ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है मैरी कॉम का मिशन

लंदन ओलंपिक गेम्स में ब्रॉन्ज़ जीतने के बाद अब एमसी मैरी कॉम की नज़र ओलंपिक गोल्ड पर है। 

भारत की फ्लाईवेट बॉक्सर एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) ने ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने को अपना आखिरी सपना बताया है और उन्हें पूरा विश्वास है कि वे इसे हासिल करने में सफल होंगी।

इस मणिपुरी मुक्केबाज़ ने पहली बार 2012 लंदन गेम्स में भारत के लिए ओलंपिक में शिरकत की थी। अपने पहले ओलंपिक संस्करण में ही मैरी ने ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल कर भारतीय खेल के खेमे को गौरवान्वित किया था और भारतीय बॉक्सिंग को मज़बूत हाथों में ला खड़ा किया था। हालांकि इनके करियर में एक रुकावट तब आई जब वे खुद को 2016 रियो ओलंपिक गेम्स का हिस्सा नहीं बना पाईं और इसी मलाल को दूर करने वे टोक्यो 2020 की रिंग में उतरेंगी।

हिंदुस्तान टाइम्स के साथ मैरी कॉम ने अपनी इस मंशा को बाहर लाया, “मेरी ज़िन्दगी में ओलंपिक सबसे ख़ास स्थान रखता है और यही मेरा फोकस भी है।”

एशियन बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफायर्स में मैरी कॉम ने क्वार्टरफाइनल में आयरिश मैग्नो को मात दी।   
एशियन बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफायर्स में मैरी कॉम ने क्वार्टरफाइनल में आयरिश मैग्नो को मात दी।   एशियन बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफायर्स में मैरी कॉम ने क्वार्टरफाइनल में आयरिश मैग्नो को मात दी।   

अपने 20 साल के करियर में मैरी ने बहुत सी उंचाइयों को हासिल किया है।  ग़ौरतलब है कि मैरी पहली ऐसी बॉक्सर हैं जिन्होंने 6 बार वर्ल्ड चैंपियनशिप (World Championships) के ख़िताब पर अपने नाम की मुहर लगाई है और 5 बार एशियन चैंपियनशिप के खिताब को अपने कब्ज़े में किया है।  यहां तक कि मैरी कॉम एशियन गेम्स (Asian Games) और कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज़ भी बनीं।  अब बस इनके निशाने पर ओलंपिक गोल्ड मेडल है और वे इसे जीतने की पूरी शिद्दत कर रही हैं।

मैरी कॉम ने आगे कहा “मैंने सब कुछ हासिल किया है, बस ओलंपिक गोल्ड की ही कमी है।  मैं इसे जीतकर अपने देश को तोहफ़ा देना चाहती हूं।

किसी भी खिलाड़ी के लिए उम्र बहुत सी बाधाएं लेकर आती है लेकिन इस 37 वर्षीय मुक्केबाज़ के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है और ऐसा लगता है कि उनके अंदर कोई युवा बैठा हो।  हाल ही में मैरी ने एशियन बॉक्सिंग क्वालिफ़ायर्स में हिस्सा लेकर टोक्यो 2020 (Tokyo 2020) में जगह प्राप्त की है और यह उनके जुनून को दर्शाने के लिए काफी है।

उन्होंने आगे कहा “मुझे एक साल और कठिन परिश्रम करने में कोई दिक्कत नहीं है।  मानसिक, शारीरिक और मेरी इच्छा शक्ति मज़बूत है।  मुझे कोई भी आसानी से मात नहीं दे सकता, किसी के पास मेरे जितना अनुभव नहीं है।  मेरा अनुभव बहुत बड़ा है और यही मेरी ताकत भी है। ”

आइसोलेशन में भी ट्रेनिंग जारी

जहां कोरोना वायरस (COVID-19) ने विश्व में हाहाकार मचा रखा है वहीं (International Olympic Committee - IOC) ने ओलंपिक गेम्स को अगले साल करने की घोषणा की है।  इस वजह से खिलाड़ियों की ट्रेनिंग में भी अड़चनें बढ़ गई हैं और हर खिलाड़ी इस समय घर में बैठ अपने हिसाब से ट्रेनिंग करने में जुटा है।  खेल की दुनिया में जुनून और खिलाड़ियों में जोश की कमी नहीं है और मैरी कॉम ने इसका सबूत तब दिया जब उन्होंने ऐसी स्थिति में भी हार नहीं मानी और अपनी फिटनेस पर ध्यान दिया और अपनी ट्रेनिंग को जारी रखा।

मुक्केबाज़ ने आगे बताया “लॉकडाउन की स्थिति में भी मैं ट्रेनिंग कर रही हूं।  चाहे कुछ भी हो जाए मैं रोज़ ट्रेनिंग करती हूं। मैं कम से कम एक घंटे का एक सेशन तो ज़रूर करती हूं जिसमे रोप स्किपिंग के साथ शैडो बॉक्सिंग और वेट ट्रेनिंग भी है।  मेरे घर पर ट्रेडमिल भी है जहां मैं समय देती हूं।”

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