ़ी मददगार साबित हो रहे हैं।

भारत के अधिकांश मुक्केबाज़ जहां बिना किसी पार्टनर के अपनी ट्रेनिंग कर रहे हैं, वहीं मनीष कौशिक (Manish Kaushik) के पास उनके मुक्केबाज़ी कौशल को निखारने के लिए एक पेशेवर बॉक्सर के तौर पर उनके भाई मौजूद हैं।

लाइटवेट वर्ग श्रेणी के इस मुक्केबाज़ ने इस साल की शुरुआत में एशियन ओलंपिक क्वालिफायर में अपने टोक्यो ओलंपिक टिकट को हासिल किया था। अब उन्होंने अपने नियमित प्रशिक्षण दिनचर्या को दो हिस्सों में विभाजित कर लिया है – तकनीक और ताकत।

द हिंदू से बात करते हुए मनीष कौशिक ने कहा, "फिलहाल मेरा ध्यान और अधिक ताकत हासिल करने पर है और मेरा सुबह के सत्र उसी के लिए है, जबकि मैं शाम को अपनी तकनीक पर काम करता हूं।"

इसके साथ ही पास में एक जिम है, जो सिर्फ मनीष कौशिक के लिए खुला रखा गया था। इसके अलावा उनके गांव में एक रेतीली पहाड़ी पर हर सप्ताह एक दौड़ उनकी ताकत में सुधार करती है। यह उनके राष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर रह चुके उनके भाई ही हैं, जो उनका पूरा ध्यान रखते हैं।

24 वर्षीय विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता ने कहा, “मेरे भाई साहिल, जो मुझसे पांच साल छोटे हैं, वह एक साथी के तौर पर मेरी मदद करते हैं। लॉकडाउन के कारण, अधिकांश बॉक्सर अकेले प्रशिक्षण ले रहे हैं और उनके पास कोई साथी नहीं है। लेकिन मेरे छोटे भाई साहिल मेरी बहुत मदद कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, "वह मेरे साथ सुबह उठते हैं और मेरे साथ ट्रेनिंग करते हैं... यह वास्तव में अच्छा है कि वह बॉक्सर भी हैं अन्यथा मेरे लिए भी चीजें थोड़ी मुश्किल होतीं।

विजेंद्र सिंह हैं मनीष के आदर्श

हरियाणा के भिवानी जिले में पले-बढ़े मनीष कौशिक ने भारत के एकमात्र बॉक्सिंग ओलंपिक पदक विजेता विजेंदर सिंह (Vijender Singh) और एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता विकास कृष्ण (Vikas Krishan) को इसी जिले से आगे बढ़ते हुए देखकर उनके लिए यह करियर चुनना मुश्किल नहीं था।

मनीष कौशिक ने कहा, “मैंने विजेंदर भैया को अपना आदर्श माना और उनकी वजह से ही बॉक्सिंग शुरू की। मैं एक बच्चा था और आठवीं कक्षा में पढ़ रहा था जब उन्होंने ओलंपिक पदक जीता था।”

यही वजह है कि मनीष कौशिक भारत के लिए वर्ल्ड चैंपियनशिप पदक जीतने वाले छठे पुरुष मुक्केबाजों में से एक बन गए। इस खेल के लिए लिया गया उनका निर्णय उन्हें आज इसके बेहतर परिणाम दे रहा है।

मनीष कौशिक ने कहा, "जब मैंने विश्व चैंपियनशिप पदक जीता, तो उन्होंने (विजेंदर ने) मुझे बधाई दी। विजेंद्र सिंह और विकास कृष्ण के बाद भिवानी जिले से तीसरा विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता होने पर मुझे बहुत गर्व है। अब मैं विजेंदर के ओलंपिक पदक विजेता होने के कारनामे को दोहराना चाहता हूं।”

कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के बढ़ते प्रकोप की वजह से जहां ओलंपिक खेलों को स्थगित कर दिया गया है, वहीं इसने कई इवेंट की योजनाओं को भी बाधित करने के लिए मजबूर कर दिया है। दृढ़ संकल्पित मनीष कौशिक शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को मजबूत करने के लिए लॉकडाउन के हर दिन का उपयोग कर रहे हैं।

मनीष कौशिक ने कहा, “समय गुज़र जाता है। इससे पहले कि हम महसूस करें कि 2021 ओलंपिक करीब आ गया है, हमें बेहतर होने के लिए अपने प्रत्येक दिन का उपयोग करना होगा। प्रशिक्षण के अलावा मैं ओलंपिक के लिए तैयार होने वाले प्रेरक वीडियो और मेरे पुराने बॉक्सिंग वीडियो देखता हूं।”

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