संन्यास के बाद भी देश के युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने का काम करना चाहती हैं मैरी कॉम

लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता इम्फाल में एक ऐकेडमी चलाती हैं, उनका मानना ​​है कि प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए कॉरपोरेट्स को शुरूआती दौर में सपोर्ट करना होगा।

जब एमसी मैरीकॉम (MC Mary Kom) भारतीय सर्किट में आगे बढ़ रही थीं, तब देश में महिलाओं की मुक्केबाज़ी के बारे में कम लोगों को ही पता थी।

ऐसे में एक महिला होने के नाते, एक पुरुष प्रधान और रूढ़िवादी समाज में खेल में पैर जमाना मणिपुर की मुक्केबाज़ के लिए मुश्किल था। लेकिन उन बाधाओं ने भारतीय दिग्गज को कभी नहीं रोका क्योंकि वो अपनी पीढ़ी में इतना आगे बढ़ गईं कि आने वाली पीढ़ी उन्हें फॉलो करने वाली थी।  

मैरी कॉम देश में महिलाओं की मुक्केबाज़ी के लिए आदर्श बन गई हैं, लेकिन 37 वर्षीय का मानना ​​है कि भारत में एथलीट बहुत ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं, यदि उन्हें करियर में बहुत सपोर्ट की जाए।

इंस्टाग्राम लाइव चैट के दौरान भारतीय विंटर ओलंपियन शिवा केशवन (Shiva Keshavan) के साथ बातचीत में एमसी मैरी कॉम ने बताया कि, "जब मैंने तीन-चार बार विश्व चैंपियनशिप जीती थी तब भी ये काम बहुत मुश्किल था।"

उन्होंने कहा, “बहुत कम कंपनियां हैं जो आगे आती हैं लेकिन ऐसा तब होता है जब आप उच्चतम स्तर पर पहुंच जाते हैं, जैसे कि विश्व चैंपियनशिप या राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल या ओलंपिक में पदक जीतना।

"मेरा मानना ​​है, अगर उच्च क्षमता वाले व्यक्तियों को ज़मीनी स्तर पर सही सपोर्ट दिया जाता है, तो वो बहुत आगे तक जा सकते हैं और ऊँचाइयों को छू सकते हैं। 

लंदन 2012 कांस्य पदक विजेता ने कहा कि, "मुझे लगता है कि हमारे पास ऐसे सपोर्ट और फ़ाइनेंशियल बैकअप की कमी है। इसलिए, हम शीर्ष एथलीटों को बनाने में असमर्थ हैं, जो सभी स्तरों पर अपने दम पर पदक जीत सकते हैं।”

मैरी कॉम का फ़्यूचर प्लान 

हालांकि इस महिला मुक्केबाज़ ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों से स्थिति अच्छी हो गई है, मैरी कॉम विभिन्न खेलों में युवा एथलीटों को सपोर्ट करने के बारे में बोल रही थीं। कुछ इस तरह का काम करने के लिए एक बार उन्होंने संन्यास लेने तक का फैसला कर लिया था।

उन्होंने कहा, "अधिक संगठनों और लोगों को आगे आकर इन एथलीटों की मदद करने की आवश्यकता है और मैं व्यक्तिगत रूप से संगठन का हिस्सा बनना चाहूँगी और भविष्य के इन एथलीटों की मदद और सपोर्ट करूंगी।

लेकिन ओलंपिक के बाद मैं खाली हो जाऊंगी और ऐसा करने में आसानी होगी। हमें एकजुट होने की जरूरत है। ये तभी संभव है जब हम सभी एक साथ आएं और इन एथलीटों को सपोर्ट करें।”

मैरी कॉम 2007 से इम्फाल में - SAI बॉक्सिंग अकादमी चला रही हैं। वर्षों से इस अकादमी ने कई युवाओं को अपने जीवन का मकसद खोजने में मदद की है, भारतीय मुक्केबाज़ संन्यास के बाद भी देश कि सेवा में अपना योगदान देना चाहती हैं।  

उसने कहा, "अकादमी खोलने का मुख्य कारण उन सभी युवाओं को सपोर्ट करना था जो ट्रेनिंग का खर्च नहीं उठा सकते थे, भले ही वो अपने जीवन में बहुत बड़ा करने की क्षमता रखते हों।" 

“मैं उन बच्चों की मदद करने की कोशिश करती हूं जिनको स्कूल या कहीं से भी सपोर्ट नहीं मिल पाता है। ये मेरी कोशिश है कि हम बच्चों की मदद करके अपने देश को कुछ वापस दें। फिलहाल जितना संभव हो, मैं उतना समय देने के लिए अपनी पूरी कोशिश करती हूं लेकिन वह समय आएगा जब मैं संन्यास के बाद अपना सारा समय कोचिंग और ट्रेनिंग सुविधाएँ देने में लगा सकती हूं।” 

मैरी कॉम ने अगले साल टोक्यो में होने वाले अपने दूसरे ओलंपिक खेल के लिए क्वालिफाई कर लिया है। वो अपने सपने में एक ओलंपिक स्वर्ण के साथ बिदाई लेना चाहती हैं।

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