मैंने बॉक्सिंग नहीं चुनी बल्कि बॉक्सिंग ने मुझे चुना है - विजेंदर सिंह

भारतीय दिग्गज मुक्केबाज़ ने ये भी माना कि कईयों के आदर्श होने की वजह से उनके ऊपर ज़िम्मेदारी भी आ जाती है

भारत के पहले ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने एमसी मैरी कॉम को मौजूदा भारतीय मुक्केबाजी दल से अपने सबसे बड़े दावेदार के रूप में चुना है, जो हाल ही में जॉर्डन के अम्मान में आयोजित एशियन बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफ़ायर में सफल रहीं थीं।

हाल ही में बॉक्सिंग क्वालिफायर्स के दौरान भारतीय महिला बॉक्सर साक्षी चौधरी (Sakshi Chaudhary) ने ओलंपिक कांस्य पदक विजेता विजेंदर सिंह (Vijender Singh) को अपना आदर्श बताया था। ना केवल साक्षी बल्कि कई मुक्केबाज चाहे वह पुरुष हों या महिला इस दिग्गज से प्रेरणा लेते हैं।

वहीं 6 बार की वर्ल्ड चैंपियन एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) का ये आखिरी ओलंपिक हो सकता है, जब विजेंदर से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि “मैरीकॉम महान खिलाड़ी है और अन्य लोगों के लिए आदर्श है। उनके तीन बच्चे हैं और वह अभी भी खेल रही हैं। मैं समझ सकता हूं कि वह किन चुनौतियों का सामना करती होंगी। हां मैं बस इतना जरूर कहूंगा कि वह हम सभी के लिए प्रेरणादायक है”

मैरी कॉम की नज़र टोक्यो में अपने दूसरे ओलंपिक पदक पर होगी।
मैरी कॉम की नज़र टोक्यो में अपने दूसरे ओलंपिक पदक पर होगी।मैरी कॉम की नज़र टोक्यो में अपने दूसरे ओलंपिक पदक पर होगी।

कैसे बनें एक बेहतरीन आदर्श

जब ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत में विजेंदर सिंह से ये पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “इस तरह की बातें उन्हें और अच्छा करने की प्रेरणा देती हैं, लेकिन इसके साथ ही आपके ऊपर कई जिम्मेदारी भी आ जाती है। जैसे आप ऐसा कोई काम न करें, जिससे वह प्रभावित हों और वह मुझे अपना आदर्श न मानें”।

विजेंदर ने बताया कि “मैंने बॉक्सिंग नहीं चुनी बल्कि बॉक्सिंग ने मुझे चुना है। इस खेल ने मुझे पैसा और शोहरत दी और ये खेल ही मेरी जिंदगी है”। इसके अलावा बीच में ये खबर भी आई थी कि विजेंदर ओलंपिक में हिस्सा ले सकते हैं तो इस पर इस मुक्केबाज ने कहा कि “सबसे पहले तो कोरोना वायरस (COVID-19) के कारण हम सभी सावधानियां बरत रहे हैं, इसलिए इस समय इसका जवाब देना ठीक नहीं होगा”।

विजेंदर सिंह ने भारत के लिए बीजिंग 2008 में कांस्य पदक जीता था
विजेंदर सिंह ने भारत के लिए बीजिंग 2008 में कांस्य पदक जीता थाविजेंदर सिंह ने भारत के लिए बीजिंग 2008 में कांस्य पदक जीता था

पिछले कुछ सालों में भारत में बॉक्सिंग का क्रेज बढ़ा है और कई बॉक्सर्स ऐसे हैं, जिनसे ओलंपिक पदक की उम्मीद है, जब विजेंदर से पूछा गया कि ओलंपिक में कितने भारतीय बॉक्सर्स पदक जीत सकते हैं तो उन्होंने कहा कि “सबसे पहले ये तो साफ होना चाहिए कि ओलंपिक होंगे या नहीं लेकिन हां अगर होते हैं तो हम ज्यादा मेडल्स जीत सकते हैं। इसका बड़ा कारण ये भी हो सकता है कि कई देश ओलंपिक में हिस्सा ले ही ना”।

अब संन्यास के बाद विजेंदर का क्या प्लान है तो इस पर इस बॉक्सर ने कहा “जिंदगी एक बार मिलती है तो मैं इसका पूरा फायदा उठाउंगा। चाहे वह राजनीति हो, बॉलीवुड हो या खेल, मैं हर फील्ड में अपना शत प्रतिशत दूंगा”।

भारतीय मुक्केबाज़ों के लिए आगे क्या ?

एशियन बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफ़ायर में भारत के 13 मुक्केबाजों में से 9 ने 2020 ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया, जो उनके ओलंपिक इतिहास में देश का सबसे बड़ा मुक्केबाजी दल है।

हालांकि, शेष चार मुक्केबाजों, नमन तंवर (Naman Tanwar), गौरव सोलंकी (Gaurav Solanki), सचिन कुमार (Sachin Kumar) और साक्षी चौधरी के पास पेरिस में 13-20 से होने वाले वर्ल्ड बॉक्सिंग क्वालिफ़ायर में ओलंपिक बर्थ को अपने नाम करने का एक और मौका होगा।

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!