भारतीय मुक्केबाज़ मनीष कौशिक टोक्यो ओलंपिक के लिए पूरी तरह तैयार!

भिवानी के उभरते हुए इस नए स्टार मुक्केबाज़ मनीष कौशिक से लोगों को ओलंपिक खेलों में पदक हासिल करने की उम्मीद है।

लेखक सतीश त्रिपाठी ·

कहते हैं ज़िंदगी में कुछ कर गुजरने का सपना हो तो कोई पत्थर रास्ता नहीं रोक सकता है। हरियाणा के युवा मुक्केबाज़ मनीष कौशिक की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार की ज़िदगी बदली बल्कि इसके साथ-साथ वह पूरी दुनिया में अपने जिले और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

भारतीय मुक्केबाज़ मनीष कौशिक (Manish Kaushik) टोक्यो ओलंपिक में अपनी जगह सुनिश्चित कर चुके हैं। वह अमित पंघल (Amit Panghal) और एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) के साथ टोक्यो में अपनी जगह बना चुके हैं। बता दें कि भारतीय मुक्केबाज़ मनीष कौशिक टोक्यो ओलंपिक में क्वालिफाई करने वाले नौवें मुक्केबाज़ हैं।

जहां उन्होंने अम्मान में एशियाई मुक्केबाज़ी ओलंपिक क्वालिफायर (Asian boxing Olympic qualifiers) में अपने प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज़ हैरी गारसाइड (Harry Garside) को मात दी थी। वहीं, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता मनीष अब ओलंपिक में अपना जादू बिखेरते हुए नज़र आएंगे।

भिवानी जिले से शुरु हुई ज़िंदगी

मनीष कौशिक का जन्म 11 जनवरी 1996 को हरियाणा के भिवानी जिले में हुआ था। वह एक मिडिल परिवार से आते हैं। जहां उन्होंने अपने माता-पिता को गेंहू और कपास की खेती करने में उनका हाथ बटाया। मनीष ने अपने परिवार को एक नया जीवन देने के लिए एक नई दिशा चुनी और मुक्केबाज़़ी की दुनिया में कदम रखा।

मनीष सुबह 4 बजे उठकर अपनी दिन की शुरुआत करते और बॉक्सिंग की दुनिया में अपना नाम हासिल करने के लिए दिन रात एक करने में लगे थे। वह अपनी बॉक्सिंग ट्रेनिंग के साथ-साथ पढ़ाई का भी तालमेल रखते थे। फिर इसी तरह मनीष अपनी निजी ज़िंदगी में और बॉक्सिंग की दुनिया में आगे बढ़ रहे थे। वहीं, मनीष कौशिक ने 2015 में कतर के दोहा अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ी टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी सफलता की इबादत लिखना शुरु कर दिया।

मनीष का जन्म जिस जिले में हुआ था, वह भिवानी जिला मुक्केबाज़ों का गढ़ कहा जाता है। जहां पिछले दो दशको में इस धरती ने कई मुक्केबाज़ों को पैदा किया, जिसने सिर्फ हरियाणा का ही नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया। उसमें कविता चहल, जितेन्द्र कुमार और विजेन्द्र कुमार जैसे कई दिग्गज मुक्केबाज़ शामिल हैं। मनीष कौशिक साल 2016 में भारतीय सेना में शामिल हुए।

मनीष कौशिक ने अपना नाम कमाया

मनीष कौशिक रिंग में बॉक्सिंग की प्रैक्टिस कर रहे थे, उस समय वरिष्ठ कोच नरेंद्र राणा की उन पर नजर पड़ी और उन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचाना। उस बारे में उन्होंने उस समय स्क्रॉल से बात करते कहा था, "मुझे पता था कि हमारे पास एक बेहतरीन बॉक्सर है, जो हमें ओलंपिक में पदक दिला सकता है।"

वहीं, मनीष कौशिक ने अगले साल नेशनल चैंपियन को मात दिया। इस पर उन्होंने कहा, "मैंने 2016 में सीनियर कैंप में फाइनल में अनुभवी मुक्केबाज़ शिवा थापा को हराकर चैंपियन का खिताब हासिल किया। इससे मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ गया था" और उसी साल इस भारतीय मुक्केबाज़ ने कजाखिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ी टूर्नामेंट में रजत पदक हासिल कर सबको चौंका दिया।

मनीष कौशिक का कॉमनवेल्थ गेम्स प्रदर्शन  

जहां मनीष कौशिक ने शिवा थापा को मात दिया था तो वहीं, एक बार फिर 2018 के एशियाई खेलों में मनीष उन पर हावी रहे। मनीष कौशिक 2018 के एशियाई खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। मनीष कौशिक ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाने में सफल हुए और रजत पदक अपने नाम किया।

मनीष कौशिक की ओलंपिक की राह

मनीष कौशिक ने ओलंपिक साल में अपनी बेहतरीन शुरुआत की उन्होंने रूस के येकातेरिनबर्ग में 2019 एआईबीए वर्ल्ड मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर खुद को बेहतरीन मुक्केबाज़ के तौर पर साबित किया। लेकिन सेमीफाइनल मुकाबले में उन्हें क्यूबा के एंडी क्रूज़ के साथ हार का सामना करना पड़ा।

वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल जीतने के बाद उन्हें एशियाई मुक्केबाज़ी ओलंपिक क्वालीफायर में सीधे प्रवेश मिला। जहां उन्होंने दो साल पहले उस कॉमनवेल्थ हार के लिए दूसरी वरीयता प्राप्त हैरी गारसाइड को बॉक्स-ऑफ में मात देकर करारा जवाब दिया। 

वहीं, नरेंद्र राणा जिन्होंने 2016 में मनीष कौशिक के ओलंपिक में एक बेहतर मुक्केबाज़ के तौर पर बताया था, उन्होंने कहा, "मुझे हमेशा से मालूम था कि बड़े टूर्नामेंटों में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उनके पास बेहतरीन क्षमता है। उनकी खेलने की गति और शरीर का लचीलापन शानदार है। जब वह रिंग में कदम रखते हैं, तो उन्हें मालूम होता है कि अपने विरोधी को कैसे धाराशायी करना है और कब काउंटर पर खेलना है।"

ओलंपिक खेलना मनीष कौशिक का सपना

नरेंद्र राणा सहित करोड़ो भारतीयों को उम्मीद है कि वह ओलंपिक में भारत के लिए पदक हासिल कर सकते हैं। मनीष कौशिक को इस बात का बिल्कुल अंदाजा है कि उन्हें टोक्यो खेलों के बीच कब और कहां सुधार करने की आवश्यकता है।

दरअसल इस भारतीय मुक्केबाज़ ने बॉक्स-ऑफ में अपनी विरोधी को मात देकर ओलंपिक में जगह बनाने में कामयाब हुए थे। वहीं, नरेन्द्र राणा ने कहा अब इस भारतीय बॉक्सर को दुनियाभर के और अधिक बॉक्सरों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करना होगा। क्योंकि बॉक्स-ऑफ़ में उन्हें जो बॉक्सर मिला, वह हैरी गारसाइडर के अलावा और कोई नहीं था। जहां उन्होंने 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल बाउट में उनको मात दी थी।

वहीं, अब मनीष कौशिक की नजर ओलंपिक में पदक हासिल करने पर है। जिसको लेकर कोरोड़ो भारतीयों को उनके बहुत सारी उम्मीदें हैं।