कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स पर हैं निकहत ज़रीन की नज़र

अगले साल होने वाले ओलंपिक गेम्स में जगह न बना पाने वाली भारतीय मुक्केबाज़ निकहत ज़रीन 51 किग्रा भारवर्ग में कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाड में स्पर्धा करने की तैयारी कर रही हैं।

लेखक Naveen Peter ·

भारतीय युवा बॉक्सर निकहत ज़रीन (Nikhat Zareen) के ओलंपिक के सपनों पर ब्रेक तो ज़रूर लगी है लेकिन उनकी नज़रें अब 2022 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स हैं।

एशियन बॉक्सिंग ओलंपिक वालिफायर्स से पहले हुए नेशनल ट्रायल्स से पहले निकहत का सामना 51 किग्रा भारवर्ग में एमसी एमसी मैरी कॉम (MC Mary Kom) के साथ हुआ और उस स्पर्धा में उन्हें हार का सामना भी करना पड़ा था। अब जब मैरी कॉम ने टोक्यो 2020 में अपनी जगह बना ली है तो निकहत ज़रीन के लिए क्वालिफाई करना बहुत मुश्किल हो गया है।

कहते हैं न कि असल खिलाड़ी वही है जो कभी सपने देखना न छोड़े और निकहत ने भी ठीक ऐसा ही किया और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स (2022 Commonwealth Games) में प्रवेश कर अच्छा प्रदर्शन करने सपना देख लिया।

ओलंपिक चैनल से बात करते हुए युवा बॉक्सर ने कहा “फिलहाल मेरा लक्ष्य 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2022 एशियन गेम्स है। मेरे ज़हन में फिलहाल यही चल रहा है।

“मुझे नहीं पता कि अगले साल मेरे लिए प्रतियोगिताएं हैं या नहीं लेकिन मैं इस चीज़ को पुख्ता कर लेना चाहती हूं कि मैं अपनी फिटनेस को उच्च कोटि पर रखूं और खेल से दूर भी न रहूँ। महामारी के कारण पिछले कुछ महीने मुश्किल थे लेकिन अब कुछ ही समय में मैं ट्रेनिंग शुरू करने वाले हूं।”

नए साल पर ओलंपिक बॉक्सिंग क्वालिफायर्स के बचे हुए मुकाबलों को आयोजित किया जाएगा। ऐसे में निकहत ज़रीन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।

पूर्व जूनियर वर्ल्ड चैंपियन ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा “यह बल्कि आसान होता है कि आपको पता है कि आने वाले कुछ महीनों में आपके लिए प्रतियोगिताएं खड़ीं हैं। ऐसे में आप अपनी फिटनेस पर काम करते हैं। अपने खेल पर, फिटनेस पर और वज़न पर ध्यान देते हैं।”

“फिलहाल मेरा वज़न 53-54 किग्रा है। आगे चलकर किसी प्रतियोगिता का मौका मिलता है तो मुझे वज़न घटाना होगा। फिलहाल सही शेप में रहना मेरे लिए मुश्किल हो रहा है। मैं आशा कर रही हूं कि जब प्रतियोगिताएं शुरू होंगी तब मुझे कुछ स्पर्धा करने का अवसर मिलेगा ताकि में रूटीन मैं आ सकूं।”

रोज़ करना है खुद को साबित

हर एथलीट के लिए सबसे उच्च स्तर पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करना एक सपने जैसा होता है और ओलंपिक गेम्स में अभी तक क्वालिफाई न कर पाना निकहत के लिए निराशाजनक है और इसका प्रभाव भी उन पर पड़ा है।

भारतीय बॉक्सर ने आगे बात करते हुए कहा “मुझे लगता है यह दोनों का मिश्रण है। अगर आज ट्रेनिंग शुरू करती हूं तो मुझे गेम्स के लिए तैयारी का ज़्यादा मौका मिलेगा। अगले चार सालों में आपको नहीं पता कि किस प्रकार के कौशल पूर्ण खिलाड़ी इस भारवर्ग में आने वाले हैं।”

“फिलहाल आगे बढ़ने का हमारा बेंचमार्क मैरी कॉम है। ऐसे में 51 किग्रा भारवर्ग में यह बताना मुश्किल है कि कौन सर्वश्रेष्ठ है। अभी मुझे नहीं पता कि में ट्रेनिंग किस लिए कर रही हूं। मेरी स्पर्धा किस प्रकार की होगी।”

“हां, ओलंपिक 4 साल में एक बार आता है लेकिन हमे खुद को रोज़ साबित करना होता है। अगर हम हल्के पड़े तो हम पीछे रह जाएंगे। मेरे लिए एक बार में एक कदम आगे बढ़ाना अहम है। मुझे यह पुख्ता करना है कि मैं रास्ते में आने वाली हर चुनौती से पार पा सकूं।”

एशिया में स्पर्धा करना आसान नहीं है और एक बॉक्सर को चुनौती मैरी कॉम और दो बार की ओलंपियन रेन कैनकैन (Ren Cancan) जैसे दिग्गज देते हैं। इसमें चीन की युंग चांग (Yuang Chang) जैसी एशियन दिग्गज भी जुड़ गई है।

युंग चांग की बात करें तो एशियन बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालिफायर्स (Asian Boxing Olympic Qualifiers) में उन्होंने अपना कौशल दिखाया था और अब वह एशिया में अपना दबदबा जमाने के लिए तैयार हैं।

निकहत ज़रीन ने आगे-आगे कहा “यह मुश्किल चुनौती है। मेरी नज़रें चीनी मुक्केबाज़ों पर है।”

“मुझे थाईलैंड ओपन में उन्होंने मात दी थी। इसका बदला अभी लेना बाकी है। वह एक अच्छी रेसलर हैं और उन्हें देख कर अच्छा लगता है जो वह रिंग में करती हैं। उन्हें रिंग में अच्छा लगता है। वह बेहतर मूव करती हैं। लेकिन एशियाड में मैं उन्हें हराना चाहती हूं।